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NEET पेपर लीक केस में CBI को राहत, मनीषा की लिखावट का फिर होगा नमूना

Saba Naaz
23 July 2026 5:01 PM IST
NEET पेपर लीक केस में CBI को राहत, मनीषा की लिखावट का फिर होगा नमूना
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नीट-यूजी २०२६: पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने आरोपी मनीषा संजय हवलदार के अतिरिक्त हस्तलिपि और हस्ताक्षर के नमूने लेने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े रिकॉर्ड काफी विस्तृत हैं और फोरेंसिक जांच के लिए पहले लिए गए नमूने पर्याप्त नहीं पाए गए हैं। इसके बाद सीबीआई को दोबारा नमूने लेने की मंजूरी दी गई।

विशेष सीबीआई न्यायाधीश अजय गुप्ता ने जांच एजेंसी की अर्जी स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि 27 से 29 जुलाई के बीच जेल में बंद आरोपी मनीषा हवलदार के नए हस्तलिपि और हस्ताक्षर के नमूने लिए जाएं। अदालत ने जेल अधीक्षक को इस प्रक्रिया के दौरान जरूरी व्यवस्था करने और स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सीबीआई ने अदालत में बताया कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच के दौरान आरोपी मनीषा हवलदार की भूमिका सामने आई है। एजेंसी के अनुसार, मनीषा पर आरोप है कि उसने भौतिकी विषय के हस्तलिखित प्रश्न एक अन्य आरोपी मनीषा मंधारे को भेजे थे। जांच एजेंसी का दावा है कि मंधारे के मोबाइल फोन से इन हस्तलिखित प्रश्नों की तस्वीरें भी बरामद हुई थीं।

सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि मनीषा हवलदार ने एक अन्य आरोपी तेजस हर्षद कुमार शाह को भी भौतिकी के प्रश्न लिखवाए थे। इन दस्तावेजों की जांच के लिए हस्तलिपि मिलान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी वजह से सीबीआई ने अतिरिक्त नमूनों की मांग की थी।

जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि इससे पहले भी 30 मई को आरोपी के हस्तलिपि नमूने लेने की अनुमति दी गई थी। उस समय करीब 60 पेज के नमूने लिए गए थे, लेकिन सरकारी प्रश्नित दस्तावेज परीक्षक ने रिपोर्ट दी कि उपलब्ध नमूने सभी संदिग्ध दस्तावेजों की जांच और तुलना के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

सीबीआई ने दलील दी कि निष्पक्ष जांच और वैज्ञानिक तरीके से सबूतों की पुष्टि के लिए अतिरिक्त हस्तलिपि और हस्ताक्षर नमूने जरूरी हैं। एजेंसी का कहना है कि फोरेंसिक जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि बरामद हस्तलिखित प्रश्न वास्तव में आरोपी द्वारा ही लिखे गए थे या नहीं।

वहीं, आरोपी मनीषा हवलदार की ओर से सीबीआई की मांग का विरोध किया गया। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि जांच एजेंसी पहले ही करीब 60 पेज के हस्तलिपि नमूने ले चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने नमूने उपलब्ध हैं तो दोबारा नमूने लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी वरिष्ठ नागरिक हैं और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। बार-बार हस्तलिपि नमूने लेने की प्रक्रिया उन्हें परेशान करने वाली हो सकती है। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीबीआई की मांग को स्वीकार कर लिया।

नीट-यूजी पेपर लीक मामला देशभर में चर्चा का विषय रहा है। इस मामले में सीबीआई कई आरोपियों से पूछताछ कर चुकी है और सबूत जुटाने में लगी हुई है। जांच एजेंसी लगातार दस्तावेजों, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।

अदालत के इस फैसले के बाद अब मनीषा हवलदार के नए हस्तलिपि और हस्ताक्षर नमूनों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद जांच में आगे की कार्रवाई तय होगी। सीबीआई का मानना है कि यह प्रक्रिया पेपर लीक मामले में आरोपों की पुष्टि या खंडन करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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