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Ashoka यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत

Ashish verma
21 May 2025 11:37 PM IST
Ashoka यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दी अंतरिम जमानत
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Ashoka यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान को राहत

New Delhi.नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत दे दी, लेकिन उनके खिलाफ जांच पर रोकलगाने से इनकार कर दिया। महमूदाबाद को ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।शीर्ष अदालत ने कहा कि हालांकि सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन महमूदाबाद की टिप्पणी डॉग व्हिसलिंग (किसी खास समूह को भड़काने वाला संदेश) प्रतीत होती है।महमूदाबाद सोनीपत में अशोका यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को मामले की जांच के लिए 24 घंटे के भीतर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया।एसआईटी का नेतृत्व महानिरीक्षक (आईजी) रैंक का अधिकारी करेगा, जिसमें पुलिस अधीक्षक (एसपी) रैंक की एक महिला अधिकारी भी शामिल होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को आगे की जांच की सुविधा के लिए अंतरिम जमानत दी गई है और महमूदाबाद को अपना पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।

प्रोफेसर के पास कहने को शब्द नहीं हैं: कोर्टप्रोफेसर की पोस्ट में शब्दों के चयन पर सवाल उठाते हुए पीठ ने कहा कि उनका इस्तेमाल जानबूझकर दूसरों को अपमानित करने, नीचा दिखाने या असहज करने के लिए किया गया था।प्रोफेसर के पास कहने को शब्द नहीं हैं। वह दूसरों को ठेस पहुंचाए बिना सरल भाषा में भी यही भावनाएं व्यक्त कर सकते थे। महमूदाबाद के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि प्रोफेसर की टिप्पणी में कोई आपराधिक इरादा नहीं था।उन्होंने कहा कि पोस्ट का अंत "जय हिंद" से हुआ, जो इसकी देशभक्ति प्रकृति को दर्शाता है। राहत मांगते हुए सिब्बल ने कहा कि प्रोफेसर न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी पत्नी नौ महीने की गर्भवती हैं। इस तरह की टिप्पणी करने का यह सही अवसर नहीं है, लेकिन इन टिप्पणियों को इस तरह से देखा जाना चाहिए कि उनमें कोई आपराधिक इरादा नहीं है।उन्होंने कहा कि पोस्ट का अंत "जय हिंद" से हुआ, जो इसकी देशभक्ति प्रकृति को दर्शाता है। राहत मांगते हुए सिब्बल ने कहा कि प्रोफेसर न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी पत्नी नौ महीने की गर्भवती हैं। इस तरह की टिप्पणी करने का यह सही अवसर नहीं है, लेकिन इन टिप्पणियों को इस तरह से देखा जाना चाहिए कि उनमें कोई आपराधिक इरादा नहीं है।

प्रोफेसर के मानवाधिकार और स्वतंत्रता का हनन हुआ है: मीडिया रिपोर्टएनएचआरसी ने हरियाणा पुलिस प्रमुख को नोटिस भेजाराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बुधवार को कहा कि उसने महमूदाबाद की गिरफ्तारी का स्वत: संज्ञान लिया है और हरियाणा पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किया है। आयोग ने हरियाणा पुलिस से एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि मीडिया रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि प्रोफेसर के मानवाधिकार और स्वतंत्रता का हनन हुआ है।भाजपा ने कहा- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जिम्मेदारी के साथ आती है भाजपा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी याद दिलाती है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जिम्मेदारी के साथ आती है। भाजपा आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत दी, लेकिन गंभीर चिंता जताई। यह सिर्फ एक व्यक्ति के बारे में नहीं है। हमें संवाद के लिए खड़ा होना चाहिए, बल्कि सम्मान के लिए भी खड़ा होना चाहिए।जेल तक नहीं पहुंचा आदेश, आज हो सकती है रिहाईके अनुसार, महमूदाबाद को रिहा नहीं किया जा सका क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश बुधवार शाम तक जेल तक नहीं पहुंचा। अब गुरुवार को आदेश आने के बाद ही उसकी रिहाई संभव हो सकेगी। परिजनों ने बुधवार दोपहर को ही उसका मूल पासपोर्ट राई थाने में जमा करा दिया था। सोनीपत कोर्ट ने पासपोर्ट जमा कराने के लिए बुधवार शाम पांच बजे तक का समय दिया था।


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