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- चीनी कीमतों में जल्द...

नई दिल्ली। पिछले करीब 15 दिनों से चीनी की बढ़ती कीमतें लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। जून महीने के बाद से चीनी के भाव में तेजी देखने को मिली, जिसके बाद बाजार में सप्लाई को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जाने लगीं। अब रक्षाबंधन का त्योहार गुजरने के बाद लोगों की नजर इस बात पर है कि क्या चीनी की कीमतों में गिरावट आएगी और आने वाले त्योहारों के दौरान बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहेगी या नहीं।
सरकार ने बढ़ती कीमतों और सप्लाई की स्थिति को देखते हुए चीनी मिलों के स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया है। इसके बाद चीनी की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पखवाड़ेवार कोटा प्रणाली लागू की गई है।
चीनी की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी
बीते कुछ समय में चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली थी। जून के बाद बाजार में चीनी के भाव बढ़ने लगे, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ मिठाई कारोबारियों और खाद्य उद्योग से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई।
त्योहारी सीजन में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे थे। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, जिससे चीनी की खपत भी बढ़ती है।
इसी को देखते हुए सरकार ने चीनी की आपूर्ति और स्टॉक की निगरानी शुरू कर दी।
सरकार ने उठाए कदम
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने चीनी मिलों के स्टॉक की जांच कराई। फिजिकल वेरिफिकेशन के जरिए यह पता लगाया गया कि मिलों के पास वास्तव में कितना स्टॉक उपलब्ध है।
इसके बाद सरकार ने चीनी मिलों के लिए पखवाड़ेवार कोटा प्रणाली लागू की। इस व्यवस्था के तहत मिलों को एक निश्चित मात्रा में चीनी बाजार में जारी करने की अनुमति दी जाती है, ताकि सप्लाई संतुलित बनी रहे और कीमतों में अनावश्यक तेजी न आए।
सरकार का उद्देश्य त्योहारों के दौरान चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है।
रक्षाबंधन से पहले मिलों में गिरे दाम
रिपोर्ट के अनुसार, रक्षाबंधन से पहले ही चीनी मिलों में कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक गिरावट देखने को मिली थी। अब इसका असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देने की उम्मीद जताई जा रही है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने भी चीनी की कीमतों में कमी आने की संभावना जताई थी।
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा था कि मिल स्तर पर चीनी के दामों में गिरावट आई है और इसका असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई देगा।
एक हफ्ते में खुदरा कीमतों में राहत की उम्मीद
ISMA के अनुसार, खुदरा बाजार में कीमतों में कमी आने में कुछ समय लग सकता है। अनुमान जताया गया था कि अगले एक सप्ताह के भीतर उपभोक्ताओं को राहत मिलनी शुरू हो सकती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चीनी की खुदरा कीमतों में कमी आनी शुरू हो गई है। बताया गया कि हाल ही में चीनी के औसत खुदरा भाव में करीब 73 पैसे प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद कीमत लगभग 64.33 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।
त्योहारों में सप्लाई को लेकर सरकार सतर्क
आने वाले महीनों में कई बड़े त्योहार आने वाले हैं, जिनमें चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में सरकार यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतें नियंत्रण में रहें।
मिठाई कारोबारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। यदि सप्लाई बेहतर रहती है तो इसका असर कीमतों पर भी पड़ेगा।
किसानों और चीनी उद्योग पर भी नजर
चीनी की कीमतों में बदलाव का असर गन्ना किसानों और चीनी उद्योग पर भी पड़ता है। सरकार को उपभोक्ताओं के हितों के साथ-साथ किसानों और मिलों के संतुलन को भी ध्यान में रखना होता है।
चीनी उद्योग का कहना है कि बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उत्पादन, स्टॉक और मांग के बीच संतुलन जरूरी है।
आगे कैसी रहेगी कीमतों की स्थिति
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनी रहती है और सरकार की निगरानी जारी रहती है तो चीनी की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, उत्पादन और मांग जैसे कई कारक चीनी के भाव को प्रभावित करते हैं।
फिलहाल सरकार की कोशिश है कि त्योहारों के मौसम में उपभोक्ताओं को महंगी चीनी से राहत मिले और बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध रहे। आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में गिरावट का असर आम लोगों तक कितना पहुंचता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।





