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लाइसेंस से बिजनेस तक राहत, दिल्ली सरकार ला रही नया बिल

दिल्ली : कारोबार और आम जनता के कामकाज को आसान बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी में प्रस्तावित 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' का मसौदा अब अंतिम रूप ले चुका है। इस बिल के जरिए व्यापार से जुड़े नियमों को सरल बनाने, अनावश्यक प्रक्रियाओं को खत्म करने और लाइसेंस व्यवस्था को आसान बनाने की तैयारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक सप्ताह के भीतर इसे दिल्ली कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है।
सरकार का लक्ष्य है कि अगस्त 2026 के मध्य तक सभी प्रमुख व्यावसायिक सुधारों को लागू कर दिया जाए, ताकि व्यापारियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी इसका सीधा लाभ मिल सके। बुधवार को लोकनिवास में उपराज्यपाल टीएस संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की संयुक्त अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस बिल और अन्य सुधारों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि व्यापार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने से जुड़े सभी लंबित सुधारों को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। सरकार का उद्देश्य दिल्ली को निवेश के लिए बेहतर माहौल वाला शहर बनाना है, जहां कारोबार शुरू करने और उसे चलाने में कम से कम परेशानी आए।
इस बिल के तहत दूसरे चरण में चिन्हित 28 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से 13 क्षेत्रों को शामिल किया गया है। मसौदा तैयार होने के बाद इसे सुझाव और परामर्श के लिए 29 विभागों को भेजा गया था। सभी विभागों से प्राप्त सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया गया है।
इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र में नियमों को सरल बनाने और राइट टू सर्विसेज के तहत नागरिकों को अपील का अधिकार देने से जुड़े विधेयकों को भी आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को सरल बनाने से लोगों को सरकारी सेवाएं तेजी से मिल सकेंगी।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि सुधार अभियान के तहत कई अहम फैसले पहले ही लिए जा चुके हैं। इनमें दिल्ली नगर निगम द्वारा दोहरे ट्रेड लाइसेंस की व्यवस्था को समाप्त करना शामिल है। इसके अलावा दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालन से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया जा रहा है।
नए बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। इससे छोटे व्यापारियों और नए उद्यम शुरू करने वालों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि बिजली, लाइसेंस और अन्य अनुमतियों की प्रक्रिया आसान होने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
औद्योगिक और व्यावसायिक भूखंडों से जुड़े नियमों में बदलाव की भी तैयारी है। इसमें सेटबैक, एफएआर और ग्राउंड कवरेज जैसे नियमों में राहत देने की योजना है। ये सुधार दिल्ली के आगामी मास्टर प्लान 2041 और यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज-2026 से जुड़े हुए हैं।
मास्टर प्लान के अंतिम चरण में होने के कारण इन बदलावों को जल्द लागू किए जाने की संभावना है। इससे शहर में लॉजिस्टिक्स, निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बाधाएं कम होंगी। कारोबारियों को जमीन, निर्माण अनुमति और अन्य प्रक्रियाओं में पहले की तुलना में कम दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना और गैर जरूरी कागजी कार्रवाई को कम करना है। सरकार का मानना है कि आसान नियमों से न केवल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आम लोगों के लिए भी सरकारी सेवाएं अधिक सुविधाजनक बनेंगी।
'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' लागू होने के बाद दिल्ली में कारोबार शुरू करने से लेकर उसे संचालित करने तक की कई प्रक्रियाएं सरल हो सकती हैं। इससे छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप और निवेशकों को फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इन सुधारों के जरिए दिल्ली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और व्यापार अनुकूल शहर बनाया जाएगा।





