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राहुल गांधी को राहत मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द

Ratna Netam
14 Aug 2026 2:28 PM IST
राहुल गांधी को राहत मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द
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नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को लेकर की गई उनकी टिप्पणी से संबंधित आपराधिक शिकायत और निचली अदालत की ओर से जारी समन को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि उसने मामले में दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में भी मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक मंजूरी दिए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। ऐसी स्थिति में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश को कायम नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर पीठ ने आपराधिक शिकायत और समन को रद्द कर दिया।
यह मामला राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 17 नवंबर 2022 को दिए गए एक बयान से जुड़ा था। राहुल गांधी ने विनायक दामोदर सावरकर को लेकर टिप्पणी करते हुए उन्हें अंग्रेजों का सहयोगी बताया था। उन्होंने यह दावा भी किया था कि सावरकर को ब्रिटिश शासन से पेंशन मिलती थी। इस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद पैदा हुआ था और भारतीय जनता पार्टी सहित कई संगठनों ने राहुल गांधी की आलोचना की थी।
राहुल गांधी की टिप्पणी के खिलाफ वकील नृपेंद्र पांडेय ने अदालत में शिकायत दाखिल की थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि यह बयान समाज में नफरत और वैमनस्य फैलाने के इरादे से दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया था कि महात्मा गांधी ने सावरकर को देशभक्त माना था। राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 505 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। ये धाराएं विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सार्वजनिक रूप से भड़काऊ बयान देने से संबंधित हैं।
मामले की शुरुआत में जून 2023 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नृपेंद्र पांडेय की शिकायत खारिज कर दी थी। शिकायतकर्ता ने इस आदेश को सेशन कोर्ट में चुनौती दी। सेशन कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा मजिस्ट्रेट कोर्ट के पास भेज दिया था। इसके बाद दिसंबर 2024 में लखनऊ की मजिस्ट्रेट अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ मानकर राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी कर दिया था।
राहुल गांधी ने समन और आपराधिक कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। चार अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि राहुल गांधी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 के तहत सेशन जज के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए शिकायत और समन रद्द करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की पिछली सुनवाई के दौरान राहुल गांधी को अंतरिम राहत देते हुए निचली अदालत के समन पर रोक लगा दी थी। हालांकि, उस समय पीठ ने सावरकर पर की गई उनकी टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कड़ी नाराजगी भी जताई थी। अदालत ने चेतावनी दी थी कि स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में इस तरह की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। पीठ ने यह भी कहा था कि भविष्य में ऐसा कोई बयान दिए जाने पर अदालत स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने पर विचार कर सकती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा सावरकर की प्रशंसा में लिखे गए एक पत्र का भी उल्लेख किया था। अदालत ने कहा था कि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजादी दिलाने में योगदान दिया है, इसलिए उनके संबंध में बयान देते समय जिम्मेदारी और सावधानी बरती जानी चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी मंजूरी नहीं लिए जाने को प्रमुख आधार मानते हुए राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक शिकायत और समन दोनों को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत में चल रही कार्रवाई समाप्त हो गई है। हालांकि, शीर्ष अदालत की ओर से पूर्व में उनकी टिप्पणी को लेकर जताई गई नाराजगी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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