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गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी छात्र को SC से राहत 5 लाख बॉन्ड नोटिस पर रोक

Ratna Netam
28 Sept 2026 4:11 PM IST
गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी छात्र को SC से राहत 5 लाख बॉन्ड नोटिस पर रोक
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New दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के एक छात्र के खिलाफ चल रही कार्यवाही को बंद कर दिया। यह मामला ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन को लेकर था, जिसमें छात्र पर अन्य छात्रों को एकत्र करने में कथित भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था।उत्तर प्रदेश प्रशासन ने छात्र को जारी किया गया प्रिवेंटिव नोटिस वापस ले लिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस के आधार पर छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दिया आदेश
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की।पीठ ने कहा कि लॉ के छात्र अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ प्रशासन की ओर से जारी 5 लाख रुपये के बॉन्ड नोटिस के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें छात्र ने प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती दी थी।
BNSS की धाराओं के तहत जारी हुआ था नोटिस
अक्षत त्रिपाठी ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा जारी नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत जारी किया गया था। इन धाराओं के तहत प्रशासन को किसी संभावित अशांति या कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए एहतियाती कदम उठाने का अधिकार दिया गया है।छात्र की याचिका में प्रशासन की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे।
विरोध प्रदर्शन से जुड़ा था मामला
यह पूरा मामला ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा था। प्रशासन का आरोप था कि अक्षत त्रिपाठी ने प्रदर्शन के लिए छात्रों को एकत्र करने में भूमिका निभाई थी।इसके बाद प्रशासन ने एहतियाती कार्रवाई करते हुए छात्र को नोटिस जारी किया था, जिसमें 5 लाख रुपये के बॉन्ड की मांग की गई थी।हालांकि, छात्र ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि उसके खिलाफ जारी नोटिस उचित नहीं है।
प्रशासन ने वापस लिया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश प्रशासन ने बताया कि छात्र के खिलाफ जारी प्रिवेंटिव नोटिस वापस लिया जा चुका है।इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले में आगे की कार्यवाही बंद कर दी और निर्देश दिया कि पुराने नोटिस के आधार पर छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाए।
छात्रों के अधिकारों पर चर्चा
यह मामला छात्रों के अधिकारों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संतुलन को लेकर भी चर्चा में आया। अदालत ने मामले में छात्र के खिलाफ तत्काल कार्रवाई से राहत दी।प्रिवेंटिव कार्रवाई का उद्देश्य किसी संभावित घटना को रोकना होता है, लेकिन ऐसी कार्रवाई में प्रक्रिया और अधिकारों का पालन जरूरी माना जाता है।
याचिका में उठाए गए थे सवाल
अक्षत त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में प्रशासन के नोटिस को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि केवल विरोध प्रदर्शन से जुड़े होने के आधार पर इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन के फैसले और बाद में नोटिस वापस लेने की स्थिति को ध्यान में रखा।
आगे की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब छात्र के खिलाफ इस मामले में आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। प्रशासन द्वारा नोटिस वापस लिए जाने के बाद मामला समाप्त हो गया है।यह फैसला ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाता है और नागरिक या छात्र अपने अधिकारों को लेकर अदालत का रुख करते हैं।
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