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थप्पड़ विवाद में DCP को राहत, हाई कोर्ट ने नहीं दिया तबादले का आदेश

Saba Naaz
28 July 2026 8:19 PM IST
थप्पड़ विवाद में DCP को राहत, हाई कोर्ट ने नहीं दिया तबादले का आदेश
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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने डीसीपी संदीप लांबा से जुड़े थप्पड़ विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उनके तबादले की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला को थप्पड़ मारने के आरोपों के बाद याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि उनके मामले की जांच डीसीपी संदीप लांबा से हटाकर किसी अन्य अधिकारी को सौंपी जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार संविधान में दिया गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संसद जैसे संप्रभु संस्थानों को नुकसान पहुंचाया जाए। अदालत ने कहा कि किसी एक घटना के आधार पर किसी पुलिस अधिकारी की पूरी कार्यप्रणाली और छवि पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को भी निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने टिप्पणी की कि भले ही किसी वीडियो में अधिकारी को महिला के साथ कथित रूप से गलत व्यवहार करते हुए देखा गया हो, लेकिन केवल इसी आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह हर मामले में पक्षपाती होंगे। कोर्ट ने कहा कि किसी अधिकारी के खिलाफ अंतिम राय बनाने से पहले उनका पक्ष सुनना भी जरूरी है।

दरअसल, यह मामला जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। इस दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा को एक महिला को थप्पड़ मारते हुए देखा गया था। वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना को लेकर काफी विवाद हुआ था और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे।

याचिकाकर्ता महिला की ओर से पेश अधिवक्ता एम. सुफियान सिद्दीकी ने अदालत में तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल को पहले एक मामले में कथित रूप से गैरकानूनी हिरासत में रखा गया था। उस मामले की जांच भी संदीप लांबा के पास थी। महिला पक्ष का कहना था कि हाल में सामने आए थप्पड़ विवाद के वीडियो के बाद उन्हें आशंका है कि उन्हें अधिकारी से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी को सौंप दी जाए और संदीप लांबा को जांच प्रक्रिया से अलग किया जाए। उनका कहना था कि अधिकारी के व्यवहार को देखते हुए निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि केवल एक घटना के आधार पर किसी अधिकारी को जांच से हटाना उचित नहीं होगा। पुलिस अधिकारी को भी कानून के तहत निष्पक्ष प्रक्रिया और अपनी बात रखने का अधिकार है।

सुनवाई के दौरान डीसीपी संदीप लांबा की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि याचिका का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता का बयान दर्ज किया जा चुका है और जांच पूरी कर ली गई है। मामले को अंतिम निर्णय के लिए सक्षम अधिकारी के पास भेज दिया गया है।

याचिकाकर्ता जारनिगर फातिमा ने आरोप लगाया था कि उन्हें 24 और 25 मार्च 2025 की रात जाफराबाद पुलिस स्टेशन में कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था। उन्होंने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग की थी, जिसकी जिम्मेदारी संदीप लांबा को दी गई थी।

हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को भी सख्त हिदायत दी। अदालत ने कहा कि किसी संस्था की छवि को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच कानून के अनुसार होगी और केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।

इस फैसले के बाद डीसीपी संदीप लांबा को बड़ी राहत मिली है। वहीं, कोर्ट की टिप्पणी से यह भी साफ हुआ है कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी पक्ष को बिना पूरी जांच के दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर आगे की कार्रवाई संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

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