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कैम्पा एनर्जी ड्रिंक पर रिलायंस को हाई कोर्ट से बड़ी राहत
Ratna Netam
6 Oct 2026 4:47 PM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (RCPL) को बड़ी राहत देते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कंपनी को अपने प्रोडक्ट ‘कैम्पा एनर्जी ड्रिंक – गोल्ड बूस्ट’ से “एनर्जी ड्रिंक” शब्द हटाने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए FSSAI के 30 जून, 2026 के आदेश के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी।मामले की सुनवाई जस्टिस अमित महाजन की अदालत में हुई। हाई कोर्ट ने FSSAI की ओर से 17 जुलाई, 2026 को जारी उस सूचना पर भी रोक लगा दी, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों से कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने और 30 जून के निर्देश को लागू कराने के लिए कदम उठाने को कहा गया था।
रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर FSSAI के मूल आदेश और उसके बाद जारी सूचना, दोनों को चुनौती दी थी। कंपनी की याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों निर्देशों के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया। इससे फिलहाल कंपनी को अपने उत्पाद ‘कैम्पा एनर्जी ड्रिंक – गोल्ड बूस्ट’ के नाम से “एनर्जी ड्रिंक” शब्द हटाने की बाध्यता से राहत मिल गई है।मामला उस समय शुरू हुआ जब FSSAI ने 30 जून, 2026 को एक आदेश जारी किया। इस आदेश में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड को निर्देश दिया गया था कि वह अपने उत्पाद ‘कैम्पा एनर्जी ड्रिंक – गोल्ड बूस्ट’ की लेबलिंग और प्रचार सामग्री में इस्तेमाल किए जा रहे “एनर्जी ड्रिंक” शब्द को हटाए।
इसके बाद 17 जुलाई, 2026 को FSSAI ने एक और सूचना जारी की। इस सूचना में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को 30 जून के निर्देश को लागू कराने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया था। इसका मतलब यह था कि संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई कर सकते थे और उत्पाद की बिक्री तथा लेबलिंग को लेकर निर्देश लागू करा सकते थे।कंपनी ने इन दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। RCPL की ओर से अदालत के समक्ष कहा गया कि FSSAI का निर्देश कंपनी के उत्पाद और उसकी ब्रांडिंग पर सीधा प्रभाव डालता है। अदालत ने शुरुआती सुनवाई के बाद मामले में अंतरिम राहत देते हुए FSSAI के निर्देश और उसके बाद जारी सूचना पर रोक लगा दी।
हाई कोर्ट का यह आदेश कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि “एनर्जी ड्रिंक” शब्द उत्पाद की पहचान और मार्केटिंग का अहम हिस्सा है। यदि FSSAI का आदेश तत्काल लागू होता, तो कंपनी को पैकेजिंग, प्रचार सामग्री और संभावित रूप से बाजार में मौजूद स्टॉक से जुड़े बदलाव करने पड़ सकते थे।फूड और बेवरेज सेक्टर में उत्पादों की लेबलिंग, नामकरण और दावों को लेकर FSSAI के नियमों का पालन करना जरूरी होता है। प्राधिकरण समय-समय पर कंपनियों को निर्देश जारी करता है ताकि खाद्य उत्पादों के संबंध में उपभोक्ताओं को स्पष्ट और सही जानकारी उपलब्ध हो सके। हालांकि कंपनियों को ऐसे आदेशों को अदालत में चुनौती देने का अधिकार भी होता है, यदि उन्हें लगता है कि कोई निर्देश नियमों या उनके कानूनी अधिकारों के अनुरूप नहीं है।
इस मामले में फिलहाल हाई कोर्ट ने अंतिम फैसला नहीं दिया है। अदालत की ओर से दिया गया आदेश अंतरिम राहत के रूप में देखा जा रहा है। यानी मामले की आगे सुनवाई जारी रहेगी और दोनों पक्ष अपने तर्क अदालत के सामने रख सकेंगे। अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि RCPL अपने उत्पाद के साथ “एनर्जी ड्रिंक” शब्द का इस्तेमाल जारी रख सकेगी या नहीं।‘कैम्पा’ ब्रांड के तहत रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स कई पेय उत्पाद बाजार में पेश कर रही है। ऐसे में इस मामले का असर केवल एक उत्पाद की पैकेजिंग तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह फूड और बेवरेज इंडस्ट्री में उत्पादों की कैटेगरी और मार्केटिंग से जुड़े नियमों को लेकर भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
FSSAI देश में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े मानकों को लागू करने वाली प्रमुख नियामक संस्था है। खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग, लेबलिंग, सामग्री और विज्ञापन से लेकर विभिन्न श्रेणियों के उत्पादों के लिए अलग-अलग नियम बनाए जाते हैं। यदि कोई कंपनी इन नियमों से असहमत होती है तो वह कानूनी उपाय अपना सकती है।दिल्ली हाई कोर्ट के मौजूदा आदेश के बाद 30 जून का निर्देश और 17 जुलाई की सूचना फिलहाल RCPL के खिलाफ लागू नहीं की जा सकेगी। इससे कंपनी को मामले की अगली सुनवाई तक राहत मिली है।
अब इस मामले में आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी। अदालत के अंतिम निर्णय से यह तय हो सकता है कि ‘कैम्पा एनर्जी ड्रिंक – गोल्ड बूस्ट’ के नाम और लेबलिंग में “एनर्जी ड्रिंक” शब्द का इस्तेमाल जारी रहेगा या कंपनी को इसमें बदलाव करना होगा।फिलहाल हाई कोर्ट की रोक के बाद रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स को तत्काल कार्रवाई से राहत मिल गई है। यह मामला खाद्य उत्पादों के नामकरण, ब्रांडिंग और नियामकीय निर्देशों के बीच संतुलन से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी विवाद बन गया है।
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