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सखी सेंटर पहुंचीं CM रेखा गुप्ता हर महीने मांगी मामलों की रिपोर्ट

Ratna Netam
5 Oct 2026 7:58 PM IST
सखी सेंटर पहुंचीं CM रेखा गुप्ता हर महीने मांगी मामलों की रिपोर्ट
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को लोक नायक अस्पताल स्थित ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने हिंसा से प्रभावित महिलाओं और लड़कियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, शिकायतों के निस्तारण और मामलों की निगरानी की व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दिल्ली के सभी सखी वन स्टॉप सेंटरों की विस्तृत रिपोर्ट हर महीने मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने सेंटर में आने वाली महिलाओं को मिलने वाली काउंसलिंग, पुलिस सहायता, कानूनी सहयोग, चिकित्सा सुविधा और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से शिकायत दर्ज होने के बाद उस पर होने वाली कार्रवाई और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी मांगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल शिकायत दर्ज कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक मामले में आगे हुई कार्रवाई और उसके परिणाम की निगरानी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने सभी सखी वन स्टॉप सेंटरों से मासिक फॉलोअप रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय भेजने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में मामले की मौजूदा स्थिति, पुलिस को दी गई सूचना, FIR की स्थिति, कानूनी प्रक्रिया और पीड़िता को दी गई सहायता का विवरण शामिल करने को कहा गया है।
इसके अलावा आरोपी के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी रिपोर्ट में दर्ज करनी होगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अगर किसी पुलिस स्टेशन से किसी मामले की जानकारी हासिल करने में देरी या परेशानी आती है तो उसका भी रिकॉर्ड रखा जाए। ऐसे मामलों को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने उठाकर जल्द समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
रेखा गुप्ता ने महिलाओं और बच्चियों से जुड़े मामलों में संवेदनशील रवैया अपनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सहायता मांगने सेंटर पहुंचने वाली महिला को सुरक्षित और सहज वातावरण मिलना चाहिए। उसकी बात धैर्य से सुनी जानी चाहिए और उसकी जरूरत तथा परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
सखी वन स्टॉप सेंटर हिंसा से प्रभावित महिलाओं और लड़कियों को एक ही स्थान पर कई तरह की सहायता उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए हैं। यहां आपातकालीन चिकित्सा जांच, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक काउंसलिंग, मुफ्त कानूनी परामर्श, पुलिस सहायता तथा FIR दर्ज कराने में मदद जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। आवश्यकता होने पर महिलाओं को अल्पकालिक सुरक्षित आश्रय, भोजन, कपड़े और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। महिला हेल्पलाइन 181 के जरिए भी जरूरतमंद महिलाओं को इन सेवाओं से जोड़ा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने सेंटर में उपलब्ध अस्थायी आश्रय और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन महिलाओं को लंबे समय तक सुरक्षित आश्रय की जरूरत है, उनके लिए संबंधित शेल्टर होम के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि संकट की स्थिति में सेंटर पहुंचने वाली महिला को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें।
बच्चियों से संबंधित POCSO मामलों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों के रिकॉर्ड की गोपनीयता सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ पुलिस कार्रवाई, FIR, आरोपी के खिलाफ हुई कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया का नियमित एवं समयबद्ध फॉलोअप किया जाए।
दिल्ली में सखी वन स्टॉप सेंटरों का नेटवर्क पहले से संचालित है। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राजधानी में 11 सखी वन स्टॉप सेंटर सूचीबद्ध थे। लोक नायक अस्पताल में भी पुरानी दिल्ली क्षेत्र के लिए सेंटर संचालित है। इसी सरकारी दस्तावेज के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में इन केंद्रों के जरिए 11,785 महिलाओं को सहायता दी गई थी, जबकि 2025-26 में जनवरी 2026 तक 9,832 महिलाओं को सहायता मिल चुकी थी।
मुख्यमंत्री के नए निर्देश के बाद अब सेंटरों की भूमिका केवल शिकायत लेने या तत्काल सहायता देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रत्येक मामले में आगे हुई कार्रवाई का नियमित रिकॉर्ड भी मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचेगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि शिकायत के बाद पुलिस और कानूनी स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और पीड़िता को वास्तव में कितनी सहायता मिली।
निरीक्षण के दौरान रेखा गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि संकट में सेंटर पहुंचने वाली महिलाओं और बच्चियों को सम्मान, सुरक्षा और प्रभावी कानूनी सहयोग मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को मामलों के समाधान में अनावश्यक देरी से बचने और जरूरत के अनुसार तत्काल सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री कार्यालय को हर महीने भेजी जाने वाली रिपोर्ट के जरिए अब इन सेंटरों के कामकाज की नियमित निगरानी की जाएगी। इसमें मामलों की संख्या के साथ-साथ उनकी प्रगति, पुलिस और कानूनी कार्रवाई तथा पीड़ित महिलाओं को मिली वास्तविक सहायता पर विशेष ध्यान रहेगा।
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