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कफ सिरप की बोतलों पर जल्द दिखेगी लाल चेतावनी, 4 साल से कम बच्चों के लिए नहीं होगी दवा

नई दिल्ली। बच्चों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार कफ सिरप को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी में है। इसके तहत जल्द ही कफ सिरप की बोतलों पर स्पष्ट चेतावनी दिखाई देगी कि यह दवा 4 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जानी चाहिए।
केंद्रीय दवा नियामक की ओर से कफ सिरप की लेबलिंग से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य माता-पिता और अभिभावकों को दवा के सही इस्तेमाल को लेकर जागरूक करना है, ताकि छोटे बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के कफ सिरप देने से बचा जा सके।
बोतल के लेबल पर लाल रंग में होगी चेतावनी
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, कफ सिरप की हर बोतल पर एक प्रमुख स्थान पर लाल रंग में चेतावनी लिखी जाएगी। इसमें साफ शब्दों में बताया जाएगा कि इस दवा का इस्तेमाल 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
नए नियमों के तहत यह चेतावनी सिरप के लेबल के करीब 65 प्रतिशत हिस्से में लाल रंग से लिखने का प्रस्ताव है, ताकि यह आसानी से दिखाई दे और उपभोक्ता इसे नजरअंदाज न कर सकें।
बच्चों की तस्वीर लगाने का प्रस्ताव
दवा नियामक ने लेबलिंग को और आसान बनाने के लिए एक अन्य बदलाव का भी प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कफ सिरप की बोतल के लेबल पर स्कूल जाने की उम्र के बच्चों की तस्वीर लगाने का सुझाव दिया गया है।
इसका उद्देश्य यह है कि कम पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से समझ सकें कि यह दवा किस उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है। तस्वीर और चेतावनी दोनों माध्यमों से दवा के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
छोटे बच्चों में दवा के इस्तेमाल को लेकर चिंता
कफ सिरप का इस्तेमाल आमतौर पर खांसी और सर्दी जैसी समस्याओं में किया जाता है। हालांकि, छोटे बच्चों में किसी भी दवा का इस्तेमाल सावधानी से करना जरूरी होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप देना जोखिम भरा हो सकता है। बच्चों का शरीर बड़ों से अलग तरीके से दवाओं पर प्रतिक्रिया करता है, इसलिए उम्र और वजन के अनुसार दवा की मात्रा तय करना जरूरी होता है।
अभिभावकों को जागरूक करने की पहल
सरकार का मानना है कि केवल नियम बनाने से ज्यादा जरूरी है कि लोगों तक सही जानकारी पहुंचे। कई बार माता-पिता सामान्य खांसी या सर्दी में बच्चों को खुद से दवा दे देते हैं।
नई लेबलिंग व्यवस्था का उद्देश्य अभिभावकों को सावधान करना है, ताकि वे दवा देने से पहले उसकी जानकारी पढ़ें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लें।
दवा कंपनियों को करना होगा बदलाव
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो कफ सिरप बनाने वाली दवा कंपनियों को अपनी पैकेजिंग और लेबल में बदलाव करना होगा।
कंपनियों को नई चेतावनी, रंग और चित्र संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना पड़ेगा। इससे बाजार में आने वाली सभी कफ सिरप की बोतलों पर एक समान जानकारी उपलब्ध होगी।
सुरक्षित दवा उपयोग पर जोर
दवा नियामक लगातार दवाओं के सुरक्षित उपयोग को लेकर नियमों में बदलाव करता रहा है। खासकर बच्चों से जुड़ी दवाओं में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवाओं का इस्तेमाल सही उम्र, सही मात्रा और सही सलाह के अनुसार किया जाए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया जरूरी कदम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं पर स्पष्ट चेतावनी लिखना उपभोक्ताओं को सही निर्णय लेने में मदद करता है। खासकर बच्चों की दवाओं के मामले में पैकेजिंग पर स्पष्ट जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को भी किसी भी दवा को देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और दवा के लेबल पर दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
जल्द लागू हो सकते हैं नए नियम
केंद्रीय दवा नियामक के प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए नियम लागू किए जा सकते हैं। इसके बाद कफ सिरप की बोतलों पर नई चेतावनी और लेबलिंग व्यवस्था दिखाई दे सकती है।
यह कदम बच्चों को दवाओं के गलत इस्तेमाल से बचाने और अभिभावकों को जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





