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अखिलेश यादव पर रामदास अठावले का तंज, बोले- 2027 से पहले टूट सकता है सपा-कांग्रेस गठबंधन

Kavita2
30 Sept 2026 4:49 PM IST
अखिलेश यादव पर रामदास अठावले का तंज, बोले- 2027 से पहले टूट सकता है सपा-कांग्रेस गठबंधन
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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और विपक्षी इंडिया गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली में 30 सितंबर को हुई इंडिया ब्लॉक की अहम बैठक में अखिलेश यादव के शामिल नहीं होने को लेकर अठावले ने विपक्षी एकता पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन टूट सकता है। यह अठावले का राजनीतिक दावा है, कोई स्थापित चुनावी निष्कर्ष नहीं।

अठावले ने कहा कि अखिलेश यादव खुद इंडिया गठबंधन की बैठक में नहीं पहुंचे और उन्होंने पार्टी के कुछ प्रतिनिधियों को भेजा। इसे लेकर उन्होंने सपा प्रमुख पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव अभी भी राजनीतिक सपने देख रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने सपा और कांग्रेस के बीच भविष्य में मतभेद बढ़ने की आशंका जताई और कहा कि दोनों दलों का गठबंधन चुनाव से पहले टूट सकता है।


दिल्ली में आयोजित इंडिया गठबंधन की बैठक कई अहम राजनीतिक मुद्दों को लेकर बुलाई गई थी। इसमें चुनाव आयोग के कामकाज, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों ने चर्चा की। बैठक का उद्देश्य इन विषयों पर विपक्ष की साझा रणनीति तैयार करना था।

हालांकि अखिलेश यादव इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए। इससे पहले उन्होंने कहा था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता बैठक में हिस्सा लेंगे। समाजवादी पार्टी की ओर से बताया गया कि अखिलेश यादव के पहले से तय कार्यक्रम और राज्यसभा चुनाव से जुड़ी व्यस्तताओं के कारण वह दिल्ली नहीं जा रहे हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अखिलेश यादव से बातचीत हुई है।

इसके बावजूद भाजपा और एनडीए से जुड़े नेताओं ने अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी को विपक्षी गठबंधन के भीतर मतभेद से जोड़कर देखा। अठावले का बयान भी इसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है।

केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भी अपनी पार्टी और एनडीए के पक्ष में दावा किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल चाहे गठबंधन में चुनाव लड़ें या अलग-अलग, एनडीए का मुकाबला करने में सफल नहीं होंगे। हालांकि आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजे मतदाताओं के फैसले से तय होंगे और अभी किसी परिणाम का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा चल रही है। सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर दोनों दलों के नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। इसके बावजूद अखिलेश यादव ने हाल में संकेत दिया है कि पहले से चला आ रहा गठबंधन आगे भी जारी रहेगा।

दूसरी ओर कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने में जुटी है। पार्टी के नेता राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर तैयारी करने की बात कह रहे हैं। साथ ही कांग्रेस की ओर से यह संकेत भी दिया गया है कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत जारी रहेगी।

ऐसे में अठावले का यह दावा कि चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन टूट जाएगा, सीधे तौर पर विपक्षी दलों के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान पर निशाना माना जा रहा है।

इंडिया गठबंधन की बैठक से केवल अखिलेश यादव ही दूर नहीं रहे। कुछ अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा में रही। हालांकि कई दलों ने अपने प्रतिनिधियों को बैठक में भेजा और कुछ नेताओं ने वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया।

विपक्ष की ओर से बैठक में चुनाव आयोग से जुड़े सवालों को प्रमुखता दी गई। विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए खारिज करता रहा है।

अखिलेश यादव भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पहले सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी चुनाव आयोग से संबंधित शिकायतों को लगातार उठाती रही है। उन्होंने दिल्ली की बैठक में खुद शामिल नहीं होने की बात कही थी, लेकिन यह भी स्पष्ट किया था कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता वहां मौजूद रहेंगे।

राजनीतिक रूप से उत्तर प्रदेश का 2027 विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी है, जबकि कांग्रेस भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है। दोनों दलों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था।

अब विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे और नेतृत्व की रणनीति दोनों पार्टियों के रिश्तों की दिशा तय करेगी। यही वजह है कि दोनों दलों के नेताओं की छोटी-बड़ी टिप्पणियां भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन रही हैं।

अठावले ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि इंडिया ब्लॉक के भीतर एकजुटता नहीं है। उनका दावा है कि अलग-अलग राज्यों में क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के हित टकरा रहे हैं, जिससे गठबंधन को आगे चलकर परेशानी हो सकती है।

हालांकि इंडिया गठबंधन से जुड़े दलों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण नेताओं के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है और इससे गठबंधन के व्यापक उद्देश्य पर असर जरूरी नहीं पड़ता।

दिल्ली की बैठक में अखिलेश यादव की अनुपस्थिति के बाद यह राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। भाजपा और सहयोगी दल इसे विपक्ष की कमजोर एकजुटता के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इसे कार्यक्रम और व्यस्तताओं से जुड़ा मामला बता रहे हैं।

फिलहाल अठावले के बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर बहस को नया मुद्दा दे दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि 2027 विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दल सीटों और रणनीति पर किस तरह सहमति बनाते हैं तथा अठावले के दावे पर समाजवादी पार्टी या कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

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