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सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों को राजनाथ सिंह का संदेश, हर चुनौती के लिए रहें तैयार

Ratna Netam
7 Nov 2026 7:08 PM IST
सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों को राजनाथ सिंह का संदेश, हर चुनौती के लिए रहें तैयार
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नई दिल्ली/बागडोगरा। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार, 7 नवंबर को दिवाली की पूर्व संध्या पर पश्चिम बंगाल के बागडोगरा एयरफोर्स स्टेशन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय वायुसेना के जवानों से मुलाकात की और उनके साथ दिवाली की खुशियां साझा कीं। रक्षा मंत्री ने सैनिकों के समर्पण, साहस और देश की सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि देश में हर त्योहार इसलिए खुशियों के साथ मनाया जाता है, क्योंकि हमारे सशस्त्र बल चौबीसों घंटे देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।राजनाथ सिंह ने वायुसेना के अधिकारियों और जवानों से बातचीत करते हुए उनकी कार्यक्षमता, सतर्कता और परिचालन तैयारियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं और आसमान की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारतीय वायुसेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। त्योहारों के दौरान भी सैनिक अपने परिवारों से दूर रहकर देशवासियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। राष्ट्र उनके इस समर्पण और त्याग का सम्मान करता है।रक्षा मंत्री ने अपने दौरे की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा की। उन्होंने कहा कि बागडोगरा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचकर बहादुर वायु योद्धाओं से मिलना और बातचीत करना उनके लिए खुशी का अवसर रहा। उन्होंने वायुसेना को देश के आसमान की सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ बताया।
आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को लेकर किया आगाह
बागडोगरा एयरफोर्स स्टेशन पर जवानों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गई हैं। अब युद्ध केवल सीमाओं पर पारंपरिक गोलीबारी तक सीमित नहीं रह गया है। इसके दायरे में असममित युद्ध, छद्म युद्ध, साइबर हमले, ड्रोन स्वार्म और सूचना से जुड़े अभियान भी शामिल हो गए हैं।उन्होंने रक्षा बलों से अपील की कि वे बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी परिचालन तैयारियों को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखें। इसके लिए डोमेन अवेयरनेस, साइबर रेजिलिएंस और सूचनाओं की विश्वसनीयता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक समय में दुश्मन हमेशा सीधे टकराव का रास्ता नहीं अपनाता, बल्कि वह देश की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश करता है। ऐसे में सैन्य बलों को पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ डिजिटल और सूचना संबंधी खतरों से निपटने के लिए भी तैयार रहना होगा।
सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की सलाह
राजनाथ सिंह ने सूचना के क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक और गलत जानकारियां फैलाकर समाज में अविश्वास पैदा करने की कोशिश की जा सकती है। ऐसी सूचनाओं का इस्तेमाल स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच संदेह पैदा करने के लिए किया जा सकता है।उन्होंने जवानों से कहा कि वे सूचनाओं की सत्यता को समझें और किसी भी गलत जानकारी को फैलने से रोकने के लिए सतर्क रहें। उन्होंने स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर संवाद और संपर्क बनाए रखने पर भी जोर दिया।रक्षा मंत्री के मुताबिक, आसपास के लोगों के साथ मजबूत संबंध और आपसी विश्वास बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय के साथ जितना अधिक जुड़ाव होगा, विरोधियों की साजिशों को सफल बनाना उतना ही मुश्किल होगा।
ड्रोन और साइबर सुरक्षा में आत्मनिर्भरता पर जोर
रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप और घरेलू उद्योग आधुनिक सैन्य तकनीक विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और उन्नत सैन्य उपकरणों के विकास में देश की कंपनियों की भागीदारी बढ़ रही है।उन्होंने भारतीय वायुसेना के जवानों की सराहना करते हुए कहा कि वे स्वदेशी तकनीकों को अपनाने और नई क्षमताएं सीखने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। ड्रोन संचालन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करना भविष्य की सैन्य चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक है।राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को तकनीक आधारित आधुनिक सैन्य शक्ति के रूप में विकसित करना समय की जरूरत है। इसके लिए नए उपकरणों के इस्तेमाल के साथ-साथ सैन्य कर्मियों को लगातार प्रशिक्षण देना भी जरूरी है।
अग्निवीरों के लिए 'सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी' को बताया दिवाली का उपहार
इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने अग्निवीरों के लिए स्वीकृत 'सेकंड टूर ऑफ ड्यूटी' व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे अग्निवीरों के लिए दिवाली का एक महत्वपूर्ण उपहार बताया।रक्षा मंत्री ने कहा कि दो साल की निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने के बाद सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में भर्ती होने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इसके लिए उनकी इच्छा और निर्धारित चयन मानदंडों को पूरा करना आवश्यक होगा।उन्होंने कहा कि यह फैसला रक्षा बलों के जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अग्निवीरों को आगे भी सेना में सेवा करने का अवसर देने से उन्हें अपने सैन्य अनुभव और कौशल का उपयोग जारी रखने का मौका मिलेगा।
सैनिकों के परिवारों के त्याग को भी किया याद
दिवाली के अवसर पर राजनाथ सिंह ने जवानों के परिवारों के योगदान को भी विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान सैनिक अपने परिवारों के साथ नहीं रह पाते, लेकिन वे देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी ड्यूटी पर डटे रहते हैं।उन्होंने जवानों के परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सैनिकों के इस समर्पण के पीछे उनके परिवारों का भी बड़ा योगदान होता है। देश उनके त्याग और सहयोग को कभी नहीं भूलेगा।रक्षा मंत्री ने वायुसेना के जवानों और उनके परिवारों को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश हमेशा अपने सैनिकों और उनके परिवारों के साथ खड़ा रहेगा।
वरिष्ठ वायुसेना अधिकारी भी रहे मौजूद
बागडोगरा एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित, एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर कमोडोर मनीष शर्मा और भारतीय वायुसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।इस दौरे के माध्यम से रक्षा मंत्री ने जवानों के साथ सीधे संवाद किया और उनकी जिम्मेदारियों तथा सुरक्षा संबंधी तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने वायु योद्धाओं के उच्च मनोबल और कर्तव्य के प्रति समर्पण की सराहना की।
8 नवंबर को सिक्किम में शहीदों को देंगे श्रद्धांजलि
बागडोगरा दौरे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कार्यक्रम सिक्किम से भी जुड़ा है। उन्होंने जानकारी दी कि रविवार, 8 नवंबर को दिवाली के अवसर पर वह सिक्किम स्थित शेराथांग युद्ध स्मारक जाएंगे। यहां वह देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वह सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात सैन्य कर्मियों से मुलाकात और बातचीत भी करेंगे।इस तरह दिवाली के अवसर पर रक्षा मंत्री का यह दौरा देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के साथ त्योहार मनाने और उनके योगदान को सम्मान देने की पहल का हिस्सा है।
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