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नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी पर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राहुल गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरएसएस को पुरुष प्रधान और संविधान विरोधी संगठन बताते हुए महिलाओं के प्रति उसकी विचारधारा पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि संघ से जुड़ी कई महिलाएं भी उनकी राजनीतिक लड़ाई का समर्थन करती हैं। इसके जवाब में भाजपा और विहिप ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें संगठन के बारे में सही जानकारी रखने की सलाह दी।
राहुल गांधी ने RSS की विचारधारा पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से आरएसएस पर तीखा हमला बोला था।उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस केवल पुरुषों का संगठन है और उसकी विचारधारा संविधान में निहित समानता के मूल्यों के खिलाफ है।राहुल गांधी ने दावा किया कि संघ महिलाओं को पुरुषों के अधीन मानता है। उन्होंने अपनी राजनीतिक सोच को शिव-शक्ति की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि वह आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।उन्होंने यह भी दावा किया कि संघ से जुड़ी कई महिलाएं उनकी विचारधारा और राजनीतिक संघर्ष का समर्थन करती हैं।हालांकि, राहुल गांधी के ये दावे उनके राजनीतिक आरोप हैं। महिलाओं के दृष्टिकोण या पूरे संगठन की मान्यताओं के संबंध में इनसे कोई स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता
भाजपा ने राहुल गांधी के बयान पर किया पलटवार
राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा।महाराष्ट्र के भाजपा विधायक राम कदम ने राहुल गांधी के बयान को संगठन के बारे में अधूरी जानकारी पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि आरएसएस से जुड़े महिला संगठन भी सक्रिय हैं।तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने भी कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि पार्टी ने अपने संगठन में महिलाओं को कितने महत्वपूर्ण पद दिए हैं।भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक भागीदारी से जुड़े सवालों का जवाब देने को कहा।उनका कहना है कि महिला सशक्तीकरण जैसे गंभीर विषयों पर राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय ठोस तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
VHP ने राहुल गांधी पर लगाया बौद्धिक दिवालियापन का आरोप
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी राहुल गांधी की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।उन्होंने राहुल गांधी पर बौद्धिक दिवालियापन का आरोप लगाते हुए कहा कि संघ के कार्यक्रमों में महिलाओं और परिवारों की भागीदारी को नजरअंदाज किया जा रहा हैबंसल ने कहा कि देशभर में आयोजित विजयादशमी समारोहों में बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार शामिल हुए थे।उन्होंने दावा किया कि वह स्वयं तीन कार्यक्रमों में उपस्थित रहे, जहां महिलाओं और परिवारों की भागीदारी दिखाई दी।विहिप प्रवक्ता के अनुसार, राहुल गांधी का यह दावा कि आरएसएस के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी नहीं होती, वास्तविक स्थिति को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं करता।
RSS के वरिष्ठ नेता रामलाल ने भी दी प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी रामलाल ने भी बुधवार को राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया।उन्होंने कहा कि संघ के संबंध में लगातार गलत जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।रामलाल ने दावा किया कि संगठन महिलाओं का सम्मान करता है और समाज में उनकी भागीदारी को महत्वपूर्ण मानता है।उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणी को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि किसी भी संगठन के बारे में सार्वजनिक बयान देने से पहले उसके कार्यों और सामाजिक गतिविधियों को समझना चाहिए।इस प्रतिक्रिया के बाद महिलाओं की भागीदारी और आरएसएस की संगठनात्मक संरचना को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
नागपुर में RSS के कार्यक्रम के बीच बढ़ा विवाद
राहुल गांधी का बयान ऐसे समय सामने आया, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नागपुर के रेशिमबाग मैदान में अपना विजयादशमी कार्यक्रम आयोजित किया था।आरएसएस के 101वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और देश के सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार रखे।भागवत ने अपने संबोधन में सत्ता परिवर्तन के लिए होने वाले आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल सरकार बदलने से बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होता।उन्होंने सामाजिक विभाजन से बचने और रचनात्मक प्रयासों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
महिलाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज
आरएसएस और कांग्रेस के बीच महिलाओं की भागीदारी का विषय पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है।आरएसएस की मुख्य स्वयंसेवक संरचना और राष्ट्र सेविका समिति जैसे महिला संगठनों की अलग-अलग संगठनात्मक व्यवस्था इस चर्चा का महत्वपूर्ण पहलू है।कांग्रेस इस व्यवस्था को लैंगिक समानता के दृष्टिकोण से सवालों के घेरे में रखती रही है, जबकि संघ समर्थक संगठनों का कहना है कि महिलाओं की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी होती है।दोनों पक्षों के तर्कों के बीच महिलाओं के प्रतिनिधित्व और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी वास्तविक भूमिका पर चर्चा महत्वपूर्ण बनी हुई है।
भाजपा-कांग्रेस के बीच जारी रह सकती है बयानबाजी
राहुल गांधी के बयान और भाजपा-विहिप की प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में वैचारिक मतभेदों को सामने ला दिया हैजहां कांग्रेस नेता आरएसएस की विचारधारा और महिलाओं की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा और विहिप इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं।इस विवाद के केंद्र में महिलाओं की समानता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक संरचना जैसे मुद्दे हैं।फिलहाल राहुल गांधी की टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी हैं और इस मामले में विभिन्न पक्ष अपने-अपने तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।
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