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टाटा संस की बैठक को लेकर राहुल गांधी ने घेरा केंद्र, निर्मला सीतारमण से पूछे कई सवाल

Ratna Netam
28 Oct 2026 9:43 PM IST
टाटा संस की बैठक को लेकर राहुल गांधी ने घेरा केंद्र, निर्मला सीतारमण से पूछे कई सवाल
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नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। देश के प्रमुख औद्योगिक समूह टाटा संस के भीतर चल रहे नेतृत्व विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच बुधवार को सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। राहुल गांधी ने टाटा समूह में चल रहे विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए और पूछा कि आखिर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के प्रतिनिधियों की बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर क्यों हुई। उन्होंने वित्त मंत्री से यह स्पष्ट करने की मांग की कि ऐसा कौन-सा कानूनी या व्यावसायिक मामला था, जिसके लिए गृह मंत्री के आवास पर बैठक की आवश्यकता पड़ी।राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया निर्मला सीतारमण के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता को हर मामले का राजनीतिकरण नहीं करने की सलाह दी थी। वित्त मंत्री ने राहुल गांधी के आरोपों को अनुचित बताते हुए कहा था कि व्यावसायिक और कानूनी विवादों को बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक मामला बताना स्वीकार्य नहीं है।
अमित शाह के आवास पर बैठक को लेकर राहुल गांधी ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर निर्मला सीतारमण के बयान का जवाब देते हुए कई सवाल उठाए।उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसा कौन-सा कानूनी और व्यावसायिक मुद्दा था, जिसके कारण टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के प्रतिनिधियों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर बुलाया गया।राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में सरकार के करीबी कारोबारियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि इस विवाद में उनका कथित 'नंबर वन करीबी' कब सामने आएगा और टाटा समूह के किन हिस्सों पर उसका नियंत्रण होगा।हालांकि, राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में किसी कारोबारी का नाम नहीं लिया। उनके ये बयान राजनीतिक आरोप और सवाल हैं। उपलब्ध जानकारी में किसी कारोबारी को टाटा समूह का हिस्सा सौंपे जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
'टाटा समूह को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा'
इससे पहले राहुल गांधी ने टाटा समूह में चल रहे विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा थाउन्होंने आरोप लगाया था कि टाटा समूह को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और देश के बड़े कारोबारी इस मामले में खुलकर बोलने से डर रहे हैं।राहुल गांधी ने भारतीय उद्योग जगत के प्रमुख लोगों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि वे कब तक खामोश रहेंगे।उन्होंने कहा था कि भारत का उद्योग जगत प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की निजी संपत्ति नहीं है।कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि वह इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।हालांकि, राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आपराधिक गतिविधियों के आरोपों की किसी अदालत या जांच एजेंसी ने उपलब्ध रिपोर्टों में पुष्टि नहीं की है।
निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी को दी नसीहत
राहुल गांधी के बयान के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स पर प्रतिक्रिया व्यक्त की।उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को हर विषय का राजनीतिकरण करने से बचना चाहिए।वित्त मंत्री ने कहा कि व्यावसायिक और कानूनी मामलों को बिना ठोस आधार के आपराधिक बताना उचित नहीं है।उन्होंने राहुल गांधी पर भारतीय उद्योगों और उद्यमियों की उपलब्धियों को लगातार कमतर बताने का आरोप भी लगाया।सीतारमण ने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी उद्योग जगत के लोगों को सरकार के खिलाफ अविश्वास और नकारात्मकता फैलाने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।वित्त मंत्री ने कहा कि देश के आर्थिक विकास में उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका है और सरकार उद्यमिता, निवेश तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस के पुराने आर्थिक मॉडल पर भी साधा निशाना
निर्मला सीतारमण ने अपने जवाब में कांग्रेस के शासनकाल की आर्थिक नीतियों की भी आलोचना की।उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में लाइसेंस-कोटा राज के कारण उद्यमियों की स्वतंत्रता सीमित हुई और आर्थिक विकास प्रभावित हुआ।सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार उद्योगों को रोजगार पैदा करने और आर्थिक विकास में योगदान देने वाली महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखती है।उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार की नीतियां उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, निवेश आकर्षित करने और कारोबार के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने पर केंद्रित हैं।वित्त मंत्री ने राहुल गांधी से बिना आधार के आरोप लगाने के बजाय रचनात्मक राजनीतिक भूमिका निभाने की अपील की।उन्होंने न्यायपालिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को न्याय का अधिकार देता है और अदालतें कानून के अनुसार न्याय सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं।
सीतारमण के आरोपों पर राहुल गांधी का पलटवार
निर्मला सीतारमण के जवाब के बाद राहुल गांधी ने फिर से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कुछ करीबी कारोबारियों को छोड़कर देश का अधिकांश उद्योग जगत पहले से ही सरकार से नाराज है।राहुल गांधी ने कहा कि कारोबारियों को सरकार के खिलाफ भड़काने की आवश्यकता नहीं है।उन्होंने एक बार फिर अमित शाह के आवास पर कथित बैठक का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि वित्त मंत्री इस बैठक की आवश्यकता और उद्देश्य को स्पष्ट क्यों नहीं कर रही हैं।कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया से यह साफ हो गया कि वह टाटा समूह के आंतरिक विवाद में सरकार की संभावित भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।हालांकि, राहुल गांधी के इस दावे का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है कि देश के अधिकांश कारोबारी सरकार से नाराज हैं।
आखिर क्या है टाटा संस के भीतर चल रहा विवाद?
टाटा समूह में विवाद की मुख्य वजह टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर पैदा हुई असहमति है।रिपोर्टों के अनुसार, टाटा संस के निदेशक मंडल ने 17 सितंबर 2026 को एन. चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने से संबंधित प्रस्ताव पारित किया था।हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस फैसले की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।नोएल टाटा का कहना है कि पुनर्नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव कंपनी के नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं था।बताया गया है कि उन्होंने 26 अक्टूबर को टाटा संस के कंपनी सचिव को पत्र लिखकर इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाए।उन्होंने बोर्ड बैठक की कार्यवाही, रिकॉर्डिंग और मतदान से संबंधित विवरण भी मांगा है।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच मतभेद क्यों महत्वपूर्ण?
टाटा संस देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है।वहीं, टाटा ट्रस्ट्स समूह की स्वामित्व संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।ऐसे में दोनों संस्थाओं के नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उत्पन्न मतभेद कॉरपोरेट प्रशासन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर उठे सवाल कंपनी के आंतरिक प्रशासन, बोर्ड की शक्तियों और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन से जुड़े हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े कारोबारी समूहों में नेतृत्व संबंधी विवादों का समाधान पारदर्शी कॉरपोरेट प्रशासन और लागू कानूनी व्यवस्थाओं के तहत किया जाना आवश्यक है।
राजनीतिक विवाद के बाद अब आगे क्या?
टाटा संस के नेतृत्व विवाद पर राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण के बीच हुई बयानबाजी ने इस मामले को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।राहुल गांधी सरकार से यह जानना चाहते हैं कि टाटा समूह के प्रतिनिधियों की गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर बैठक का उद्देश्य क्या था।दूसरी ओर, निर्मला सीतारमण का कहना है कि कानूनी और व्यावसायिक मामलों को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।फिलहाल इस विवाद में किसी आपराधिक साजिश या राजनीतिक हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं हुई है।अब निगाहें टाटा संस के आंतरिक विवाद के समाधान और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं।
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