- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- UPI को लेकर राहुल...

x
नई दिल्ली। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI पर शुल्क को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। राहुल गांधी ने इसे अमेरिकी पेमेंट कंपनियों के दबाव से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। हालांकि सरकार की तरफ से कहा गया है कि अभी 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर कोई नया शुल्क लागू नहीं किया गया है।
विवाद की शुरुआत वित्त मंत्रालय के उस नोटिफिकेशन के बाद हुई, जिसमें 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन और RuPay डेबिट कार्ड भुगतान पर शुल्क नहीं लगाए जाने की व्यवस्था स्पष्ट की गई है। नई व्यवस्था ने पुराने व्यापक प्रतिबंध को बदल दिया है, जिससे 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर भविष्य में शुल्क लगाए जाने की संभावना के लिए कानूनी रास्ता खुला है। लेकिन फिलहाल ऐसे बड़े लेनदेन पर फीस लगाने की दर या उसे लागू करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
राहुल गांधी के मुताबिक 2,000 रुपये से ऊपर के मर्चेंट UPI लेनदेन पर अब MDR यानी Merchant Discount Rate लगाए जाने की गुंजाइश बन गई है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे ट्रांजैक्शन संख्या के लिहाज से भले ही कुल UPI लेनदेन का करीब 5 प्रतिशत हों, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है।
राहुल का तर्क है कि अगर MDR सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाता और व्यापारी को इसका भुगतान करना पड़ता है, तब भी इसका आर्थिक बोझ आखिरकार ग्राहक तक पहुंच सकता है। दुकानदार इस लागत को सामान या सेवाओं की कीमत में जोड़ सकते हैं।
हालांकि यह राहुल गांधी का राजनीतिक और आर्थिक तर्क है। सरकार ने अभी यह घोषणा नहीं की है कि 2,000 रुपये से ऊपर के हर UPI भुगतान पर शुल्क लगेगा।
अमेरिकी दबाव के सामने सरेंडर'
राहुल गांधी ने UPI विवाद को भारत-अमेरिका संबंधों से भी जोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-MDR नीति का विरोध करती रही हैं और सरकार अब इसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता बना रही है।
इसी संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए 'Compromised PM' शब्द का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि वह अमेरिकी दबाव के सामने एक बार फिर 'सरेंडर' कर रहे हैं।
राहुल गांधी का यह बयान एक राजनीतिक आरोप है। यह स्थापित तथ्य नहीं है कि वित्त मंत्रालय का फैसला अमेरिकी सरकार या अमेरिकी कंपनियों के दबाव में लिया गया। सरकार ने इस तरह के आरोपों को खारिज किया है।
इससे पहले ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव यानी GTRI ने भी कहा था कि भारत को UPI से जुड़ी नीति लागत और घरेलू जरूरतों के आधार पर तय करनी चाहिए, न कि अमेरिकी व्यापार दबाव में।
आखिर नोटिफिकेशन में क्या बदला?
मौजूदा विवाद को समझने के लिए 2,000 रुपये की सीमा का मतलब समझना जरूरी है।
14 सितंबर को सामने आए बदलाव के मुताबिक बैंकों और भुगतान व्यवस्था से जुड़े सेवा प्रदाताओं को 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पर शुल्क लेने से रोका गया है। RuPay डेबिट कार्ड के पात्र लेनदेन को भी शुल्क से सुरक्षा दी गई है।
लेकिन बदलाव का दूसरा पहलू राजनीतिक विवाद की वजह बना है।
पहले कानून में UPI समेत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर बैंक चार्ज लगाने से व्यापक रोक थी। संशोधित व्यवस्था में स्पष्ट कानूनी सुरक्षा 2,000 रुपये तक के भुगतान के लिए रखी गई है। इससे इस सीमा से ऊपर के भुगतान के लिए अलग MDR व्यवस्था बनाने की संभावना खुलती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि आज से 2,001 रुपये भेजते ही ग्राहक के खाते से शुल्क कट जाएगा।
दोस्त को ₹5,000 भेजने पर लगेगा चार्ज?
इस विवाद के बीच आम UPI यूजर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है।
अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी दूसरे व्यक्ति को UPI के जरिए 5,000 रुपये भेजते हैं तो मौजूदा स्थिति में इसे लेकर कोई नया शुल्क घोषित नहीं किया गया है। विवाद मुख्य रूप से **Person-to-Merchant यानी P2M** भुगतान और उसमें MDR की संभावित वापसी को लेकर है।
MDR सामान्य तौर पर व्यापारी द्वारा भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों को दिया जाने वाला शुल्क होता है। यह ग्राहक द्वारा सीधे हर ट्रांजैक्शन पर दिया जाने वाला चार्ज जरूरी नहीं है।
वित्त मंत्रालय से जुड़ी रिपोर्ट में भी उपभोक्ताओं और व्यक्ति-से-व्यक्ति डिजिटल भुगतान को शुल्क-मुक्त बनाए रखने की बात कही गई है।
इसलिए यह कहना कि अब हर 2,000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर ग्राहक को पैसे देने होंगे, फिलहाल सही नहीं है।
फिर राहुल गांधी क्यों उठा रहे सवाल?
राहुल गांधी की चिंता सीधे ग्राहक से कटने वाले शुल्क के बजाय अप्रत्यक्ष लागत को लेकर है।
मान लीजिए भविष्य में 2,000 रुपये से ऊपर की किसी दुकान की UPI पेमेंट पर व्यापारी से MDR लिया जाता है। राहुल का तर्क है कि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को खुद वहन करने के बजाय उत्पाद की कीमत में शामिल कर सकता है।
इस स्थिति में तकनीकी तौर पर ग्राहक से 'UPI फीस' नहीं ली जाएगी, लेकिन कांग्रेस का दावा है कि बढ़ी कीमत के रूप में उसका बोझ ग्राहक तक पहुंच सकता है।
यही इस राजनीतिक विवाद का मुख्य बिंदु है।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे भी मैदान में
राहुल गांधी अकेले कांग्रेस नेता नहीं हैं जिन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई से पहले ही आम आदमी परेशान है और अब सरकार UPI में भी शुल्क का रास्ता बना रही है। कांग्रेस का दावा है कि 'UPI पर कोई फीस नहीं' वाली व्यवस्था को 2,000 रुपये तक सीमित करने से भविष्य में बड़े भुगतान पर शुल्क लगाया जा सकता है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस बदलाव को लेकर सवाल उठाए और इसे अमेरिकी व्यापारिक हितों से जोड़ने की कोशिश की।
भाजपा ने आरोपों को बताया भ्रामक
दूसरी तरफ भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा की तरफ से कहा गया कि नए नोटिफिकेशन का यह मतलब नहीं है कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर तत्काल कोई चार्ज लगा दिया गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक सरकार का पक्ष है कि मौजूदा समय में बड़े UPI ट्रांजैक्शन पर कोई नई MDR दर लागू नहीं हुई है और इस संबंध में अंतिम व्यवस्था अभी तय नहीं हुई है।
यही अंतर आम उपभोक्ताओं के लिए समझना जरूरी है—**कानून में भविष्य के लिए शुल्क लगाने की संभावना खुलना और वास्तविक शुल्क लागू हो जाना दो अलग बातें हैं।**
UPI को चलाने में भी आता है खर्च
UPI भारत की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल पेमेंट प्रणालियों में से एक बन चुका है। करोड़ों लोग रोजाना छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक भुगतान के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
अभी उपभोक्ता UPI के जरिए भुगतान करने के लिए आमतौर पर कोई शुल्क नहीं देते। लेकिन बैंक, फिनटेक कंपनियां और पेमेंट सिस्टम से जुड़े दूसरे संस्थान इस नेटवर्क को चलाने के लिए तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग पर खर्च करते हैं।
इसी कारण पेमेंट इंडस्ट्री की तरफ से लंबे समय से UPI के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल की मांग उठती रही है। संभावित MDR व्यवस्था को इसी बहस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
अभी आपकी जेब पर क्या असर?
फिलहाल सामान्य UPI यूजर के लिए तत्काल घबराने जैसी कोई घोषणा नहीं हुई है।
2,000 रुपये से ऊपर के सभी UPI ट्रांजैक्शन पर ग्राहक से फीस वसूलना शुरू नहीं हुआ है। खास तौर पर दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजने जैसे व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांजैक्शन पर नया शुल्क घोषित नहीं किया गया है।
विवाद इस बात को लेकर है कि कानून में बदलाव से सरकार को भविष्य में 2,000 रुपये से ऊपर के **मर्चेंट पेमेंट** के लिए MDR व्यवस्था बनाने का रास्ता मिल गया है।
अगर भविष्य में ऐसी व्यवस्था लागू होती है तो उसकी दर कितनी होगी, किन व्यापारियों पर लागू होगी, क्या कोई छूट होगी और लागत आखिर कौन वहन करेगा—इन सभी सवालों के जवाब अंतिम नियम सामने आने के बाद ही मिलेंगे।
फिलहाल राहुल गांधी ने इसी संभावित बदलाव को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए सरकार पर अमेरिकी दबाव के सामने झुकने का आरोप लगाया है। सरकार और भाजपा इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं। ऐसे में UPI पर नई सियासी रार जरूर शुरू हो गई है, लेकिन **'2,000 रुपये से ऊपर UPI किया तो ग्राहक से चार्ज कटेगा' कहना अभी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
Next Story





