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पेपर लीक और महंगी फीस पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला

Kavita2
11 Sept 2026 3:27 PM IST
पेपर लीक और महंगी फीस पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला
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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत का शिक्षा सिस्टम उसी युवा पीढ़ी को निराश कर रहा है, जिसे आगे बढ़ाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी उस पर है। राहुल गांधी ने पेपर लीक, भारी-भरकम फीस और खराब बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे उठाते हुए छात्रों, अभिभावकों एवं शिक्षकों से शिक्षा व्यवस्था पर अपने अनुभव साझा करने की अपील की।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “भारत का शिक्षा सिस्टम उसी पीढ़ी को निराश कर रहा है जिसे उसे आगे बढ़ाना था। पेपर लीक होना, भारी-भरकम फीस, खस्ताहाल इंफ्रास्ट्रक्चर। लाखों युवा भारतीय ईमानदारी से काम करते हैं, फिर भी सिस्टम उन्हें निराश करता है।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत उन लोगों की बात सुनने से होनी चाहिए, जो प्रतिदिन इसकी कमियों और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सवाल किया कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिससे उनका मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर भरोसा कम हो गया। राहुल गांधी का कहना था कि नीतियां बनाने से पहले सरकार को उन लोगों के अनुभव समझने चाहिए, जिन पर इन नीतियों का सीधा प्रभाव पड़ता है।

राहुल गांधी ने पेपर लीक को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने संकेत दिया कि छात्र वर्षों तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने या परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण उनकी मेहनत प्रभावित हो जाती है। ऐसी घटनाओं से केवल परीक्षा रद्द या स्थगित नहीं होती, बल्कि उम्मीदवारों का समय, पैसा और मानसिक ऊर्जा भी बर्बाद होती है।

उन्होंने कहा कि लाखों युवा ईमानदारी के साथ पढ़ाई और परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इसके बावजूद व्यवस्था में मौजूद खामियों के कारण उन्हें बार-बार निराशा का सामना करना पड़ता है। राहुल गांधी के अनुसार, परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनती विद्यार्थियों के भरोसे को कमजोर करती हैं और पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

कांग्रेस नेता ने शिक्षा संस्थानों में बढ़ती फीस का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि भारी-भरकम फीस के कारण सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करना कठिन होता जा रहा है। स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक पढ़ाई का खर्च लगातार अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। फीस के अतिरिक्त किताबों, परिवहन, छात्रावास और कोचिंग का खर्च भी परिवारों की चिंता बढ़ाता है।

राहुल गांधी की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, शिक्षण संस्थानों में सुविधाओं की स्थिति और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर लगातार बहस होती रही है। कांग्रेस इन मुद्दों के माध्यम से युवाओं और मध्यम वर्ग के परिवारों के बीच अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रही है। पार्टी का आरोप रहा है कि शिक्षा एवं रोजगार के मुद्दों को सरकार की नीतियों में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही।

खस्ताहाल बुनियादी ढांचे की बात करते हुए राहुल गांधी ने शिक्षा संस्थानों में जरूरी सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया। देश के कई हिस्सों में स्कूलों और कॉलेजों के पास पर्याप्त कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान तथा डिजिटल संसाधन उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। कई स्थानों पर शिक्षकों की कमी और संसाधनों के असमान वितरण को भी शिक्षा की गुणवत्ता में बाधा माना जाता है।

कांग्रेस नेता के बयान का एक प्रमुख पहलू शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों की सीधी भागीदारी पर जोर देना है। उन्होंने कहा कि सुधार ऊपर से थोपे गए फैसलों से नहीं, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की समस्याएं सुनने से शुरू होगा। उनका मानना है कि कक्षा और परीक्षा केंद्र से जुड़े वास्तविक अनुभवों को समझे बिना शिक्षा व्यवस्था की कमियों का स्थायी समाधान नहीं खोजा जा सकता।

राहुल गांधी ने छात्रों से जानना चाहा कि पढ़ाई और परीक्षाओं के दौरान उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अभिभावकों से उन्होंने पूछा कि बच्चों की शिक्षा का खर्च उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर किस प्रकार असर डाल रहा है। वहीं, शिक्षकों से व्यवस्था की उन कमियों को सामने लाने का आग्रह किया, जो पढ़ाने और विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन देने में बाधा बन रही हैं।

विपक्ष लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को राजनीतिक मुद्दा बनाता रहा है। संसद के भीतर और बाहर कांग्रेस नेताओं ने पेपर लीक के मामलों में जिम्मेदारी तय करने, दोषियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने और परीक्षाओं के आयोजन में अधिक पारदर्शिता लाने की मांग की है। पार्टी का दावा है कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है।

राहुल गांधी के बयान को युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करने की उनकी रणनीति के हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है। उन्होंने शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्रगति की बुनियाद बताया है। उनका कहना है कि यदि व्यवस्था मेहनत करने वाले छात्रों को निष्पक्ष अवसर नहीं दे पाती, तो इससे देश की पूरी युवा आबादी का भविष्य प्रभावित होता है।

कांग्रेस ने सरकार से शिक्षा का खर्च कम करने, सरकारी संस्थानों में सुविधाएं बढ़ाने, शिक्षकों के खाली पद भरने और परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने की मांग की है। पार्टी के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक हर बच्चे की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसे परिवार की आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

राहुल गांधी ने अपने संदेश के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की आवाज को नीति निर्माण में जगह नहीं मिलेगी, तब तक सुधार अधूरा रहेगा। उनके इस बयान के बाद शिक्षा, परीक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

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