दिल्ली-एनसीआर

राहुल गांधी ने मांगे मारपीट के वीडियो और सबूत

Ratna Netam
14 Oct 2026 3:50 PM IST
राहुल गांधी ने मांगे मारपीट के वीडियो और सबूत
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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ कथित मारपीट के मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के साथ कथित पुलिस कार्रवाई पर राहुल गांधी ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करने के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने तथा उन्हें कांग्रेस पार्टी के साथ साझा करने की अपील की।
राहुल गांधी ने बुधवार, 14 अक्टूबर को एनएसयूआई के उन कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिन्होंने दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शन के दौरान मारपीट करने का आरोप लगाया है। इस दौरान कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की आवाज के खिलाफ खड़ा नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन में शामिल लोग किसी एक धर्म, जाति या वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने इस आंदोलन को भारत की आवाज बताते हुए कहा कि इसे दबाने का प्रयास नहीं होना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने गृह मंत्री अमित शाह से कहा कि वे इन प्रदर्शनकारियों को ध्यान से देखें। उन्होंने कहा कि यहां किसी की पहचान हिंदू, मुस्लिम, महिला, पुरुष या किसी विशेष जाति के आधार पर नहीं की जा रही है। यहां एक साझा आवाज है, जो अपने अधिकारों और मांगों को लेकर सामने आई है।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इस विरोध की आवाज के खिलाफ खड़े होने से बचना चाहिए। उनके इस बयान के दौरान एनएसयूआई के कई कार्यकर्ता मौजूद थे, जिन्होंने पुलिस कार्रवाई को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे कथित मारपीट की घटनाओं के वीडियो, तस्वीरें और अन्य उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखें। उन्होंने छात्रों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी प्रमाण कांग्रेस पार्टी तक पहुंचाए जाएं, ताकि भविष्य में संबंधित घटनाओं को लेकर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया में उनका उपयोग किया जा सके।
राहुल गांधी ने कहा कि जब इस पूरे मामले का निष्कर्ष निकलेगा, तब उपलब्ध साक्ष्यों का इस्तेमाल किया जाएगा और जिन लोगों की जिम्मेदारी साबित होगी, उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों का भी उल्लेख किया।
दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 13 अक्टूबर को कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की थी।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। इसके बाद कुछ छात्रों ने पुलिस पर मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। इन आरोपों को लेकर बुधवार को राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं के साथ संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कुछ महिला कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के दौरान उसके साथ मारपीट की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया और हिरासत के दौरान भी दुर्व्यवहार किया।
राहुल गांधी ने कथित रूप से घायल महिला कार्यकर्ता का जिक्र करते हुए उसके साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि मारपीट के आरोपों के बावजूद छात्रा डरी नहीं और अपनी बात रखने के लिए सामने आई। कार्यक्रम में एक प्रदर्शनकारी ने बांसुरी पर 'वैष्णव जन तो' की धुन भी बजाई।
इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग मतदाता सूची में संशोधन को लेकर अपने ऊपर लगाए गए पक्षपात के आरोपों से इनकार करता रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और प्रदर्शनकारियों की आवाज को सुना जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि किसी प्रदर्शनकारी के साथ गलत व्यवहार हुआ है, तो उसके प्रमाण सुरक्षित रखे जाने चाहिए।
फिलहाल प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन विशिष्ट आरोपों पर दिल्ली पुलिस की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आरोपों की सत्यता और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित जांच के आधार पर ही हो सकेगा।
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