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जंतर-मंतर पर महिला पत्रकार से कथित बदसलूकी पर भड़के राहुल गांधी, अमित शाह से मांगा जवाब

Kavita2
4 Oct 2026 9:45 AM IST
जंतर-मंतर पर महिला पत्रकार से कथित बदसलूकी पर भड़के राहुल गांधी, अमित शाह से मांगा जवाब
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नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ पुलिस अधिकारी द्वारा कथित बदसलूकी किए जाने का मामला राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है। राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए इस पूरे मामले में गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए।

राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संबंध में एक पोस्ट साझा की। उन्होंने महिला पत्रकार की शिकायत का जिक्र करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। इसके बाद बड़ी संख्या में पत्रकार वहां बैठकर एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने सवाल किया कि शिकायत पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस का बुनियादी काम है, फिर इसमें देरी क्यों हो रही है।

महिला पत्रकार का आरोप है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को रिकॉर्ड करते समय एक अधिकारी ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया। शिकायत के बाद मामले में कार्रवाई की मांग उठी और पत्रकारों ने जंतर-मंतर पर धरना दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पत्रकारों की प्रमुख मांग शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने की थी।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और पत्रकारों के साथ कथित व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि शनिवार को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी, पत्रकारों को खींचने और कैमरे छीने जाने जैसे आरोप भी लगाए गए। ये राहुल गांधी और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोप हैं; संबंधित घटनाओं की जवाबदेही और परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण होगी।

राहुल गांधी ने महिला सुरक्षा को लेकर भी केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को घेरा। उनका कहना था कि जब कोई महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत लेकर सामने आती है तो उसकी शिकायत पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली पुलिस के केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन होने का उल्लेख करते हुए सीधे अमित शाह से जवाब मांगा।

दरअसल, जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। विरोध प्रदर्शन में विभिन्न छात्र संगठनों, राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों से जुड़े लोग शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति और निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। शुक्रवार को प्रदर्शन से संबंधित तीन एफआईआर भी दर्ज की गई थीं।

शनिवार को दूसरे दिन भी जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा कड़ी रही। प्रदर्शन करने पहुंचे कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 150 प्रदर्शनकारियों को शनिवार को हिरासत में लिया गया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी रही।

इसी दौरान महिला पत्रकार की ओर से पुलिस अधिकारी पर लगाए गए आरोप ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। मामला सामने आने के बाद पत्रकारों ने कार्रवाई की मांग उठाई। राहुल गांधी ने भी इस मांग का उल्लेख करते हुए कहा कि शिकायत दर्ज करना पुलिस की बुनियादी जिम्मेदारी है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पहले सामने आए वीडियो का भी जिक्र किया। हालांकि मौजूदा मामले में महिला पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुलिस का आधिकारिक पक्ष किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस पहले ही कई कदम उठा चुकी है। प्रदर्शन से जुड़े मामलों में संसद मार्ग और कनॉट प्लेस थानों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें सरकारी आदेशों के उल्लंघन और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल हैं।

पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए हैं। सीपीआई सांसद पी. संदोश कुमार ने भी गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के कथित व्यवहार और उनकी पहचान प्रदर्शित करने से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।

राहुल गांधी के बयान के बाद महिला पत्रकार से कथित बदसलूकी का मामला अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता ने दिल्ली पुलिस की जवाबदेही को सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय से जोड़ा है। उनका कहना है कि जब दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के नियंत्रण में है तो गृह मंत्री को पुलिस पर लगे आरोपों को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

दूसरी तरफ, किसी पुलिस अधिकारी पर लगाए गए आरोपों की सत्यता तय करने के लिए शिकायत, उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी। महिला पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोप को जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही संबंधित अधिकारी की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, हिरासत और महिला पत्रकार से कथित बदसलूकी का मामला लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी के बयान ने इसे और राजनीतिक महत्व दे दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए सवाल उठाया है कि महिला की शिकायत पर कार्रवाई में देरी क्यों हुई। अब निगाह दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस मामले में आगे उठाए जाने वाले कदमों पर है।

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