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जसोला नाले में मासूम की मौत पर सवाल रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर परिवार नाराज
nidhi
26 Aug 2026 6:58 AM IST

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चार दिन की तलाश के बाद खत्म हुआ इंतजार
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जसोला इलाके में खुले नाले में गिरे 15 वर्षीय बच्चे मिथुन का शव चार दिन बाद बरामद किया गया। मासूम की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। वहीं, परिजनों ने राहत और बचाव अभियान की गति और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि अगर समय रहते प्रभावी तरीके से तलाश की जाती तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
जानकारी के मुताबिक, मिथुन 22 अगस्त को पतंग उड़ाते समय जसोला इलाके के खुले नाले में गिर गया था। घटना के बाद से ही परिवार और प्रशासन की टीमें बच्चे की तलाश में जुटी थीं। दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने नाले में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन चार दिन बाद बच्चे का शव बरामद हो सका।
पिता खुद नाले में उतरकर करते रहे तलाश
बेटे की तलाश में पिता अवधेश कुमार लगातार मौके पर डटे रहे। सामने आए वीडियो में वह नाले में जमा कचरा हटाते हुए अपने बेटे को खोजने की कोशिश करते नजर आए। पिता का कहना था कि अगर नाले से कचरा हटा दिया जाए तो बच्चे का पता चल सकता है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। परिजनों का आरोप है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी हुई और शुरुआत से ही बेहतर इंतजाम किए जाते तो परिणाम अलग हो सकता था। परिवार ने प्रशासन से जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
खुले नाले को लेकर उठे सवाल
मिथुन के नाले में गिरने के बाद दिल्ली में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाके के बीच से गुजर रहा यह नाला लंबे समय से खतरा बना हुआ था। बच्चों के लिए यह जगह बेहद जोखिम भरी थी। लोगों का कहना है कि नालों को ढकने और नियमित सफाई की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
कार्रवाई के निर्देश
घटना के बाद प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। दिल्ली सरकार की ओर से मामले की जानकारी मांगी गई और लापरवाही की जांच के निर्देश दिए गए। वहीं, एमसीडी ने एक जूनियर इंजीनियर को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया है।
परिवार में पसरा मातम
मिथुन का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और दिल्ली में रहकर मजदूरी करता है। बेटे की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। चार दिनों तक उम्मीद लगाए बैठे परिजनों को आखिरकार बच्चे का शव मिला, जिससे उनकी उम्मीदें टूट गईं। इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में जल निकासी व्यवस्था, खुले नालों की सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब परिवार और स्थानीय लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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