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पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल SC ने पूर्व जज की अध्यक्षता में बनाई जांच कमेटी

Ratna Netam
20 Aug 2026 5:23 PM IST
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल SC ने पूर्व जज की अध्यक्षता में बनाई जांच कमेटी
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नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन, लाठीचार्ज और अन्य पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस कमेटी का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करना और यह पता लगाना है कि पुलिस कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि जांच केवल किसी एक पक्ष के आरोपों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों दोनों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। समिति वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, दस्तावेजों और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हाई पावर कमेटी
छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति बनाने का फैसला लिया। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश **जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी** करेंगे।
अदालत ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह साफ हो सके कि आंदोलन के दौरान पुलिस ने किस परिस्थिति में बल प्रयोग किया और क्या इस्तेमाल किए गए साधन कानून के दायरे में थे।
पैलेट गन और लाठीचार्ज के आरोपों की होगी जांच
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। इसमें लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए गए थे।
अब समिति यह जांच करेगी कि:
* क्या पुलिस कार्रवाई जरूरी थी?
* क्या बल प्रयोग उचित अनुपात में किया गया?
* क्या प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ?
* क्या सुरक्षा बलों ने तय नियमों का पालन किया?
इन सभी सवालों पर जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
कमेटी में कौन-कौन होंगे शामिल?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। इसके अलावा समिति में अन्य विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। हालांकि, सभी सदस्यों के नामों की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति में न्यायिक अनुभव रखने वाले लोगों के साथ-साथ सुरक्षा और प्रशासनिक मामलों की समझ रखने वाले विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है, ताकि जांच सभी पहलुओं से की जा सके।
पुलिस ने अपने पक्ष में क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उसने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की थी। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए थे और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।
पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई परिस्थितियों को देखते हुए की गई थी।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए थे गंभीर आरोप
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि उनके साथ जरूरत से ज्यादा सख्ती बरती गई। छात्रों ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया।
इस मामले को लेकर कई राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी थी और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों उठाया यह कदम?
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी होती है ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वालों के अधिकारों की रक्षा हो और कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय हो।
इसलिए स्वतंत्र समिति के जरिए जांच कराने का फैसला लिया गया।
डिजिटल सबूतों की भी होगी जांच
कमेटी जांच के दौरान कई तरह के सबूतों का इस्तेमाल करेगी। इसमें:
* प्रदर्शन के वीडियो
* सीसीटीवी फुटेज
* पुलिस रिकॉर्ड
* सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री
* प्रत्यक्षदर्शियों के बयान
शामिल किए जा सकते हैं।
इन सबूतों के आधार पर समिति घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश करेगी।
छात्रों के अधिकार और कानून व्यवस्था पर बहस
यह मामला एक बार फिर छात्र आंदोलनों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की जांच पर है। समिति अपनी रिपोर्ट में यह बताएगी कि आंदोलन के दौरान क्या परिस्थितियां थीं और किस स्तर पर गलती हुई।
रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
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