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Jauhar यूनिवर्सिटी कार्रवाई पर उठे सवाल, जमीयत ने सरकार से की अपील

New Delhi नई दिल्ली : रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को ध्वस्त किए जाने के आदेश को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने चिंता जताई है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में पुनर्विचार करने की अपील की है। मौलाना मदनी का कहना है कि यह मामला केवल भवनों को गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कानून के शासन, प्राकृतिक न्याय और संवैधानिक जिम्मेदारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े होते हैं।
मौलाना महमूद मदनी ने जारी बयान में कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान से जुड़ा फैसला लेते समय छात्रों, शिक्षा व्यवस्था और समाज के व्यापक हितों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है तो इसका सीधा असर बड़ी संख्या में अध्ययनरत छात्रों पर पड़ेगा। छात्रों की पढ़ाई बाधित हो सकती है और उनके भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल इमारतों का समूह नहीं होते, बल्कि वे ज्ञान, शोध और बौद्धिक विकास के केंद्र होते हैं। ऐसे संस्थानों से जुड़ी किसी भी कार्रवाई में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। मौलाना मदनी ने कहा कि शिक्षा से जुड़ी संपत्तियों को नुकसान पहुंचने से देश की शैक्षिक और बौद्धिक संपदा को भी नुकसान हो सकता है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद अध्यक्ष ने कहा कि कानून का पालन सभी के लिए जरूरी है, लेकिन किसी भी कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मामले से जुड़े सभी पक्षों को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया जाए और अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जाए।
मौलाना मदनी ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील करते हुए कहा कि छात्रों और शिक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को लेकर उठे विवाद का समाधान बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से विभिन्न विवादों को लेकर चर्चा में रही है। यूनिवर्सिटी से जुड़ी भूमि और निर्माण संबंधी मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया चलती रही है। इसी क्रम में कुछ इमारतों को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश सामने आया है, जिस पर अब विभिन्न संगठनों और लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
मौलाना मदनी ने अपने बयान में यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों की भूमिका समाज निर्माण में महत्वपूर्ण होती है। इसलिए ऐसे मामलों में जल्दबाजी के बजाय व्यापक विचार-विमर्श और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस मामले को संवेदनशीलता के साथ देखेगी और ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे कानून का सम्मान भी बना रहे और छात्रों के हित भी सुरक्षित रहें।
अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और सरकार के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। वहीं, यूनिवर्सिटी से जुड़े पक्ष भी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।





