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- 650 करोड़ खरीद पर उठे...

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सामने आए 650 करोड़ रुपये के दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले की जांच अब एक नई चुनौती में फंस गई है। जांच के दौरान घोटाले से जुड़ी सात महत्वपूर्ण खरीद फाइलें अब तक उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। इन फाइलों के नहीं मिलने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अब अधिकारियों ने स्टॉक ऑडिट के माध्यम से पूरी खरीद प्रक्रिया का हिसाब जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़ी जिन सात फाइलों की तलाश की जा रही है, उनमें घोटाले के बड़े हिस्से से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद बताए जा रहे हैं। इन फाइलों में खरीद आदेश, सप्लाई ऑर्डर, डिलीवरी चालान, निरीक्षण रिपोर्ट, भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अस्पतालों को भेजी गई सामग्री का पूरा रिकॉर्ड शामिल होने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसियों और संबंधित विभागों की ओर से इन मूल फाइलों की मांग की गई थी, लेकिन अभी तक ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सके हैं। फाइलों के गायब होने को लेकर विभागीय स्तर पर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसके कारण जांचकर्ताओं को अब वैकल्पिक तरीकों से खरीद प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति पता लगाने की कोशिश करनी पड़ रही है।
अधिकारियों ने अब स्टॉक ऑडिट का सहारा लिया है। इसके तहत दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में उपलब्ध स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद दवाओं व चिकित्सा उपकरणों का मिलान किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कितनी सामग्री खरीदी गई, कितनी अस्पतालों तक पहुंची, कितना सामान इस्तेमाल हुआ और वर्तमान में कितना स्टॉक मौजूद है।
स्टॉक ऑडिट के माध्यम से खरीद और वितरण के बीच किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन दवाओं और उपकरणों की खरीद दिखाई गई, क्या वे वास्तव में अस्पतालों तक पहुंचे थे या नहीं। इसके अलावा यह भी जांच का हिस्सा है कि सामग्री की गुणवत्ता, मात्रा और भुगतान प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं।
बताया जा रहा है कि इस मामले में खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर यह तय किया जा सकता है कि खरीद में कहां और किस स्तर पर अनियमितता हुई। फाइलों के गायब होने से जांचकर्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं का यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच से जुड़े अधिकारी अब उपलब्ध रिकॉर्ड और अस्पतालों के दस्तावेजों के आधार पर पूरी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, अस्पतालों में भेजी गई सामग्री की जानकारी अलग-अलग रजिस्टरों में दर्ज होती है। इन रिकॉर्ड का मिलान करके खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। अगर ऑडिट के दौरान खरीद और उपलब्ध स्टॉक में अंतर पाया जाता है तो जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल सात अहम फाइलों की तलाश जारी है और साथ ही स्टॉक ऑडिट की प्रक्रिया भी चल रही है। आने वाले दिनों में ऑडिट रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर इस मामले में नए खुलासे होने की संभावना है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि 650 करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया में आखिर कहां और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।





