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सत्य निकेतन में मौतों के बाद उठे सवाल क्या दिल्ली में सुरक्षित हैं छात्र

Ratna Netam
8 Sept 2026 3:48 PM IST
सत्य निकेतन में मौतों के बाद उठे सवाल क्या दिल्ली में सुरक्षित हैं छात्र
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नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने एक बार फिर देश की राजधानी में छात्रों के सुरक्षित आवास की समस्या को सामने ला दिया है। इस हादसे में **7 लोगों की मौत** के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि दिल्ली जैसे बड़े शैक्षणिक केंद्र में दूर-दराज से पढ़ाई करने आने वाले छात्र आखिर सुरक्षित कहां रहें। मामले की गंभीरता को देखते हुए **राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से रिपोर्ट मांगी है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने केवल एक इमारत की सुरक्षा पर नहीं बल्कि पूरे छात्र आवास सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ी संख्या में छात्र कॉलेजों में हॉस्टल की सीमित सीटों के कारण निजी पीजी और किराये के कमरों में रहने को मजबूर हैं।
NHRC ने क्यों मांगी रिपोर्ट?
मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को छात्रों की सुरक्षा और जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला माना है। आयोग ने दिल्ली सरकार और UGC से यह जानकारी मांगी है कि छात्रों के लिए सुरक्षित और मानकों के अनुरूप रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
NHRC यह भी जानना चाहता है कि निजी पीजी, हॉस्टल और किराये की इमारतों में सुरक्षा नियमों का पालन कितना हो रहा है और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
सत्य निकेतन हादसे ने खोली व्यवस्था की पोल
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन लंबे समय से छात्रों का प्रमुख इलाका रहा है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले हजारों छात्र रहते हैं।
लेकिन हादसे के बाद सामने आया कि कई इमारतों में जगह की कमी, पुरानी संरचना, संकरी गलियां और सुरक्षा सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं मौजूद हैं। कुछ रिपोर्टों में इलाके की इमारतों में खराब स्थिति और छात्रों के डर का भी जिक्र किया गया है।
हॉस्टल कम, छात्रों की संख्या ज्यादा
दिल्ली जैसे शहरों में सबसे बड़ी समस्या छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध न होना है। बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालयों में प्रवेश तो पा जाते हैं, लेकिन उन्हें कैंपस के अंदर रहने की जगह नहीं मिल पाती।
इसके बाद वे मजबूरी में निजी पीजी, किराये के कमरे या फ्लैट का सहारा लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब मांग ज्यादा और सुरक्षित विकल्प कम होते हैं तो अनियमित पीजी का कारोबार बढ़ जाता है।
छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल- जाएं तो जाएं कहां?
सत्य निकेतन हादसे के बाद कई छात्र डर के माहौल में हैं। कुछ छात्रों ने बताया कि घटना के बाद उनके परिवार लगातार फोन कर रहे हैं और उन्हें सुरक्षित जगह तलाशने की सलाह दे रहे हैं।
लेकिन समस्या यह है कि अगर छात्र मौजूदा पीजी छोड़ भी दें तो उन्हें तुरंत सुरक्षित और किफायती विकल्प मिलना आसान नहीं है। खासकर बाहर से आने वाले छात्रों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गई है।
DU हॉस्टल व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस हादसे के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की हॉस्टल व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है। बड़ी संख्या में छात्रों की तुलना में हॉस्टल सीटें काफी कम हैं, जिसके कारण निजी आवास पर निर्भरता बढ़ती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालयों को केवल पढ़ाई की सुविधा ही नहीं बल्कि छात्रों के लिए सुरक्षित आवास व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा।
प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई और पीजी इमारतों की सुरक्षा जांच को लेकर कदम उठाए गए हैं।
इसके अलावा निजी पीजी और हॉस्टल इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग भी तेज हो गई है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
सिर्फ सत्य निकेतन नहीं, कई इलाकों में खतरा
दिल्ली में सत्य निकेतन के अलावा कई अन्य इलाकों में भी बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। इनमें मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, मुनिरका और नॉर्थ कैंपस के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
इन इलाकों में भीड़भाड़, पुरानी इमारतें और सीमित सुविधाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
सुरक्षित छात्र आवास के लिए नई नीति की जरूरत
सत्य निकेतन हादसे ने यह साफ कर दिया है कि छात्रों के लिए केवल शिक्षा की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। उन्हें सुरक्षित और किफायती आवास देना भी जरूरी है।
जानकारों का कहना है कि सरकार, विश्वविद्यालय और स्थानीय प्रशासन को मिलकर ऐसी नीति बनानी होगी जिसमें निजी पीजी की निगरानी, सुरक्षा मानक और छात्रों के अधिकार सुनिश्चित किए जा सकें।
भविष्य में क्या बदल सकता है?
NHRC की रिपोर्ट मांगने के बाद उम्मीद है कि छात्र आवास व्यवस्था को लेकर नए दिशा-निर्देश तैयार किए जा सकते हैं। निजी हॉस्टल और पीजी के लिए सुरक्षा मानकों को सख्त किया जा सकता है।
इसके साथ ही विश्वविद्यालयों को भी अपने हॉस्टल विस्तार पर ध्यान देना होगा ताकि छात्रों को मजबूरी में असुरक्षित जगहों पर रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।
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