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CWC बैठक में चुनाव आयोग पर सवाल कांग्रेस ने CEC के इस्तीफे की मांग उठाई
Ratna Netam
29 Sept 2026 3:16 PM IST

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नई दिल्ली। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने मंगलवार को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में हुई बैठक में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कई प्रस्ताव पारित किए। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया रोकने और मतदाता सूचियों से हटाए गए बताए जा रहे करीब 13.30 करोड़ नामों को दोबारा जोड़ने की मांग की। ये कांग्रेस के आरोप और राजनीतिक मांगें हैं, जबकि भारत निर्वाचन आयोग ने SIR से जुड़े अपने फैसलों को कानून के अनुरूप और पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।CWC ने बैठक में चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर सामने आई हालिया रिपोर्टों पर विस्तार से चर्चा की। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे का मुद्दा बताते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, SIR तथा निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल पैदा हुए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि RSS और BJP ने निर्वाचन आयोग की कथित मदद से चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया है। पार्टी ने इस आरोप के समर्थन में निर्वाचन आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा विभिन्न मामलों में दर्ज कराई गई आपत्तियों का उल्लेख किया। हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 अवसरों पर कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने और डेटा के केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे।हालांकि निर्वाचन आयोग ने इस रिपोर्ट के बाद जारी अपने जवाब में कहा कि किसी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। आयोग का कहना है कि पिछले एक वर्ष में SIR सहित उसके अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं और कुछ आंतरिक टिप्पणियों को अलग करके देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
CWC ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से पिछले कुछ समय से उठाए जा रहे “वोट चोरी” के आरोपों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूचियों में बड़े स्तर पर बदलाव और निर्वाचन आयोग के भीतर सामने आई आपत्तियां उनकी चिंताओं को मजबूत करती हैं। हालांकि चुनावों में हेरफेर या “वोट चोरी” के ये आरोप कांग्रेस के दावे हैं और इन पर किसी न्यायिक प्रक्रिया में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ से अधिक नाम हटने का मुद्दा भी राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। रिपोर्टों के अनुसार SIR की प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए हैं। ड्राफ्ट सूची से नाम हटना अपने आप में प्रत्येक मामले में अंतिम मताधिकार समाप्त होना नहीं है, क्योंकि दावे, आपत्तियां और अपील की प्रक्रिया भी उपलब्ध रहती है। CEC ज्ञानेश कुमार ने हाल में कहा था कि जिन राज्यों में प्रक्रिया पूरी हुई, वहां नाम हटाने के खिलाफ निर्धारित अपीलीय स्तर पर कोई अपील दाखिल नहीं की गई थी।
CWC ने मांग की कि जिन करीब 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया जा रहा है, उन्हें बहाल किया जाए और मतदाता सूची में किए गए बदलावों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। कांग्रेस ने मतदाता सूची की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और प्रत्येक जोड़ तथा हटाव की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई।बैठक में आदर्श आचार संहिता के कथित चुनिंदा इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस ने कहा कि अलग-अलग चुनावों में Model Code of Conduct लागू करने के तरीके को लेकर लंबे समय से पार्टी अपनी आपत्तियां दर्ज करा रही है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की व्यवस्था तथा निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे भी बैठक में उठाए गए।
CWC ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की बदली हुई प्रक्रिया को लेकर भी अपनी पुरानी आपत्तियों को दोहराया। मौजूदा कानून के तहत CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनाई गई चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। कांग्रेस इस व्यवस्था पर सवाल उठाती रही है।बैठक में CEC और चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले प्रावधान का भी उल्लेख किया गया। 2023 के कानून की धारा 16 के तहत किसी मौजूदा या पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त अथवा चुनाव आयुक्त द्वारा आधिकारिक कर्तव्य निभाते हुए या उसे निभाने के कथित क्रम में किए गए कार्य या कही गई बात को लेकर अदालत में दीवानी या आपराधिक कार्यवाही पर संरक्षण दिया गया है। यह सभी निजी या गैर-आधिकारिक कृत्यों के लिए सामान्य या असीमित “आजीवन छूट” नहीं है, बल्कि आधिकारिक कार्यों से जुड़ा कानूनी संरक्षण है।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल पद छोड़ने की मांग दोहराई है। इससे पहले भी राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य कांग्रेस नेताओं ने CEC के इस्तीफे की मांग की थी। पार्टी इस मुद्दे पर देशभर में विरोध प्रदर्शन भी कर चुकी है और आगे संसद तथा राजनीतिक मंचों पर इसे उठाने की तैयारी कर रही है।इस बीच निर्वाचन आयोग ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि उसकी निर्णय प्रक्रिया में सभी तीनों चुनाव आयुक्तों की समान भागीदारी है और SIR से जुड़े अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए हैं। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार तीनों चुनाव आयुक्तों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान अधिकार प्राप्त हैं।इस तरह CWC की मंगलवार की बैठक के बाद कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच SIR तथा मतदाता सूची को लेकर चल रहा विवाद और तेज हो गया है। एक ओर कांग्रेस CEC के इस्तीफे, SIR रोकने और हटाए गए बताए जा रहे नामों की बहाली की मांग कर रही है, वहीं निर्वाचन आयोग अपने फैसलों को वैधानिक और सर्वसम्मत बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद, अदालत और राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा का प्रमुख विषय बने रहने की संभावना है।
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