दिल्ली-एनसीआर

नेस्ले के डेयरी व्हाइटनर पर उठे सवाल कंपनी ने दिया जवाब

Ratna Netam
3 Oct 2026 8:52 PM IST
नेस्ले के डेयरी व्हाइटनर पर उठे सवाल कंपनी ने दिया जवाब
x
नई दिल्ली। नेस्ले इंडिया ने अपने ‘लो फैट डेयरी व्हाइटनर’ की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर उठे सवालों पर सफाई दी है। कंपनी ने शनिवार को कहा कि उसका यह उत्पाद इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है और सभी जरूरी नियमों एवं मानकों का पालन करता है। कंपनी की ओर से यह बयान उस लैब रिपोर्ट के सामने आने के बाद दिया गया, जिसमें प्रोडक्ट के एक सैंपल को कथित तौर पर “घटिया” और “असुरक्षित” बताया गया था।
नेस्ले इंडिया ने लैब रिपोर्ट में फास्फोरस की मात्रा को लेकर सामने आए निष्कर्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि दूध और दूध से बने उत्पादों में फास्फोरस प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है। कंपनी के अनुसार, उत्पाद में पाए जाने वाले कुल फास्फोरस और अतिरिक्त रूप से मिलाए गए फास्फोरस के बीच अंतर करना जरूरी है।कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि फास्फोरस एक आवश्यक पोषक तत्व है, जो प्राकृतिक रूप से दूध में पाया जाता है। यही वजह है कि दूध से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों में भी इसकी मात्रा मौजूद रहती है। प्रवक्ता के मुताबिक, लैब रिपोर्ट में एडिटिव के लिए निर्धारित सीमा की तुलना उत्पाद में पाए गए कुल फास्फोरस से की गई है।
कंपनी का कहना है कि इस गणना में दूध से बनी सामग्री के जरिए प्राकृतिक रूप से मिलने वाले फास्फोरस की बड़ी मात्रा को अलग से ध्यान में नहीं रखा गया। नेस्ले इंडिया के अनुसार, यही अंतर रिपोर्ट के निष्कर्ष को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।प्रवक्ता ने कहा, “FSSAI की लैब रिपोर्ट में एडिटिव लिमिट के मुकाबले कुल फास्फोरस को दिखाया गया है, जिसमें दूध से बनी सामग्री से मिलने वाले प्राकृतिक फास्फोरस की बड़ी मात्रा को ध्यान में नहीं रखा गया है।”
नेस्ले इंडिया ने स्पष्ट किया कि उसके मुताबिक ‘लो फैट डेयरी व्हाइटनर’ उपभोग के लिए सुरक्षित है। कंपनी का कहना है कि उत्पाद को तैयार करते समय लागू खाद्य सुरक्षा नियमों और आवश्यक मानकों का पालन किया जाता है। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और उत्पादों की गुणवत्ता उसके लिए महत्वपूर्ण है।मामला सामने आने के बाद खाद्य उत्पादों में प्राकृतिक रूप से मौजूद तत्वों और अतिरिक्त एडिटिव के बीच अंतर को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कंपनी का तर्क है कि किसी डेयरी उत्पाद की जांच करते समय उसमें दूध से प्राकृतिक रूप से आने वाले फास्फोरस और उत्पादन प्रक्रिया के दौरान अलग से शामिल किए जाने वाले फास्फोरस को एक ही आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
डेयरी व्हाइटनर का इस्तेमाल आम तौर पर चाय, कॉफी और अन्य पेय पदार्थों में दूध के विकल्प या दूध आधारित सामग्री के रूप में किया जाता है। ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर किसी लैब रिपोर्ट में सवाल उठना उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण विषय बन जाता है। यही कारण है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद कंपनी ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है।नेस्ले इंडिया का कहना है कि संबंधित उत्पाद आवश्यक मानकों के अनुरूप है। हालांकि, लैब रिपोर्ट में सैंपल को लेकर की गई टिप्पणी और कंपनी की सफाई के बीच अंतर के कारण मामला अब तकनीकी व्याख्या पर केंद्रित हो गया है। एक तरफ लैब रिपोर्ट में उत्पाद के सैंपल पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि दूसरी तरफ कंपनी का दावा है कि रिपोर्ट में फास्फोरस की मात्रा का आकलन करते समय प्राकृतिक स्रोत से मिलने वाले फास्फोरस को पर्याप्त रूप से अलग नहीं किया गया।
कंपनी के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि विवाद का मुख्य बिंदु केवल फास्फोरस की मौजूदगी नहीं, बल्कि उसकी कुल मात्रा की गणना और निर्धारित एडिटिव सीमा से उसकी तुलना करने के तरीके से जुड़ा है। नेस्ले का पक्ष है कि दूध से प्राकृतिक रूप से मिलने वाले फास्फोरस को सीधे अतिरिक्त फास्फोरस की सीमा के साथ जोड़कर देखने से परिणाम की व्याख्या प्रभावित हो सकती है।खाद्य उत्पादों के मामले में गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े मानक बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। बाजार में बिकने वाले उत्पादों के सैंपल की जांच के जरिए यह पता लगाया जाता है कि वे निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। किसी जांच में आपत्ति सामने आने पर संबंधित कंपनी को अपना पक्ष रखने और तकनीकी आधार पर निष्कर्ष को चुनौती देने का अवसर भी मिलता है।
फिलहाल नेस्ले इंडिया ने अपने उत्पाद की सुरक्षा पर भरोसा जताते हुए कहा है कि ‘लो फैट डेयरी व्हाइटनर’ इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है। कंपनी ने फास्फोरस से जुड़े लैब निष्कर्ष पर अपनी तकनीकी आपत्ति भी सामने रखी है। अब इस मामले में आगे संबंधित प्राधिकरण की ओर से कोई अतिरिक्त जांच, स्पष्टीकरण या निर्णय सामने आता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी। उपभोक्ताओं के लिहाज से भी अंतिम आधिकारिक स्थिति महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि मामला सीधे खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़ा है।
Next Story