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बारापुल्ला कॉरिडोर की प्लानिंग पर सवाल ट्रैफिक राहत के लिए नए कदम
Ratna Netam
7 Oct 2026 9:27 PM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली के बारापुल्ला फेज-III कॉरिडोर पर लगातार लग रहे जाम के बीच लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने परियोजना की मूल योजना और डिजाइन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान तैयार और लागू की गई थी और नए कॉरिडोर के खुलने के बाद सामने आई यातायात की समस्याओं ने इसकी प्लानिंग और आसपास के मार्गों के साथ इसके एकीकरण को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि लोगों को ट्रैफिक जाम से जल्द राहत देना है।
बारापुल्ला फेज-III कॉरिडोर का उद्घाटन 29 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। यह नया हिस्सा मयूर विहार फेज-I को सराय काले खां और आगे मौजूदा बारापुल्ला नेटवर्क से जोड़ता है। इसका उद्देश्य पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच आवाजाही को आसान बनाना और यात्रियों को सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी देना था। लेकिन कॉरिडोर खुलने के तुरंत बाद ही कई हिस्सों में भारी जाम की शिकायतें सामने आने लगीं।
विशेष रूप से सनडायल पार्क के पास उस स्थान पर समस्या ज्यादा सामने आई, जहां नया एलिवेटेड कॉरिडोर पुराने बारापुल्ला मार्ग में मिल रहा है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और PWD की संयुक्त जांच में इस हिस्से की सड़क संरचना, लेन क्षमता और कई दिशाओं से आने वाले वाहनों के एक साथ मिलने को प्रमुख चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने PWD से इस मर्जर प्वाइंट के डिजाइन में बदलाव की मांग भी की है।
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि कॉरिडोर को केवल एक अलग एलिवेटेड रोड के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसे DND फ्लाईवे, NH-24, रिंग रोड, सराय काले खां, ITO, RRTS, रेलवे और मेट्रो नेटवर्क के साथ जुड़े बड़े ट्रैफिक सिस्टम के हिस्से के रूप में समझना होगा। उन्होंने कहा कि नया मार्ग खुलने के बाद वाहनों का पैटर्न बदल गया है और इसका असर आसपास की सड़कों पर भी दिखाई दे रहा है।
PWD अब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर तत्काल राहत के लिए कई कदमों पर काम कर रहा है। इनमें उपलब्ध सड़क क्षेत्र का बेहतर इस्तेमाल, लेन चैनलाइजेशन और सराय काले खां, रिंग रोड तथा ITO के बीच वाहनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करना शामिल है। अधिकारियों का लक्ष्य यह है कि किसी एक मर्जर प्वाइंट पर अत्यधिक दबाव न बने और वाहन अलग-अलग मार्गों पर बेहतर तरीके से वितरित हो सकें।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी बारापुल्ला फेज-III पर भारी जाम को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने कहा है कि नोएडा लिंक रोड और मयूर विहार फेज-I से बारापुल्ला और रिंग रोड की ओर जाने वाले यातायात में धीमी गति और भारी दबाव देखा जा रहा है। यात्रियों को जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
ट्रैफिक प्रबंधन में Google Maps भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। अधिकारियों के मुताबिक नया कॉरिडोर खुलने के बाद वास्तविक यातायात पैटर्न में बड़ा बदलाव आया, लेकिन शुरुआत में यह स्थिति Google Maps पर सही तरीके से दिखाई नहीं दे रही थी। इसके कारण ऐप कई वाहन चालकों को उसी रास्ते से भेजता रहा जहां पहले से भारी जाम था। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस इस समस्या को ठीक कराने के लिए Google के साथ समन्वय कर रही है, ताकि वास्तविक समय की ट्रैफिक जानकारी और वैकल्पिक मार्ग अधिक सटीक तरीके से दिखाई दें।
सरकार रिंग रोड पर एक नया डेडिकेटेड U-टर्न बनाने की संभावना पर भी काम कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार गुरुद्वारे के सामने U-टर्न बनाया जा सकता है, जिससे वाहन सीधे पुराने बारापुल्ला अप्रोच रोड तक पहुंच सकेंगे। इससे विशेष रूप से सिद्धार्थ एक्सटेंशन के निवासियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। वे सीधे पुराने बारापुल्ला मार्ग का इस्तेमाल कर लाजपत नगर, INA और AIIMS की ओर जा सकेंगे और उन्हें अनावश्यक लंबा चक्कर या गलत दिशा में वाहन चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसके अलावा अतिरिक्त लेन उपलब्ध कराने और महत्वपूर्ण मर्जिंग प्वाइंट्स पर सड़क की मौजूदा चौड़ाई का बेहतर इस्तेमाल करने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस की ओर से दिए गए सुझावों पर काम शुरू कर दिया गया है और जहां छोटे इंजीनियरिंग बदलावों से राहत संभव है, वहां उन्हें प्राथमिकता से लागू किया जाएगा।
बारापुल्ला फेज-III परियोजना को 2014 में मंजूरी मिली थी और निर्माण अप्रैल 2015 में शुरू हुआ था। इसे शुरुआती तौर पर 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन परियोजना कई वर्षों तक देरी का सामना करती रही और आखिरकार सितंबर 2026 में इसका उद्घाटन हुआ। परियोजना की देरी, लागत में बढ़ोतरी और इससे जुड़े मध्यस्थता भुगतान को लेकर दिल्ली सरकार पहले भी सवाल उठा चुकी है।
PWD मंत्री ने कहा कि अब सबसे जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि नई सड़क व्यवस्था अपने उद्देश्य के मुताबिक काम करे और लोगों को वास्तव में बेहतर कनेक्टिविटी मिले। उनके मुताबिक केवल फ्लाईओवर बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उसके प्रवेश और निकास बिंदु आसपास के ट्रैफिक नेटवर्क के साथ किस तरह जुड़ते हैं।
बारापुल्ला फेज-III खुलने के बाद सामने आए जाम ने दिल्ली की सड़क परियोजनाओं में डिजाइन और भविष्य के यातायात दबाव को ध्यान में रखने की जरूरत को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल PWD और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस तत्काल समाधान के साथ-साथ लंबे समय के इंजीनियरिंग बदलावों पर भी काम कर रहे हैं।
सरकार की योजना U-टर्न, बेहतर लेन प्रबंधन, मर्जिंग प्वाइंट में बदलाव और Google Maps पर सही ट्रैफिक जानकारी उपलब्ध कराने जैसे उपायों से स्थिति सुधारने की है। अब नजर इस बात पर होगी कि इन बदलावों के बाद बारापुल्ला फेज-III पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को जाम से कितनी राहत मिलती है।
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