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नई दिल्ली। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों पर कथित हमले का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की ओर से दाखिल जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए। पुलिस ने अदालत में कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने संगठन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा नहीं किया है और जनहित याचिका के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया।यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत में दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि याचिका दिल्ली हाई कोर्ट के जनहित याचिका नियम, 2010 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
NSUI अध्यक्ष की याचिका पर पुलिस ने जताई आपत्ति
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका नियमों के नियम 9(f) और 9(g) का पालन नहीं किया है।उन्होंने तर्क दिया कि किसी संगठन से जुड़े व्यक्ति द्वारा जनहित याचिका दाखिल किए जाने पर संगठन की प्रकृति और उससे संबंधित आवश्यक जानकारी देना महत्वपूर्ण है।पुलिस की ओर से कहा गया कि विनोद जाखड़ कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लेकिन उन्होंने याचिका में संगठन से अपने संबंध का खुलासा नहीं किया।चेतन शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत हैसियत से अदालत आने का दावा करके संगठन से जुड़े आवश्यक तथ्यों को छिपा नहीं सकता।
याचिकाकर्ता के वकील ने दिया जवाब
पुलिस की आपत्तियों पर विनोद जाखड़ की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि याचिका व्यक्तिगत हैसियत से दाखिल की गई है।उन्होंने अदालत को बताया कि याचिका में उठाई गई मांगें सीमित हैं और उनका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार, विरोध-प्रदर्शन के दौरान कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था। ऐसे लोगों की पहचान करके उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।वकील ने कहा कि याचिका का उद्देश्य हिंसा की घटनाओं की जांच और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय कराना है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस को दिया तीन सप्ताह का समय
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को याचिका की स्वीकार्यता पर लिखित आपत्तियां दाखिल करने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस तीन सप्ताह के भीतर हलफनामे के माध्यम से अपनी प्रारंभिक आपत्तियां और अन्य संबंधित मुद्दे प्रस्तुत कर सकती है।इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका के समर्थन में दाखिल हलफनामे में संशोधन की अनुमति भी मांगी।अदालत ने इस चरण पर कथित हमलों की सत्यता या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन में मारपीट का आरोप
याचिका के अनुसार, 10 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर से जुड़ी सड़कों पर प्रदर्शन के लिए पहुंचे लोगों के साथ कथित मारपीट की गई थी।याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सादे कपड़ों में मौजूद कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों और राहगीरों को घेरकर उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की।याचिका में कहा गया है कि घटनाओं के वीडियो भी रिकॉर्ड किए गए थे। इनमें कुछ व्यक्तियों को पकड़ने, सड़क पर गिराने और मारपीट करने जैसी घटनाएं दिखाई देने का दावा किया गया है।इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
SIT जांच और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने अपनी याचिका में कथित हिंसा की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित करने की मांग की है।इसके अलावा घटनास्थल से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।याचिकाकर्ता का कहना है कि हमलावरों की पहचान करना और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ा मामला
यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ा है।प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग का विरोध कर रहे थे। कई छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की थी।चुनाव आयोग मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी करने के आरोपों को खारिज कर चुका है।फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका की स्वीकार्यता पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस के हलफनामे के बाद अदालत आगे की सुनवाई में याचिका से जुड़े मुद्दों पर विचार करेगी।
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