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Census 2027 में साइबर फ्रॉड पर रोक के लिए QR कोड आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम लागू

Kavita2
12 May 2026 4:36 PM IST
Census 2027 में साइबर फ्रॉड पर रोक के लिए QR कोड आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम लागू
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New Delhi नई दिल्ली :कली सरकारी अधिकारियों की पहचान कर लोगों को ठगने और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी में Census 2027 के लिए एक नया सुरक्षा कदम उठाया है। इसके तहत घर-घर जाकर गणना करने वाले एन्यूमरेटर और सुपरवाइज़र के लिए QR कोड आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया गया है।

यह व्यवस्था 16 मई से शुरू होने वाले दिल्ली नगर निगम क्षेत्रों में होने वाले घर-घर जनगणना कार्य को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि हाल के समय में फर्जी पहचान पत्र दिखाकर लोगों को गुमराह करने की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे इस तरह की डिजिटल सत्यापन प्रणाली की आवश्यकता महसूस हुई।

Office of the Registrar General and Census के अधिकारियों के अनुसार, इस कार्य के लिए तैनात सभी एन्यूमरेटर और सुपरवाइज़र (E&S) को आधिकारिक अपॉइंटमेंट लेटर और चार्ज ऑफिसर द्वारा जारी किया गया पहचान पत्र दिया जाएगा। इन दोनों दस्तावेजों में एक यूनिक QR कोड शामिल रहेगा, जिसे कोई भी नागरिक अपने मोबाइल फोन से स्कैन कर तुरंत सत्यापित कर सकेगा।

इस QR कोड सिस्टम के माध्यम से नागरिक यह जांच सकेंगे कि संबंधित अधिकारी वास्तव में सरकारी जनगणना कार्य के लिए अधिकृत है या नहीं। इससे फर्जी कॉल और घर-घर जाकर होने वाली ठगी की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल सुरक्षा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना भी है। डिजिटल वेरिफिकेशन के जरिए नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों के बीच विश्वास मजबूत होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना जैसे बड़े और संवेदनशील अभियान में इस तरह की तकनीक का उपयोग समय की जरूरत है। इससे न केवल डेटा संग्रह सुरक्षित होगा, बल्कि गलत पहचान के जरिए होने वाले अपराधों पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी जनगणना अधिकारी की पहचान सत्यापित किए बिना कोई व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। QR कोड स्कैनिंग के जरिए पुष्टि करना सुरक्षित प्रक्रिया का हिस्सा है।

कुल मिलाकर, Census 2027 के लिए लागू किया गया यह QR कोड आधारित वेरिफिकेशन सिस्टम साइबर फ्रॉड और फर्जी अधिकारियों की समस्या से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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