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नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद रविवार को नई दिल्ली से रवाना हो गए। भारत प्रवास के दौरान उन्होंने ब्रिक्स के विभिन्न सत्रों में भाग लिया, ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। दोनों नेताओं की मुलाकात में भारत-रूस संबंधों को और मजबूत बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
पुतिन की यह यात्रा वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते आर्थिक और कूटनीतिक समीकरणों के बीच हुई। ब्रिक्स सम्मेलन के मंच से उन्होंने आर्थिक प्रतिबंधों, राजनीतिक दबाव और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में कथित हस्तक्षेप को लेकर कड़ा रुख व्यक्त किया। ब्रिक्स बिजनेस फोरम के नेताओं के सत्र में पुतिन ने कहा कि आर्थिक और कूटनीतिक साधनों का इस्तेमाल किसी देश पर दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
VIDEO | Russian President Vladimir Putin departs from Delhi after participating in the BRICS Summit 2026.#BRICSUpdatesOnPTI #BRICS2026 #BRICS #BRICSSummit #BRICSIndia
— Press Trust of India (@PTI_News) September 13, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/W5vLeLwjvM
अपने संबोधन के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने रूस के खिलाफ लगाए गए करीब 30 हजार प्रतिबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में प्रतिबंधों के बावजूद रूस ने अपनी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को बनाए रखा है। पुतिन ने ऐसे प्रतिबंधों को आर्थिक प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए उनकी आलोचना की।
रूसी राष्ट्रपति ने जोर दिया कि देशों को स्वतंत्र रूप से अपनी विकास नीतियां निर्धारित करने और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप फैसले लेने का अधिकार होना चाहिए। किसी भी देश की संप्रभुता और उसके आंतरिक निर्णयों का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बुनियादी शर्त है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने और दबावमुक्त वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की दिशा में काम करने की जरूरत बताई।
ब्रिक्स मंच पर पुतिन के संबोधन में बहुपक्षीय सहयोग प्रमुख विषय रहा। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बीच उभरती अर्थव्यवस्थाओं का सहयोग विकास और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
भारत प्रवास के दौरान पुतिन ने ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी भी देखी। इस प्रदर्शनी में भारत की तकनीकी क्षमता, नवाचार और विकास से जुड़ी पहलों को प्रस्तुत किया गया। रूसी राष्ट्रपति ने प्रदर्शनी के माध्यम से दिखाए गए भारतीय नवाचारों की जानकारी ली। उनकी इस भागीदारी को भारत और रूस के बीच तकनीक तथा नवाचार के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं से भी जोड़कर देखा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता इस दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। दोनों नेताओं ने लंबे समय से चले आ रहे भारत-रूस संबंधों की समीक्षा की और उन्हें आगे बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। बातचीत में आपसी हितों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया।
भारत और रूस के बीच संबंध कई दशकों से रणनीतिक साझेदारी पर आधारित रहे हैं। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देश संवाद और सहयोग को जारी रखने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात को इसी निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और दीर्घकालिक बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पुतिन ने अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ भी मंच साझा किया। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, नवाचार और सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर विचार किया गया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन ने विभिन्न देशों को वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार रखने और साझा समाधान तलाशने का अवसर दिया।
रूसी राष्ट्रपति का आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर दिया गया बयान विशेष रूप से चर्चा में रहा। रूस पिछले कई वर्षों से पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। पुतिन ने सम्मेलन में इन प्रतिबंधों की संख्या करीब 30 हजार बताते हुए कहा कि आर्थिक उपायों का उपयोग राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में करना उचित नहीं है। उन्होंने ऐसी नीतियों को स्वतंत्र व्यापार और समान अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना के विपरीत बताया।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को कुछ सीमित शक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक संतुलित और बहुध्रुवीय बनाया जाना चाहिए। ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्थाओं और आपसी निवेश जैसे विषयों पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। पुतिन ने सदस्य देशों के बीच आर्थिक संपर्क बढ़ाने को भविष्य की जरूरत के रूप में प्रस्तुत किया।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम व्यापारिक समुदायों, सरकारों और नीति निर्माताओं के बीच संवाद का मंच है। पुतिन ने इस मंच का उपयोग करते हुए कहा कि आर्थिक सहयोग ऐसा होना चाहिए जिसमें सभी देशों को समान अवसर मिलें। उन्होंने प्रतिबंधों और एकतरफा आर्थिक कदमों की आलोचना करते हुए संवाद पर आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन किया।
भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मतभेदों के बावजूद भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय बातचीत लगातार जारी रही है। पुतिन और मोदी की बैठक ने यह संदेश दिया कि दोनों पक्ष आपसी सहयोग के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने तथा विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर संवाद कायम रखने के पक्ष में हैं।
दो दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने के बाद रविवार को पुतिन का भारत दौरा समाप्त हुआ। उनकी यात्रा में ब्रिक्स सत्रों में सहभागिता, ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का अवलोकन और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता प्रमुख गतिविधियां रहीं। सम्मेलन से पुतिन ने आर्थिक दबाव और एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ अपना रुख दोहराया तथा सदस्य देशों के बीच मजबूत सहयोग की वकालत की।





