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दिल्ली-एनसीआर
JNU लाइब्रेरी मामले में आरोपियों पर हो दंडात्मक कार्रवाई: प्रवीण
SHIDDHANT
23 Nov 2025 12:22 AM IST

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Delhi दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में फेस रिकग्निशन सिस्टम के तोड़े जाने के बाद बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। जेएनयू एबीवीपी के मंत्री प्रवीण ने कहा कि वामपंथी के लोग विश्वविद्यालय का माहौल खराब करना चाहते हैं, इसलिए सिस्टम को तोड़ दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन आरोपियों पर दंडात्मक कार्रवाई करे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जेएनयू मंत्री प्रवीण ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में वामपंथी के लोग घुसकर तोड़फोड़ कर रहे हैं। पहले तो विश्वविद्यालय ने बिना किसी सूचना के डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में फेस रिकग्निशन सिस्टम लगा दिया था, उसके बाद इसे वामपंथी के लोगों ने तोड़ दिया है। इसका हम लोग विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि फेस रिकग्निशन सिस्टम में तोड़फोड़ सही नहीं है। यह विश्वविद्यालय की पहचान, उसकी शैक्षणिक परंपरा और छात्रों के भविष्य पर हमला है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ऐसे किसी भी तत्व को इस कैंपस की शांतिपूर्ण शैक्षणिक संस्कृति को नुकसान पहुंचाने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मांग करता है कि लाइब्रेरी में छात्रों को बैठकर पढ़ने के लिए जगह कम है। इसे विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से तत्काल बढ़ाना चाहिए जिससे छात्र बैठकर सही से पढ़ सकें। साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने जितना महंगा फेस रिकग्निशन सिस्टम लगवाया था, अगर इसी राशि को छात्रों के लिए पढ़ाई का कमरा या सुविधा में विस्तार करने में लगा देता तो अच्छा होता।
प्रवीण ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार छात्रों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहा है और दूसरे कामों में लगा हुआ है। इसके चलते छात्रों को परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन चुप बैठा हुआ है। हम लोग यही मांग करते हैं कि जल्द से जल्द इस पर ध्यान दिया जाए और समस्याओं को दूर किया जाए। बता दें कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की डॉ. बीआर अंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम उखाड़ फेंकने के मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस संबंध में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी। एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार पूरे मामले की रिपोर्ट जेएनयू कुलगुरु और प्रॉक्टर को सौंप दी गई है।
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