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दिल्ली में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा, 30,000 से अधिक EV चार्जिंग स्टेशन का लक्ष्य: CM

Kavita2
6 July 2026 1:45 PM IST
दिल्ली में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा, 30,000 से अधिक EV चार्जिंग स्टेशन का लक्ष्य: CM
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Delhi दिल्ली: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को लेकर सरकार ने बड़ा रोडमैप पेश किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य क्लीन मोबिलिटी के लिए एंड-टू-एंड समाधान उपलब्ध कराना और राजधानी में प्रदूषण के स्तर को कम करना है। उन्होंने कहा कि यह नीति केवल वाहनों के बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परिवहन ढांचे को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक व्यापक योजना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक दिल्ली में 30 प्रतिशत से अधिक वाहन इलेक्ट्रिक हों। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि आने वाले समय में राजधानी में 30,000 से अधिक इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे EV उपयोगकर्ताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सरकार का मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार तेज होगी और लोग पेट्रोल व डीजल वाहनों से धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर शिफ्ट होंगे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल वाहनों के भविष्य को लेकर नीति में संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया है, ताकि संक्रमण चरण में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

दिल्ली सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि ई-रिक्शा के लिए अलग नीति तैयार की जा रही है, ताकि छोटे व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी इस बदलाव का लाभ मिल सके। ई-रिक्शा को शहरी परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए उनके संचालन, चार्जिंग और सुरक्षा मानकों को लेकर अलग दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस पूरी योजना में दिल्ली की बिजली आपूर्ति व्यवस्था की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बढ़ते EV लोड को देखते हुए पावर ग्रिड और सप्लाई सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है, ताकि भविष्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव न पड़े। इसके लिए ऊर्जा विभाग और संबंधित एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।

सरकार का दावा है कि EV नीति से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि यह दिल्ली को ग्रीन और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट हब बनाने में मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो राजधानी में वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है, जो लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

हालांकि, इस बदलाव को लेकर ऑटोमोबाइल सेक्टर में कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल वाहनों की मांग में संभावित गिरावट से पारंपरिक वाहन बाजार प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और उसके रखरखाव पर भी बड़ी निवेश लागत आएगी, जिसे संतुलित करना सरकार के लिए एक चुनौती हो सकता है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नीति को लागू कर रही है, ताकि किसी भी वर्ग पर अचानक दबाव न पड़े और संक्रमण धीरे-धीरे हो। उन्होंने यह भी कहा कि EV नीति केवल पर्यावरण सुधार का कदम नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और तकनीकी विकास से भी जुड़ी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि EV सेक्टर के विस्तार से नई नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे, खासकर चार्जिंग स्टेशन संचालन, बैटरी तकनीक, और मेंटेनेंस के क्षेत्र में। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार की यह नई EV नीति राजधानी को स्वच्छ, आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाने का प्रयास है। 30,000 से अधिक चार्जिंग स्टेशन और 2030 तक 30 प्रतिशत EV लक्ष्य के साथ यह योजना आने वाले वर्षों में शहर की ट्रांसपोर्ट प्रणाली को पूरी तरह बदल सकती है।

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