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New दिल्ली : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। विश्वविद्यालय की ओर से 9 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई। आदेश के अनुसार, यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद यह फैसला लिया गया है। विश्वविद्यालय की इंटरनल कमिटी (IC) ने जांच में सामने आई जानकारी और तथ्यों के आधार पर प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी सजा देने की सिफारिश की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए उनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया।इस फैसले के साथ ही प्रोफेसर अकोइजम की विश्वविद्यालय में सेवा समाप्त हो गई है। आधिकारिक आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से यूनिवर्सिटी की सेवा से बर्खास्त किया जाता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आरोपों की विस्तृत प्रकृति, कथित घटनाओं का समय और जांच के दौरान सामने आए विशिष्ट तथ्यों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।
9 अक्टूबर को जारी हुआ आधिकारिक आदेश
JNU की ओर से जारी आदेश में प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को बर्खास्त करने के फैसले की जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय ने अपने आदेश में कहा कि मामले में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया और सभी उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया।आदेश के मुताबिक, विश्वविद्यालय की इंटरनल कमिटी की रिपोर्ट इस फैसले का महत्वपूर्ण आधार रही। कमिटी ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच की थी और अपनी रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी सजा की सिफारिश की थी। विश्वविद्यालय ने रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद सेवा से बर्खास्तगी का फैसला किया।इस तरह विश्वविद्यालय की ओर से जारी आदेश में जांच प्रक्रिया, इंटरनल कमिटी की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार किए जाने का उल्लेख किया गया है। आदेश में बर्खास्तगी को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात भी कही गई है।
इंटरनल कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए विश्वविद्यालयों में आंतरिक समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। JNU के इस मामले में भी इंटरनल कमिटी ने जांच के दौरान प्राप्त जानकारी के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की और प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी सजा देने की सिफारिश की।विश्वविद्यालय के आदेश में कहा गया कि सभी उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने और इंटरनल कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन ने अपने आधिकारिक निर्णय में जांच रिपोर्ट को आधार बनाया है।हालांकि, उपलब्ध आदेश के विवरण में यह नहीं बताया गया है कि इंटरनल कमिटी ने किन विशिष्ट साक्ष्यों और बयानों के आधार पर अपनी सिफारिश दी थी। जांच में शामिल लोगों के बयान, शिकायत से जुड़े विस्तृत आरोप और कमिटी के निष्कर्षों का पूरा ब्योरा भी उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। इसलिए मामले के इन पहलुओं पर किसी अतिरिक्त निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
विश्वविद्यालय के आधिकारिक आदेश में प्रोफेसर की सेवा समाप्त करने के फैसले को स्पष्ट शब्दों में दर्ज किया गया है। आदेश के अनुसार, उचित प्रक्रिया का पालन करने, सभी उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने और इंटरनल कमिटी की रिपोर्ट को ध्यान में रखने के बाद प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यूनिवर्सिटी की सेवा से बर्खास्त करने की सजा दी जाती है।इस आदेश का अर्थ है कि विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई पूरी करते हुए सेवा समाप्त करने का फैसला लागू किया है। यह फैसला 9 अक्टूबर को जारी आदेश के माध्यम से सार्वजनिक हुआ।
विश्वविद्यालयों में शिकायतों की जांच की अहमियत
शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच करना महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी शिकायतों में संबंधित पक्षों के बयान, उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करके निर्णय लिया जाता है। आंतरिक समितियों की रिपोर्ट संस्थान की ओर से की जाने वाली कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।JNU के इस मामले में भी विश्वविद्यालय ने अपने आदेश में जांच प्रक्रिया और इंटरनल कमिटी की रिपोर्ट का उल्लेख किया है। प्रशासन की ओर से लिए गए फैसले से यह स्पष्ट होता है कि मामले में सेवा संबंधी कार्रवाई की गई है। हालांकि, जांच के विस्तृत निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं हैं।
बर्खास्तगी के बाद भी कई विवरण स्पष्ट होना बाकी
प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम की बर्खास्तगी को लेकर जारी आधिकारिक आदेश में कार्रवाई का आधार बताया गया है, लेकिन मामले से जुड़े सभी विवरण सामने नहीं आए हैं। उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि शिकायत कब दर्ज की गई थी, जांच कितने समय तक चली और इंटरनल कमिटी ने अपनी रिपोर्ट कब सौंपी।इसी तरह, प्रोफेसर की ओर से इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया दी गई है या नहीं, इसकी जानकारी भी उपलब्ध विवरण में नहीं है। उनके पास फैसले के खिलाफ अपील या अन्य कानूनी विकल्प हैं या नहीं, इस संबंध में भी जारी आदेश के उपलब्ध विवरण से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।फिलहाल, इस मामले में मुख्य तथ्य यही है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आदेश के जरिए प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की घोषणा की है। विश्वविद्यालय ने अपने फैसले के समर्थन में इंटरनल कमिटी की रिपोर्ट, उपलब्ध तथ्यों और उचित प्रक्रिया का उल्लेख किया है। मामले के अन्य पहलुओं की पुष्टि के लिए विश्वविद्यालय के विस्तृत आदेश और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
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