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वोटर लिस्ट विवाद पर प्रियंका गांधी का बड़ा हमला

Ratna Netam
5 Oct 2026 5:09 PM IST
वोटर लिस्ट विवाद पर प्रियंका गांधी का बड़ा हमला
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नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की घटनाएं संविधान और देश की चुनावी प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर लगातार विरोध दर्ज कराती रहेगी और इसे लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर विषय मानती है।
मीडिया से बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता अब यह समझने लगी है कि चुनावों में हेरफेर की जा रही है। हालांकि यह कांग्रेस का आरोप है और चुनाव आयोग इस तरह के आरोपों को पहले भी खारिज करते हुए कह चुका है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाता है।प्रियंका गांधी ने कहा, **"यह बिल्कुल साफ है कि नाम हटाने की ये घटनाएं हमारे संविधान और चुनावी प्रक्रिया के मूल्यों के खिलाफ हैं। यह बात एकदम स्पष्ट है। हम इसका विरोध कर रहे हैं। जनता अब समझ गई है कि चुनावों में हेरफेर की जा रही है, और हम अपना विरोध जारी रखेंगे।"**
कांग्रेस लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दलों ने इस विषय पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण भी मांगा है।विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे को लगातार संसद से लेकर सड़क तक उठा रहा है।
दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्वाचन कानूनों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है। आयोग का कहना है कि समय-समय पर मृत मतदाताओं, स्थानांतरित हो चुके लोगों और अन्य अपात्र प्रविष्टियों को हटाना तथा नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना उसकी नियमित जिम्मेदारी का हिस्सा है। आयोग पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप पूरी की जाती हैं।हाल के दिनों में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग को अधिक पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए ताकि मतदाताओं का विश्वास बना रहे। वहीं आयोग का कहना है कि सभी निर्णय कानूनी प्रावधानों के तहत लिए जाते हैं।
प्रियंका गांधी ने अपने बयान में संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। उनके अनुसार यदि किसी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित कारण के सूची से हटाया जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच भी उठाती रहेगी।कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने हाल के दिनों में मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर कई विरोध प्रदर्शन किए हैं। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखना देश के लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। इसी क्रम में कांग्रेस लगातार मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रही है।
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बताया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और विपक्ष बिना पर्याप्त आधार के आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। भाजपा का यह भी कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे कानून के अनुसार पूरा किया जाता है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे आगामी चुनावों के मद्देनजर प्रमुख राजनीतिक विषय बने रह सकते हैं। एक ओर विपक्ष इस विषय को लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों से जोड़कर देख रहा है, वहीं चुनाव आयोग और सत्तापक्ष निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए जाने की बात दोहरा रहे हैं।
प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी और विरोध जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष चुनाव और पारदर्शी मतदाता सूची बेहद जरूरी है। उनके अनुसार यदि चुनावी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास कमजोर होता है तो इसका असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ सकता है।फिलहाल मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून और नियमों के अनुरूप संचालित की जा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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