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18वीं लोकसभा के आठवें सत्र में दो पुराने विधेयकों पर होगी प्राथमिकता

नई दिल्ली: 18वीं लोकसभा के आठवें सत्र में विधायी कामकाज के दौरान सरकार दो महत्वपूर्ण लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। अधिकारियों के अनुसार, इस सत्र में ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ और ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025’ को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की योजना है।
संसदीय सूत्रों के मुताबिक, सरकार का फोकस लंबित विधायी कार्यों को पूरा करने पर रहेगा। इसी क्रम में इन दोनों विधेयकों को संसद के एजेंडे में शामिल किया गया है। इनमें से एक विधेयक विदेशी योगदान से जुड़े नियमों में संशोधन से संबंधित है, जबकि दूसरा उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और नए संस्थागत ढांचे के निर्माण से जुड़ा है।
अधिकारियों ने बताया कि ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ इस साल की शुरुआत में संसद में पेश किया गया था। यह विधेयक विदेशी योगदान (विनियमन) से जुड़े मौजूदा कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखता है। विदेशी स्रोतों से मिलने वाली आर्थिक सहायता और उसके उपयोग को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नियमों में समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं।
The five new bills that the government is likely to take up during the Eighth Session of Eighteenth Lok Sabha:
— ANI (@ANI) July 17, 2026
1. The Income-tax (Amendment) Bill, 2026. (To replace an Ordinance)
2. The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 (To replace an Ordinance)
3. The… pic.twitter.com/8zfyTdGGXR
यह विधेयक ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। प्रस्तावित संशोधनों के जरिए सरकार विदेशी योगदान से जुड़े प्रावधानों को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश कर सकती है।
वहीं, दूसरा महत्वपूर्ण विधेयक ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025’ है। यह विधेयक 15 दिसंबर, 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद इसे विस्तृत विचार-विमर्श के लिए संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया था। अब समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे संसद में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
My letter to the PM Modi, once again requesting him to convene an All Party Meeting to discuss the Government’s revise proposals on Delimitation etc.
— Mallikarjun Kharge (@kharge) July 16, 2026
All of March and April, 2026, I had been writing to Hon'ble Minister of Parliamentary Affairs requesting that the Union… pic.twitter.com/FidK3kDSek
‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025’ का उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए संस्थागत ढांचे को विकसित करना बताया जा रहा है। इस विधेयक के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में सुधार, अनुसंधान को बढ़ावा देने और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप संस्थानों के विकास पर जोर दिए जाने की संभावना है।
संसदीय मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आठवें सत्र में सरकार विधायी कामकाज को गति देने की कोशिश करेगी। लंबित विधेयकों को मंजूरी दिलाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, ताकि महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों को आगे बढ़ाया जा सके।
लोकसभा के इस सत्र में इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से सुझाव और आपत्तियां भी सामने आ सकती हैं। विपक्ष पहले भी कई विधेयकों को लेकर विस्तृत चर्चा और संसदीय जांच की मांग करता रहा है। ऐसे में दोनों विधेयकों पर बहस के दौरान राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है।
‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल’ को लेकर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की नजर भी संसद की कार्यवाही पर रहेगी। उनका मानना है कि उच्च शिक्षा में सुधार के लिए संस्थागत मजबूती, बेहतर शोध सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था जरूरी है। हालांकि, किसी भी नए ढांचे को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।
दूसरी ओर, विदेशी योगदान से संबंधित विधेयक पर सामाजिक संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं की भी नजर रहेगी। विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव का सीधा असर उनकी कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।
18वीं लोकसभा का आठवां सत्र ऐसे समय में हो रहा है, जब सरकार कई महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर काम कर रही है। संसद में विधायी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना सरकार के लिए अहम चुनौती होगी।
अधिकारियों के अनुसार, सत्र के दौरान सरकार अन्य आवश्यक विधायी कार्य भी पूरा कर सकती है, लेकिन फिलहाल दो पुराने विधेयकों को प्राथमिकता दी गई है। इन विधेयकों पर चर्चा और निर्णय से आने वाले समय में विदेशी योगदान नियमों और शिक्षा क्षेत्र की दिशा पर प्रभाव पड़ सकता है।
अब सभी की नजर संसद की कार्यवाही पर होगी कि इन दोनों विधेयकों पर किस तरह की चर्चा होती है और क्या इन्हें आठवें सत्र में मंजूरी मिल पाती है या नहीं।





