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दिल्ली-एनसीआर
नैचुरल फार्मिंग समिट में शामिल होंगे प्रधानमंत्री, पीएम-किसान की 21वीं किस्त भी होगी जारी
SHIDDHANT
18 Nov 2025 9:46 PM IST

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Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार दोपहर 19 नवंबर को तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित होने वाले दक्षिण भारत नैचुरल फार्मिंग समिट में हिस्सा लेंगे। यह समिट पूरे दक्षिण भारत के किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में नवाचार कर रहे विशेषज्ञों का एक महत्वपूर्ण मंच है।
कार्यक्रम का उद्देश्य सतत, पर्यावरण-अनुकूल और रसायन-मुक्त खेती को प्रोत्साहित करना है, जो आज के समय में कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आयोजित यह समिट उन किसानों के लिए खास महत्वपूर्ण है, जो कम लागत में अधिक उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने हेतु वैकल्पिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कार्यक्रम में किसानों के अनुभवों, अनुसंधान प्रस्तुतियों और नई तकनीकों पर विस्तार से चर्चा होगी। प्रधानमंत्री ने इसे “सतत और इको-फ्रेंडली कृषि के दिशा में महत्वपूर्ण कदम” बताया है।
इस समिट का दूसरा बड़ा आकर्षण प्रधानमंत्री द्वारा PM-KISAN योजना की 21वीं किस्त जारी करना है। इस किस्त के जारी होने से देश भर के 9 करोड़ से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। 21वीं किस्त जारी होने के साथ ही किसानों के बैंक खातों में हजारों करोड़ रुपये की सीधी सहायता राशि पहुंच जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, नकद सहायता और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं, जिससे किसानों की लागत कम होने के साथ उनकी आय में वृद्धि होती है। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में प्राकृतिक खेती मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री किसानों से संवाद करेंगे और प्राकृतिक खेती को लेकर सरकार की भविष्य की रणनीतियों पर भी प्रकाश डालेंगे। आयोजन स्थल पर प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जहां प्राकृतिक कृषि पद्धतियों, संसाधन संरक्षण तकनीकों और जैविक खेती के उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि नैचुरल फार्मिंग समिट न केवल किसानों में जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि सतत कृषि को राष्ट्रीय स्तर पर गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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