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डॉ. डी. वाई. पाटिल के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

Kavita2
4 Aug 2026 4:59 PM IST
डॉ. डी. वाई. पाटिल के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक
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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल और बिहार के पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाई. पाटिल के निधन की खबर से राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक जगत में शोक की लहर है। मंगलवार को उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना जताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. पाटिल ने समाज सेवा, परोपकार और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनका कार्य हमेशा याद किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक संदेश साझा करते हुए डॉ. डी. वाई. पाटिल को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि श्री डी. वाई. पाटिल जी समाज सेवा, विशेष रूप से परोपकार और शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा सक्रिय रहे। उन्होंने जरूरतमंद लोगों, खासकर गरीबों का जीवन बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. पाटिल के निधन से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार और उनके चाहने वालों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश का समापन "ओम शांति" के साथ किया।

डॉ. डी. वाई. पाटिल का नाम देश में शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में प्रमुख रूप से लिया जाता है। उन्होंने शिक्षा के विस्तार और उच्च शिक्षण संस्थानों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और विस्तार हुआ, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को शिक्षा के अवसर मिले।

सार्वजनिक जीवन में भी डॉ. पाटिल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वह पश्चिम बंगाल और बिहार के राज्यपाल पद पर रहे और संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। राज्यपाल के रूप में उन्होंने प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दों पर काम किया तथा राज्य सरकारों और जनता के बीच संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप भूमिका निभाई।

राज्यपाल पद संभालने से पहले और बाद में भी डॉ. पाटिल सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। शिक्षा को समाज के विकास का आधार मानते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में संस्थागत विकास पर विशेष ध्यान दिया। उनके द्वारा स्थापित और संचालित शैक्षणिक संस्थानों ने देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा के प्रसार में योगदान दिया।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा विभिन्न राजनीतिक नेताओं, शिक्षाविदों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी डॉ. पाटिल के निधन पर शोक व्यक्त किया। लोगों ने उन्हें एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में याद किया, जिन्होंने शिक्षा और समाज सेवा को अपने सार्वजनिक जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया।

डॉ. पाटिल के समर्थकों और सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर वर्गों तक शिक्षा और विकास के अवसर पहुंचाने पर जोर दिया। उनका मानना था कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को आगे बढ़ाने की शक्ति रखती है।

उनके निधन को शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन में किए गए कार्यों और संस्थागत योगदान को आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दी गई श्रद्धांजलि में भी डॉ. पाटिल के इन्हीं योगदानों का उल्लेख किया गया। मोदी ने उनके परोपकारी कार्यों और समाज के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा दूसरों की भलाई के लिए काम किया।

डॉ. डी. वाई. पाटिल का जीवन शिक्षा, समाज सेवा और सार्वजनिक जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। उनके निधन से देश ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया, जिसने कई दशकों तक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाई। उनके परिवार, मित्रों और अनुयायियों के प्रति देशभर से संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

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