दिल्ली-एनसीआर

सौरव दास समेत तीन लोगों की एहतियातन गिरफ्तारी

nidhi
14 Oct 2026 6:25 AM IST
सौरव दास समेत तीन लोगों की एहतियातन गिरफ्तारी
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एहतियाती गिरफ्तारी
दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल हेड रत्ना सिंह ने आज दिल्ली पुलिस द्वारा संगठन के 3 नेताओं सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को गिरफ्तार किए जाने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि तीनों को आज कोर्ट में पेश किए जाने के बाद जेल भेजा जा सकता है। रत्ना ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस एक खास 'रूलबुक' के हिसाब से काम कर रही है, जो ऊपर से मिले आदेशों पर आधारित है। हालांकि, दिल्ली पुलिस द्वारा अभी तक सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की कोई आधिकारी जानकारी नहीं दी गई है।
बता दें कि, जंतर-मंतर को प्रदर्शन लिस्ट से हटाए जाने के बावजूद CJP नेता सौरव दास, आशुतोष रांका कल दीवार फांदकर जंतर-मंतर पर पहुंच गए थे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। दिल्ली पुलिस ने उन पर जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
रत्ना सिंह ने अब से कुछ देर पहले अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया, ''दिल्ली पुलिस ने आज जंतर-मंतर मामले में सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में गिरफ्तार कर लिया। इन पर बिना इजाजत घुसने, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोप हैं। उन्हें सुबह SCM कोर्ट में पेश किया जाएगा। उन्हें तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत (JC) में भेजे जाने की संभावना है। देर रात तक उन्हें अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। उन्हें सुबह 3 बजे एक प्राइवेट वैन में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन लाया गया। इन गैर-कानूनी कार्रवाइयों के बावजूद, उनके हौसले बुलंद हैं।''
दिल्ली पुलिस मनमानी कर रही है : रत्ना सिंह
रत्ना सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम देख रहे हैं कि दिल्ली पुलिस एक खास 'रूलबुक' से चल रही है, जो ऊपर से मिले आदेशों पर आधारित है। इस रूलबुक को मानने के लिए वे कानून को भी दरकिनार कर देते हैं। हमने देखा कि कैसे जो लोग सिर्फ तिरंगा फहराने जंतर-मंतर गए थे, उन्हें हिरासत में ले लिया गया। लगभग 24 घंटे बीत चुके हैं, फिर भी उन्हें न तो किसी वकील से मिलने दिया गया और न ही शुरू में उन्हें उनकी हिरासत या गिरफ्तारी की वजह बताई गई। हालांकि, बाद में गिरफ्तारी की वजह बताई गई, लेकिन मुद्दा यह है कि मौजूदा माहौल में दिल्ली पुलिस मनमानी कर रही है। उन्होंने न सिर्फ आम वॉलंटियर्स को, बल्कि सुबह से वहां मौजूद वकीलों को भी मिलने नहीं दिया। मौके पर मौजूद एसएचओ और दूसरे अधिकारी यही कहते रहे कि वे ऊपर से मिले आदेशों पर काम कर रहे हैं। तो फिर, दिल्ली पुलिस को ये आदेश कौन दे रहा है, ऐसे आदेश जो खुद कानून से भी ऊपर हैं?
'लोगों को लंबे समय तक कस्टडी में रखा जा रहा'
CJP में लीगल अफेयर्स की हेड ने कहा कि दूसरी तरफ, हम देखते हैं कि अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं, शहर में घूमते हुए लोगों पर हमले कर रहे हैं, फिर भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को रोका जा रहा है। तय प्रदर्शन स्थलों को 'डी-नोटिफाई' किया जा रहा है और इन सार्वजनिक जगहों पर जाने वाले लोगों को बिना किसी वजह के हिरासत में लिया जा रहा है और लंबे समय तक कस्टडी में रखा जा रहा है। इससे दिल्ली के मौजूदा माहौल का साफ पता चलता है, जहां मनमानी कार्रवाई आम बात है और सरकार अपनी मर्जी से काम कर रही है। दिल्ली पुलिस का इस्तेमाल कठपुतली की तरह किया जा रहा है और वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ बहुत सख्ती से पेश आ रहे हैं, जो सही नहीं है।
रत्ना ने कहा कि इसके अलावा, हाल की गिरफ्तारियां गैर-कानूनी हैं। कोई जानकारी नहीं दी गई और आरोपों में बताए गए अपराधों में से कोई भी असल में हुआ ही नहीं। मेरा मानना ​​है कि यह लोगों को फंसाने की एक चाल है। उन्हें डराने का एक तरीका है ताकि वे प्रदर्शन न करें, लेकिन वे गलतफहमी में हैं। वे ऐसी धाराएं लगाकर या इस तरह से हिरासत में लेकर प्रदर्शनकारियों को रोक नहीं सकते।
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