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'वोट चोरी' पर राष्ट्रपति ने मांगे सबूत, राहुल गांधी का दावा
Kiran
10 Oct 2026 8:44 AM IST

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Delhi शुक्रवार को INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को रोकने और पिछले दो सालों में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की गई। गठबंधन ने बड़े पैमाने पर चुनावी गड़बड़ी और गलत तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में 10 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। इसके बाद राहुल ने कहा कि वह "हैरान और स्तब्ध" थे कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के "वोट चोरी" के आरोप को खारिज नहीं किया, बल्कि इसके लिए सबूत मांगे। हालांकि, राष्ट्रपति भवन ने राहुल के दावों को सख्ती से खारिज करते हुए कहा, "विपक्ष के नेता (LoP) के दावे गलत हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस मामले में राष्ट्रपति को विवाद में घसीटा जा रहा है।" बैठक के बाद राहुल ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि राष्ट्रपति इस आरोप को सिरे से खारिज कर देंगी। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद थी कि राष्ट्रपति कहेंगी कि भारत में चुनाव की व्यवस्था स्वतंत्र और निष्पक्ष है। मुझे हैरानी हुई कि राष्ट्रपति ने हमारी बात मान ली।"
बीजेपी ने भी राहुल की बातों को खारिज कर दिया और पार्टी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने उन्हें "अजीब" बताया। अपने ज्ञापन में विपक्ष ने 2023 के उस कानून को रद्द करने की भी मांग की जो CEC और चुनाव आयुक्तों को सुरक्षा (इम्युनिटी) देता है। साथ ही, उन्होंने उन जगहों पर पिछले दो सालों में हुए विधानसभा चुनावों को पलटने की मांग की, जहां उनके दावे के मुताबिक "वोट चोरी" के पक्के सबूत मिले थे। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी व्यवस्था को कमजोर किया है और करोड़ों भारतीयों को उनके वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित किया है। इसमें चुनाव आयोग पर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां न निभाने का आरोप लगाया गया और कहा गया कि CEC ने चुनावी गड़बड़ियों को छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को गुमराह किया।
विपक्ष ने मतदाता सूची से हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम फिर से जोड़ने की भी मांग की। उन्होंने राष्ट्रपति से दखल देने का आग्रह करते हुए कहा कि जब समाधान के बाकी सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तो उनका पद ही आखिरी संवैधानिक सुरक्षा कवच होता है। मुर्मू से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में खड़गे, राहुल, TMC प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला, NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले, CPI(M) के जनरल सेक्रेटरी MA बेबी, CPI के जनरल सेक्रेटरी D राजा, RJD के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा, समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय और विदुथलाई चिरुथिगल काची के प्रेसिडेंट थोल थिरुमावलवन शामिल थे।
राष्ट्रपति से मिलने से पहले, विपक्षी सांसदों ने चुनाव में कथित गड़बड़ियों और कुमार को हटाने की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में बैठक की। राहुल ने 1947 में आज़ादी की पूर्व संध्या पर सेंट्रल हॉल में दिए गए जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक भाषण का ज़िक्र किया और आज़ादी के बारे में उनके शब्दों और उससे भारत व दुनिया में जगी उम्मीदों को याद किया।
जब प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ा, तो कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी KC वेणुगोपाल, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, कर्नाटक के CM DK शिवकुमार, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और TMC सांसद महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेताओं और सांसदों ने विजय चौक पर धरना दिया, जहाँ पुलिस ने बैरिकेड्स लगा रखे थे और सिर्फ़ प्रतिनिधिमंडल को ही आगे जाने की इजाज़त थी। संसद से राष्ट्रपति भवन तक के मार्च में वे सांसद भी शामिल हुए जो उस 10-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं थे, जिसे राष्ट्रपति से मिलने का समय मिला था। INDIA गठबंधन 12 अक्टूबर को एक बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहा है।
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