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गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश
Ratna Netam
1 Oct 2026 8:38 PM IST

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नई दिल्ली। महात्मा गांधी की 157वीं जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके शांति और अहिंसा के संदेश को आज के वैश्विक हालात में पहले से भी अधिक प्रासंगिक बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष का माहौल बना हुआ है, जिसका असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता। ऐसे समय में महात्मा गांधी के विचार पूरी मानवता को शांति, संवाद और सह-अस्तित्व का रास्ता दिखाते हैं।
गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सभी नागरिकों की ओर से वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी 157वीं जयंती पर सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी का जीवन और उनके आदर्श केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सम्मान के साथ देखे जाते हैं।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि मौजूदा समय में दुनिया के कई हिस्से युद्ध, हिंसा और राजनीतिक संघर्ष से प्रभावित हैं। ऐसे हालात में शांति और अहिंसा पर आधारित गांधीजी की सोच मानवता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गांधीजी के सिद्धांत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि आज की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए भी मार्गदर्शन दे सकते हैं।
महात्मा गांधी ने अपने पूरे जीवन में सत्य, अहिंसा, समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को महत्व दिया। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसक विरोध को प्रमुख हथियार बनाया। उनके नेतृत्व में हुए आंदोलनों ने स्वतंत्रता संग्राम को जन आंदोलन का रूप दिया और समाज के अलग-अलग वर्गों को एक साथ जोड़ा।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि गांधीजी के जीवन और विचारों का प्रभाव भारत की सीमाओं से बहुत आगे तक गया है। दुनिया के कई नेताओं और सामाजिक आंदोलनों ने उनके अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों से प्रेरणा ली है। यही कारण है कि गांधीजी की जयंती को केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में शांति और अहिंसा के संदेश से जोड़कर देखा जाता है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मान्यता दी है। इस दिन दुनिया भर में शांति, संवाद और अहिंसक समाधान के महत्व पर चर्चा की जाती है। गांधीजी की विचारधारा ने वैश्विक स्तर पर नागरिक अधिकार आंदोलनों और सामाजिक न्याय की लड़ाइयों को प्रभावित किया है।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश में विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में संवेदनशीलता, समावेश और सभी नागरिकों को विकास का समान लाभ सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति ने इसे गांधीजी के ‘सर्वोदय’ के विचार से जोड़ा, जिसका मूल भाव सभी के कल्याण और उत्थान से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि देश का विकास तभी सार्थक होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचे। गांधीजी भी ऐसी व्यवस्था की कल्पना करते थे जिसमें कमजोर, वंचित और जरूरतमंद लोगों को विकास की मुख्यधारा में जगह मिले। राष्ट्रपति ने नागरिकों से इसी सोच को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
महात्मा गांधी ने स्वावलंबन को भी देश के विकास के लिए जरूरी माना था। चरखा और स्वदेशी आंदोलन के जरिए उन्होंने स्थानीय उत्पादन और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। आज आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी गांधीजी के इसी विचार से जोड़कर देखा जाता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि गांधीजी का जीवन केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था। उन्होंने सामाजिक बुराइयों, अस्पृश्यता, असमानता और भेदभाव के खिलाफ भी लगातार आवाज उठाई। स्वच्छता, श्रम की गरिमा, आत्मनिर्भरता और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।
गांधीजी के विचारों में नैतिकता और व्यक्तिगत आचरण का भी बड़ा महत्व था। उनका मानना था कि समाज में बदलाव केवल कानून या सरकारी व्यवस्था से नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार और जीवन मूल्यों में बदलाव से भी आता है। राष्ट्रपति ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए नागरिकों से नैतिक आचरण और सक्रिय भागीदारी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। समाज के हर वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए।
महात्मा गांधी की 157वीं जयंती 2 अक्टूबर को पूरे देश में मनाई जाएगी। दिल्ली स्थित राजघाट सहित देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकारी संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी गांधीजी के विचारों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
हर साल गांधी जयंती देश को सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, समानता और सेवा जैसे मूल्यों की याद दिलाती है। इस बार राष्ट्रपति का संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष जारी हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति तथा संवाद के रास्ते तलाश रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने गांधी जयंती के अवसर पर देशवासियों से संकल्प लेने की अपील की कि वे अपने आचरण और सक्रिय भागीदारी के जरिए एक सशक्त, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने कहा कि गांधीजी के शांति, अहिंसा और सर्वकल्याण के आदर्श आज भी उतने ही उपयोगी हैं और भविष्य में भी मानवता का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
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