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सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर राष्ट्रपति मुर्मू और अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर शनिवार, 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली स्थित पटेल चौक पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। सभी नेताओं ने भारत के लौह पुरुष को नमन करते हुए देश की एकता, अखंडता और राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में सांसद बांसुरी स्वराज सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
देशभर में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस मौके पर विभिन्न राज्यों में एकता दौड़, शपथ ग्रहण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अर्पित की पुष्पांजलि
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार सुबह नई दिल्ली के पटेल चौक पहुंचकर सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
उन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण और राष्ट्रीय एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका का सम्मान करते हुए उन्हें नमन किया।
राष्ट्रपति की श्रद्धांजलि के साथ राष्ट्रीय राजधानी में सरदार पटेल की जयंती से जुड़े प्रमुख कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।
इस अवसर पर उपस्थित नेताओं ने भी सरदार पटेल के योगदान को याद किया।
सरदार पटेल का जीवन देश के प्रति समर्पण, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का उदाहरण माना जाता है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आजाद भारत के निर्माण तक उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और अमित शाह ने किया नमन
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भी पटेल चौक पहुंचकर सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के पहले गृहमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान का स्मरण किया।
अमित शाह ने सरदार पटेल के जीवन को युवाओं के लिए त्याग और देशभक्ति की प्रेरणा बताया।
उन्होंने सरदार पटेल की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प को स्वतंत्र भारत के एकीकरण का महत्वपूर्ण आधार बताया।
गृह मंत्री ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया और देशवासियों से सरदार पटेल के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री भी रहे मौजूद
सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए।
दोनों ने पटेल चौक स्थित प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर सरदार पटेल को नमन किया।
इस अवसर पर दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति भी रही।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित इस कार्यक्रम ने सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान और राष्ट्रीय एकता के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया।
सरदार पटेल का जीवन भारत की विविधताओं को एक सूत्र में बांधने और देश की अखंडता को मजबूत बनाने की प्रेरणा देता है।
रियासतों के एकीकरण में रही ऐतिहासिक भूमिका
सरदार वल्लभभाई पटेल को स्वतंत्र भारत के राजनीतिक एकीकरण का प्रमुख शिल्पकार माना जाता है।
15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के समय देश के सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण चुनौती विभिन्न रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने की थी।
स्वतंत्रता के समय भारतीय उपमहाद्वीप में सैकड़ों रियासतें मौजूद थीं। इनके एकीकरण के लिए राजनीतिक समझदारी, संवाद और दृढ़ नेतृत्व की आवश्यकता थी।
सरदार पटेल ने तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों और सहयोगियों के साथ मिलकर इस कठिन कार्य को आगे बढ़ाया।
उनकी भूमिका के कारण अधिकांश रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण संभव हुआ।
इसी ऐतिहासिक योगदान के चलते उन्हें 'भारत का लौह पुरुष' कहा जाता है।
स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता थे सरदार पटेल
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था।
वे स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने देश की आजादी के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गुजरात के खेड़ा और बारडोली किसान आंदोलनों में उनके नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
विशेष रूप से बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद उन्हें 'सरदार' की उपाधि मिली।
पटेल ने किसानों के अधिकारों, जनसंगठन और ब्रिटिश शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आजादी के बाद वे भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री बने।
राष्ट्रीय एकता दिवस का क्या है महत्व?
सरदार पटेल की जयंती पर प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।
भारत सरकार ने वर्ष 2014 से इस दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी।
इस आयोजन का उद्देश्य देशवासियों को भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर देशभर में विभिन्न सरकारी संस्थानों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इनमें राष्ट्रीय एकता की शपथ, जागरूकता अभियान और 'रन फॉर यूनिटी' जैसे आयोजन प्रमुख होते हैं।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बताया जाता है कि देश की विविधता उसकी शक्ति है और सभी नागरिकों का सहयोग राष्ट्र की एकता को मजबूत बनाता है।
अमित शाह ने युवाओं को दिया विशेष संदेश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरदार पटेल की जयंती पर युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का जीवन देशभक्ति और त्याग की प्रेरणा देता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर गृह मंत्री ने नशामुक्त भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया।
उन्होंने देशवासियों से 31 दिसंबर 2029 तक भारत को पूर्ण रूप से नशामुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में सहयोग करने का आह्वान किया।
इस दौरान उन्होंने समाज और विशेष रूप से युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी किया सरदार पटेल को याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता के बाद देश की रियासतों को एकजुट करने और भारत के राजनीतिक एकीकरण में पटेल के योगदान का स्मरण किया।
सरदार पटेल की स्मृति में गुजरात के एकता नगर में स्थापित 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' आज राष्ट्रीय एकता का प्रमुख प्रतीक है।
182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल है और सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को समर्पित है।
देशभर में गूंजा राष्ट्रीय एकता का संदेश
सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम और एकता दौड़ आयोजित की गई।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया।
दिल्ली के पटेल चौक पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री और अन्य नेताओं की उपस्थिति ने इस अवसर के महत्व को रेखांकित किया।
सरदार पटेल की जयंती केवल उनके योगदान को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि एकजुट और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प दोहराने का दिन भी है।





