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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का तीन देशों का यूरोपीय दौरा सफल

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रविवार को अपने तीन देशों के यूरोपीय दौरे को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद स्वदेश लौट आईं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और यूरोपीय देशों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करना, सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना और द्विपक्षीय साझेदारी को आगे बढ़ाना था। राष्ट्रपति की इस यात्रा को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने यूरोपीय दौरे के दौरान मोल्दोवा, नॉर्थ मैसेडोनिया और अन्य देशों की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकात की और आपसी हितों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। यात्रा के दौरान भारत ने व्यापार, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
दौरे के पहले चरण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 जुलाई को मोल्दोवा की यात्रा की। यह किसी भी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की मोल्दोवा की पहली आधिकारिक यात्रा थी। इस ऐतिहासिक दौरे को दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा गया।
मोल्दोवा यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकें कीं और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने आपसी हित के कई क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर सहमति जताई।
भारत और मोल्दोवा ने विशेष रूप से कृषि, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सेवा, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों का मानना है कि इन क्षेत्रों में साझेदारी से आर्थिक विकास को गति मिल सकती है और आपसी संबंध और मजबूत हो सकते हैं।
राष्ट्रपति की मोल्दोवा यात्रा के दौरान भारत ने यह संदेश दिया कि वह छोटे यूरोपीय देशों के साथ भी समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर संबंध विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं और इस यात्रा से उन्हें नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई गई।
इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने 21 से 22 जुलाई तक नॉर्थ मैसेडोनिया का दौरा किया। वह दक्षिण-पूर्वी यूरोप के इस देश की यात्रा करने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बनीं। इस दौरे ने भारत और नॉर्थ मैसेडोनिया के बीच राजनयिक संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।
नॉर्थ मैसेडोनिया यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने वहां के नेतृत्व के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने व्यापार, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
राष्ट्रपति मुर्मू की इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भारत की वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना भी था। यूरोप के विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंध लगातार विस्तार कर रहे हैं और ऐसे दौरों के माध्यम से राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई गति मिलती है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति की यात्राएं भारत की विदेश नीति में बढ़ती सक्रियता को दर्शाती हैं। भारत दुनिया के विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और साझा हितों के मुद्दों पर मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने दौरे के दौरान भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों की भूमिका की सराहना की और कहा कि वे भारत और संबंधित देशों के बीच मजबूत पुल का काम करते हैं।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति की यह यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। मोल्दोवा और नॉर्थ मैसेडोनिया जैसे देशों के साथ उच्च स्तरीय संपर्क बढ़ने से भारत को यूरोप के विभिन्न हिस्सों में अपनी साझेदारी मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इस दौरे के दौरान जिन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है, उनमें कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें दोनों देशों के लिए विकास और निवेश की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह यूरोपीय दौरा भारत की कूटनीतिक पहुंच को विस्तार देने वाला माना जा रहा है। पहली बार किसी भारतीय राष्ट्रपति का मोल्दोवा और नॉर्थ मैसेडोनिया जाना दोनों देशों के साथ संबंधों के महत्व को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति की तीन देशों की यात्रा ने भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूती देने और नए सहयोग के अवसर तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आने वाले समय में इन समझौतों और चर्चाओं के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।





