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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतर राज्य परिषद आदेश में किया संशोधन

Ratna Netam
21 Sept 2026 9:46 PM IST
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतर राज्य परिषद आदेश में किया संशोधन
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने **‘अंतर-राज्य परिषद आदेश, 1990’** में संशोधन किया है। इस संशोधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश (UT) में कोई विशेष संवैधानिक या कानूनी प्रावधान लागू हों, तो वहां के राज्यपाल और उप-राज्यपाल अंतर-राज्य परिषद की बैठकों में भाग ले सकें।गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, यह बदलाव संविधान के **अनुच्छेद 263** के तहत राष्ट्रपति को मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए किया गया है। संशोधित आदेश को **‘अंतर-राज्य परिषद (संशोधन) आदेश, 2026’** नाम दिया गया है और यह जारी होने के साथ ही प्रभावी हो गया है।
अंतर-राज्य परिषद की भूमिका
अंतर-राज्य परिषद भारत में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए बनाई गई एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है।इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत मुद्दों, प्रशासनिक मामलों और आपसी सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए एक मंच उपलब्ध कराना है।संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को ऐसी परिषद बनाने का अधिकार दिया गया है, जो राज्यों के बीच विवादों और साझा हितों से जुड़े मामलों पर विचार कर सके।
संशोधन से क्या बदलेगा?
नए संशोधन के बाद उन परिस्थितियों में राज्यपाल और उप-राज्यपालों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी, जब किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में कोई विशेष संवैधानिक या कानूनी व्यवस्था लागू हो।इससे परिषद की बैठकों में संबंधित क्षेत्रों के संवैधानिक प्रमुखों की भूमिका को शामिल करने का प्रावधान मजबूत होगा।
गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना
गृह मंत्रालय ने 9 सितंबर को इस संशोधन से संबंधित अधिसूचना जारी की थी।अधिसूचना में बताया गया कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए अंतर-राज्य परिषद आदेश, 1990 में बदलाव किया है।इसके बाद संशोधित आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
केंद्र-राज्य संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कदम
भारत जैसे संघीय ढांचे वाले देश में केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।अंतर-राज्य परिषद जैसे मंचों के जरिए राज्यों की चिंताओं, प्रशासनिक चुनौतियों और साझा मुद्दों पर चर्चा की जाती है।नया संशोधन इस व्यवस्था में संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों की भागीदारी को लेकर स्पष्टता लाने का प्रयास करता है।
राज्यपाल और उप-राज्यपाल की भूमिका
राज्यपाल राज्यों में राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते हैं, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में उप-राज्यपाल प्रशासनिक भूमिका में होते हैं।कई केंद्र शासित प्रदेशों में उप-राज्यपाल प्रशासन के प्रमुख पद पर होते हैं और केंद्र सरकार के साथ समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।ऐसे में विशेष परिस्थितियों में उनकी भागीदारी से संबंधित मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन किया गया है।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत बदलाव
राष्ट्रपति द्वारा किया गया यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत जारी किया गया है।यह अनुच्छेद केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए परिषदों के गठन से संबंधित है।संशोधित आदेश इसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत अंतर-राज्य परिषद की कार्यप्रणाली में बदलाव करता है।
प्रशासनिक समन्वय को मिलेगा बढ़ावा
केंद्र सरकार का उद्देश्य संघीय व्यवस्था में बेहतर संवाद और समन्वय स्थापित करना रहा है।अंतर-राज्य परिषद की बैठकों में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है। ऐसे में संबंधित संवैधानिक अधिकारियों की भागीदारी से चर्चा को अधिक व्यापक बनाने में मदद मिल सकती है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर असर
इस संशोधन का प्रभाव उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर पड़ सकता है जहां विशेष संवैधानिक या कानूनी परिस्थितियां मौजूद हों।अब ऐसी परिस्थितियों में संबंधित राज्यपाल या उप-राज्यपाल परिषद की बैठकों का हिस्सा बन सकेंगे।
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