- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- हर गांव तक स्वच्छ पानी...
दिल्ली-एनसीआर
हर गांव तक स्वच्छ पानी पहुंचाने की तैयारी, केंद्र ने बुलाई अहम बैठक
Ratna Netam
22 Oct 2026 7:55 PM IST

x
नई दिल्ली। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने गुरुवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ चौथे राष्ट्रीय वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन किया। बैठक में जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 और 16वें वित्त आयोग के अनुदानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य गांवों में जल स्रोतों का संरक्षण, जल सुरक्षा सुनिश्चित करना और ग्राम पंचायतों की भागीदारी से पेयजल सुविधाओं को लंबे समय तक सुचारू बनाए रखना है।यह सम्मेलन 1 और 2 सितंबर 2026 को आयोजित विभागीय जल शिखर सम्मेलन के बाद जारी विषयगत परामर्श बैठकों की श्रृंखला का हिस्सा था। इसमें विभिन्न राज्यों के सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग और पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
बैठक में पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक केके मीणा ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक पेयजल बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। अब जल जीवन मिशन 2.0 का मुख्य उद्देश्य इन सुविधाओं का नियमित संचालन, रखरखाव और दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित करना है।उन्होंने कहा कि केवल पाइपलाइन, पानी की टंकी और नल कनेक्शन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। ग्रामीण परिवारों को लगातार सुरक्षित पेयजल मिलना भी जरूरी है।इसके लिए जल स्रोतों का संरक्षण, नियमित रखरखाव और स्थानीय स्तर पर प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था विकसित करनी होगी।
ग्राम पंचायतों की बढ़ेगी जिम्मेदारी
सम्मेलन में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था के प्रबंधन में ग्राम पंचायतों की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया।अधिकारियों ने कहा कि पंचायतों को जल आपूर्ति से जुड़ी वार्षिक योजनाएं तैयार करने, वित्तीय संसाधनों का आकलन करने और पेयजल सुविधाओं की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।ग्राम पंचायतों को पाइपलाइन की मरम्मत, पानी की गुणवत्ता की जांच, पंपों के रखरखाव और बिजली खर्च जैसी आवश्यकताओं के लिए योजनाबद्ध तरीके से बजट तैयार करने पर जोर दिया गया।इसके अलावा स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्भरण को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई।
16वें वित्त आयोग से मिलेगा वित्तीय सहयोग
सम्मेलन में 16वें वित्त आयोग के अनुदानों के प्रभावी उपयोग पर विशेष चर्चा हुई।अधिकारियों के अनुसार, वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 4.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अनुदान की सिफारिश की है। इनमें लगभग 1.74 लाख करोड़ रुपये जल प्रबंधन और स्वच्छता संबंधी गतिविधियों के लिए निर्धारित हैं।केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा कि इन संसाधनों का उपयोग मौजूदा पेयजल ढांचे के संचालन और रखरखाव को मजबूत करने में प्राथमिकता से किया जाए।इसमें पानी की गुणवत्ता की निगरानी, खराब पाइपलाइनों की मरम्मत और जल आपूर्ति व्यवस्था की निरंतरता सुनिश्चित करना शामिल है।
कर्नाटक, ओडिशा और मध्य प्रदेश ने साझा किए अनुभव
वर्चुअल सम्मेलन के दौरान कर्नाटक, ओडिशा और मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने ग्रामीण पेयजल प्रबंधन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।कर्नाटक ने डिजिटल तकनीक, जल बजट और जल आपूर्ति परिसंपत्तियों की निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी।ओडिशा ने स्थानीय स्तर पर तकनीकी कर्मचारियों के प्रशिक्षण, डिजिटल निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की पहल प्रस्तुत की।मध्य प्रदेश ने वर्ष 2026 में अधिसूचित संचालन एवं रखरखाव नियमों तथा ग्राम पंचायतों द्वारा विभिन्न वित्तीय स्रोतों के उपयोग की व्यवस्था का उल्लेख किया।
डिजिटल तकनीक से होगी निगरानी
सम्मेलन में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के प्रतिनिधियों ने ई-ग्रामस्वराज पोर्टल के माध्यम से पेयजल परियोजनाओं की निगरानी और वित्तीय रिपोर्टिंग की जानकारी दी।अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की सहायता से योजनाओं की प्रगति, खर्च, परिसंपत्तियों और रखरखाव संबंधी जानकारियों को व्यवस्थित किया जा सकता है।इससे ग्राम पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पंचायत प्रतिनिधियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
बैठक में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों, पंचायत सचिवों और तकनीकी कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया।अधिकारियों ने राज्यों से कहा कि पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव से संबंधित मार्गदर्शिकाएं स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएं।इसके अलावा राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान सहित अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से पंचायत स्तर पर क्षमता विकास की आवश्यकता बताई गई।राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोन ने कहा कि वित्त आयोग के अनुदानों का प्रभावी उपयोग करने के लिए राज्यों को लंबित प्रक्रियाएं पूरी करनी चाहिए।
नवंबर में होंगी दो क्षेत्रीय बैठकें
सम्मेलन में बताया गया कि नवंबर 2026 में दो क्षेत्रीय बैठकें आयोजित करने की योजना है। इनमें राज्यों की तैयारियों, योजनाओं के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की जाएगी।केंद्र सरकार का उद्देश्य जल जीवन मिशन के तहत तैयार पेयजल सुविधाओं को लंबे समय तक कार्यशील बनाए रखना है।बैठक के अंत में केंद्र और राज्यों ने ग्राम पंचायत आधारित योजना, वित्तीय स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।सरकार का मानना है कि प्रभावी रखरखाव और जल स्रोतों के संरक्षण से ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ तथा नियमित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
Next Story





