दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली-NCR में बढ़ा प्रदूषण, ग्रैप-1 लागू होते ही बसों पर सख्त पाबंदी

Kavita2
22 Oct 2026 9:42 AM IST
दिल्ली-NCR में बढ़ा प्रदूषण, ग्रैप-1 लागू होते ही बसों पर सख्त पाबंदी
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नई दिल्ली। दशहरे के अगले दिन बुधवार, 21 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर की हवा एक बार फिर खराब श्रेणी में पहुंच गई। राजधानी में प्रदूषण बढ़ने के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 245 दर्ज किया गया। हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इसके तहत वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण, सड़कों की सफाई, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, उत्तराखंड सहित कई राज्यों से आने वाली पुरानी डीजल बसों के संचालन पर भी प्रतिबंध लागू हो गया है।

दशहरे के अगले दिन खराब हुई दिल्ली की हवा

दिल्ली में बुधवार को वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दोपहर दो बजे राजधानी का औसत एक्यूआई 244 दर्ज किया गया, जो शाम चार बजे बढ़कर 245 हो गया।

एक दिन पहले मंगलवार को दिल्ली का एक्यूआई 179 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है। महज 24 घंटे में प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी तक पहुंचने से पर्यावरण संबंधी चिंताएं बढ़ गईं।

रिपोर्ट के अनुसार, दशहरे के अगले दिन बीते पांच वर्षों में दिल्ली की हवा इतनी प्रदूषित नहीं रही थी। इससे पहले वर्ष 2021 में दशहरे के अगले दिन एक्यूआई 284 दर्ज हुआ था।

हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के पीछे प्रतिकूल मौसम, आतिशबाजी से निकले धुएं और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

उत्तराखंड समेत आठ राज्यों की बसों पर प्रतिबंध

ग्रैप-1 लागू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में अंतरराज्यीय और इंटरसिटी बसों के संचालन के नियम सख्त कर दिए गए हैं।

नए प्रावधानों के तहत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से आने वाली ऐसी बसों का संचालन प्रतिबंधित किया गया है, जो निर्धारित उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करती हैं।

हालांकि, इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाली डीजल बसों को संचालन की अनुमति दी गई है।

इस फैसले का असर उन परिवहन सेवाओं पर पड़ सकता है, जिनके बेड़े में पुरानी डीजल बसें शामिल हैं। संबंधित राज्यों के परिवहन निगमों और निजी बस संचालकों को निर्धारित मानकों के अनुसार वाहनों का संचालन सुनिश्चित करना होगा।

पहले ग्रैप-2 में लगती थी पाबंदी

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने सितंबर 2026 में ग्रैप के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे।

इससे पहले अंतरराज्यीय बसों पर संबंधित प्रतिबंध ग्रैप के दूसरे चरण में लागू किए जाते थे। लेकिन संशोधित व्यवस्था में बसों और डीजल जनरेटर से जुड़े कुछ प्रतिबंधों को पहले चरण में शामिल कर दिया गया है।

इसका उद्देश्य प्रदूषण के गंभीर स्तर तक पहुंचने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती चरण में ही उत्सर्जन कम करना है।

संशोधित नियमों को आयोग ने 28 सितंबर की बैठक में मंजूरी दी थी और 29 सितंबर को इसकी घोषणा की गई थी।

दिल्ली मेट्रो के फेरे बढ़ाने के निर्देश

प्रदूषण नियंत्रण के साथ यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन का बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

ग्रैप-1 के तहत दिल्ली मेट्रो और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने तथा अतिरिक्त सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन की बेहतर व्यवस्था होने से अधिक लोग निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और बसों का इस्तेमाल कर सकेंगे।

इसके अलावा भीड़भाड़ वाले समय के अतिरिक्त अन्य समय में यात्रा को प्रोत्साहित करने के लिए किराये में अंतर रखने जैसे उपायों पर भी जोर दिया गया है। हालांकि, मेट्रो के कितने अतिरिक्त फेरे संचालित होंगे, इसकी स्पष्ट संख्या उपलब्ध निर्देशों में नहीं बताई गई है।

निर्माण स्थलों और सड़कों पर धूल नियंत्रण

ग्रैप-1 में केवल वाहनों पर ही नहीं, बल्कि धूल और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर भी सख्ती बरती जाएगी।

निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्यों के दौरान धूल रोकने के उपाय लागू करने होंगे। संबंधित एजेंसियों को सड़कों की नियमित सफाई, मशीनों से सफाई और जरूरत के अनुसार पानी के छिड़काव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

खुले स्थानों पर कूड़ा-कचरा और अन्य अपशिष्ट जलाने पर मौजूदा प्रतिबंधों को सख्ती से लागू किया जाएगा।

निर्माण सामग्री और मलबे के अनुचित भंडारण तथा परिवहन से होने वाले प्रदूषण पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लागू प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर बढ़ेगी निगरानी

दिल्ली-एनसीआर में यातायात पुलिस और परिवहन विभाग को प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित आयु सीमा पूरी कर चुके पेट्रोल और डीजल वाहनों पर लागू प्रतिबंधों को भी सख्ती से लागू किया जाएगा।

इसके अलावा अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों की जांच की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर वाहनों को जब्त करने या जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई हो सकती है।

दिल्ली से होकर गुजरने वाले गैर-गंतव्य मालवाहक वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों की ओर भेजने की व्यवस्था भी लागू रहेगी।

होटल और रेस्टोरेंट में कोयले के इस्तेमाल पर सख्ती

प्रदूषण नियंत्रण के लिए होटल, रेस्टोरेंट और खुले भोजनालयों में कोयले तथा लकड़ी से चलने वाले तंदूरों पर मौजूदा प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

ऐसे प्रतिष्ठानों को बिजली, गैस या अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित उपकरण इस्तेमाल करने होंगे।

डीजल जनरेटर के नियमित बिजली आपूर्ति के विकल्प के रूप में इस्तेमाल पर भी संशोधित नियमों के अनुसार निगरानी बढ़ाई जाएगी। इसका उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों पर निर्भरता कम करना है।

प्रदूषण बढ़ा तो लागू हो सकते हैं और कड़े प्रतिबंध

ग्रैप का पहला चरण सामान्यतः उस स्थिति में लागू किया जाता है, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 201 से 300 के बीच यानी खराब श्रेणी में पहुंच जाता है।

यदि प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है तो वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग स्थिति की समीक्षा करके अगले चरण के प्रतिबंध लागू कर सकता है।

फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में ग्रैप-1 लागू है। अधिकारियों को प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार निगरानी रखने और निर्धारित उपायों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में हवा की गति कम होने और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण प्रदूषण लंबे समय तक वातावरण में बना रह सकता है। ऐसे में नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने, अनावश्यक निजी वाहन यात्रा कम करने और खुले में कचरा न जलाने की अपील की जा रही है।

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