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सोनिया गांधी वोटर लिस्ट मामले पर सियासत तेज कोर्ट के आदेश के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर बोला हमला

Kavita2
22 Sept 2026 5:06 PM IST
सोनिया गांधी वोटर लिस्ट मामले पर सियासत तेज कोर्ट के आदेश के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर बोला हमला
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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के नाम को भारतीय नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप से जुड़े मामले में दिल्ली की अदालत के नए आदेश के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे “लोकतंत्र के चोर” कहा। यह भाजपा की राजनीतिक टिप्पणी है; अदालत ने कांग्रेस या सोनिया गांधी को दोषी नहीं ठहराया है। अदालत ने मजिस्ट्रेट के पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली की अदालत ने सोमवार को उस मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द किया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच कराने की मांग वाली शिकायत पर आगे बढ़ने से इनकार किया गया था। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि मजिस्ट्रेट का आदेश पर्याप्त कारणों वाला नहीं था और शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है या नहीं, इस मूल सवाल पर उचित विचार नहीं किया गया।

क्या है पूरा मामला

यह विवाद एक शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल था, जबकि उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। शिकायतकर्ता अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने इसी आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की है। ये फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप हैं और इनकी सत्यता पर अदालत ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

शिकायत में यह सवाल भी उठाया गया है कि नागरिकता मिलने से पहले उनका नाम मतदाता सूची में किस आधार पर दर्ज हुआ और किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। याचिका में कथित जालसाजी से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं।

मजिस्ट्रेट के आदेश को अदालत ने किया रद्द

मामले में पहले मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी। सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट ने इस पर जांच का निर्देश देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सत्र अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल की।

सोमवार को इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने पुराने आदेश को पर्याप्त कारणों से रहित यानी “नॉन-स्पीकिंग” माना और मामले को नए सिरे से विचार के लिए मजिस्ट्रेट अदालत के पास वापस भेज दिया।

अदालत ने उठाया प्रक्रिया का सवाल

विशेष न्यायाधीश ने कहा कि मजिस्ट्रेट को सबसे पहले यह देखना चाहिए था कि शिकायत से किसी संज्ञेय अपराध का प्रथमदृष्टया खुलासा होता है या नहीं। अदालत के अनुसार मजिस्ट्रेट इस मुख्य पहलू पर पर्याप्त रूप से विचार करने के बजाय नागरिकता से जुड़े दूसरे पहलुओं की ओर चले गए।

अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। संबंधित पुलिस अधिकारी की दलील नहीं सुनी गई और पुलिस स्टेशन से स्टेटस रिपोर्ट भी नहीं मंगाई गई थी।

नए सिरे से होगी सुनवाई

अदालत के आदेश का अर्थ तत्काल एफआईआर दर्ज होना या आरोप साबित होना नहीं है। मामला मजिस्ट्रेट अदालत को वापस भेजा गया है, जहां शिकायतकर्ता और दिल्ली पुलिस की बात सुनने के बाद कारणों सहित नया आदेश पारित किया जाएगा।

मामले की अगली कार्यवाही 29 सितंबर को निर्धारित है। मजिस्ट्रेट अदालत को अब शिकायत और उपलब्ध सामग्री पर नए सिरे से विचार करना होगा।

कोर्ट के आदेश के बाद भाजपा का हमला

अदालत का आदेश सामने आने के बाद भाजपा ने मंगलवार को इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर “लोकतंत्र की चोरी” का आरोप लगाया और सोनिया गांधी के 1980 की मतदाता सूची में कथित रूप से नाम होने को लेकर सवाल उठाए।

भाजपा ने इस मामले को कांग्रेस की ओर से उठाए जाते रहे “वोट चोरी” के आरोपों से भी जोड़ा। यह भाजपा का राजनीतिक तर्क है और अदालत के आदेश में कांग्रेस को “लोकतंत्र का चोर” नहीं कहा गया है।

कांग्रेस पहले आरोपों को बता चुकी है गलत

इस विवाद पर कांग्रेस की ओर से भी पहले प्रतिक्रिया सामने आ चुकी है। दिसंबर 2025 में अदालत द्वारा संबंधित याचिका पर नोटिस जारी किए जाने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरोपों को “पूरी तरह गलत” बताया था और आरोपों के समर्थन में सबूत होने पर सवाल उठाया था।

इस तरह मामले में शिकायतकर्ता और भाजपा एक तरफ मतदाता सूची में नाम दर्ज होने की परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कांग्रेस पक्ष आरोपों को खारिज करता रहा है।

अभी आरोपों पर फैसला नहीं

दिल्ली की अदालत के आदेश को सोनिया गांधी के खिलाफ आरोपों की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सत्र अदालत ने फिलहाल मजिस्ट्रेट के आदेश में कानूनी और प्रक्रियागत कमियां पाई हैं और शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया है।

अब मजिस्ट्रेट अदालत यह तय करेगी कि उपलब्ध शिकायत और सामग्री के आधार पर आगे कौन-सी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

29 सितंबर की सुनवाई पर नजर

सोनिया गांधी से जुड़ा यह मामला अदालत के नए आदेश के बाद एक बार फिर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। भाजपा इसे कांग्रेस पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि आरोपों की न्यायिक जांच अभी निर्णायक चरण में नहीं पहुंची है।

29 सितंबर को होने वाली अगली कार्यवाही इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि मजिस्ट्रेट अदालत को मामले पर नए सिरे से विचार करना है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि शिकायत पर आगे जांच, एफआईआर या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया को लेकर क्या आदेश दिया जाता है।

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