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सीमा मुद्दे पर सियासत तेज रिजिजू ने विपक्ष को दी नसीहत

Ratna Netam
19 Aug 2026 7:15 PM IST
सीमा मुद्दे पर सियासत तेज रिजिजू ने विपक्ष को दी नसीहत
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दिल्ली :भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सीमाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बिना तथ्यों के बयान नहीं दिए जाने चाहिए, क्योंकि इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षाबलों के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
किरेन रिजिजू ने कहा कि सीमा से जुड़े मामलों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से उन दावों पर आपत्ति जताई, जिनमें कहा जा रहा था कि चीन भारतीय क्षेत्र में बड़ी दूरी तक अंदर घुस आया है। रिजिजू ने ऐसे दावों को गलत बताते हुए कहा कि इस तरह की बातें फैलाने से देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं और जवानों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की सीमाएं बेहद संवेदनशील हैं और कई क्षेत्रों में सीमा निर्धारण से जुड़े पुराने मुद्दे मौजूद हैं। खासतौर पर अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में कई जगह वास्तविक सीमा रेखा को लेकर अलग-अलग दावे रहे हैं। ऐसे मामलों को समझने के लिए तथ्यों और जमीनी स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
सीमा विवाद पर रिजिजू का विपक्ष पर हमला
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और लोग सोशल मीडिया पर ऐसे दावे करते हैं, जिनसे भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात भारतीय सेना और सुरक्षा बल देश की रक्षा के लिए लगातार काम कर रहे हैं, इसलिए उनके काम पर सवाल उठाने से पहले पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए।
रिजिजू ने कहा कि सेना और सुरक्षा बलों का सम्मान करना हर भारतीय की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन देश की सुरक्षा और सेना के मनोबल से जुड़े मुद्दों पर सभी को जिम्मेदारी से बयान देना चाहिए।
अरुणाचल सीमा पर क्या है स्थिति?
भारत और चीन के बीच हजारों किलोमीटर लंबी सीमा है। कई हिस्सों में सीमा का स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं।
अरुणाचल प्रदेश में भी कुछ क्षेत्रों को लेकर चीन अपने दावे करता रहा है, जबकि भारत लगातार इन दावों को खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है।
रिजिजू ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सीमावर्ती इलाकों में सड़क, पुल और अन्य सुविधाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर चर्चा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति धीमी रही, लेकिन अब स्थिति बदली है। सरकार ने सीमा क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी पहुंचाने पर जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क नेटवर्क और बेहतर सुविधाएं न केवल स्थानीय लोगों के लिए जरूरी हैं, बल्कि सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भारत और चीन दोनों ही देशों ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी दिखाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सैन्य जरूरतों को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में बेहतर सुविधाएं जरूरी हैं।
सेना को राजनीति से दूर रखने की अपील
रिजिजू ने कहा कि सेना देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती है और उसे राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। उन्होंने नेताओं से अपील की कि वे सेना और सुरक्षा मामलों पर बयान देते समय सावधानी बरतें।
उन्होंने कहा कि जवान कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं। ऐसे में उनके प्रयासों पर सवाल उठाने वाले बयान देने से पहले सभी पहलुओं को समझना चाहिए।
विपक्ष का अलग नजरिया
वहीं, विपक्षी दल सीमा सुरक्षा और चीन के मुद्दे पर सरकार से लगातार सवाल पूछते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को सीमा की वास्तविक स्थिति को लेकर देश के सामने पूरी जानकारी रखनी चाहिए।
विपक्षी नेताओं का तर्क है कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना उनका अधिकार है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि सीमा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी बढ़ी बहस
सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया पर भी लगातार चर्चा होती रहती है। कई बार अधूरी जानकारी या पुराने वीडियो वायरल होने से भ्रम की स्थिति बन जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है। गलत जानकारी न केवल भ्रम फैलाती है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गलत धारणा भी बना सकती है।
सरकार का जोर सुरक्षा मजबूत करने पर
केंद्र सरकार का कहना है कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें सेना की क्षमता बढ़ाना, आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना और सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्य शामिल हैं।
किरेन रिजिजू के बयान के बाद एक बार फिर सीमा सुरक्षा और राजनीतिक जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है।
फिलहाल भारत-चीन सीमा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच यह सहमति बनी हुई है कि सीमा से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है।
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