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'दिमागी नक्सल' बयान पर सियासत तेज, किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ और ‘अर्बन नक्सल’ वाले बयान के बाद देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी की विचारधारा में बदलाव आ रहा है और वह माओवादी तथा नक्सलवादी सोच के करीब जा रही है।
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अब माओवादी और नक्सलवादी पार्टी बनती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश के विकास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। हालांकि, विपक्ष की ओर से इन आरोपों का विरोध किया जा रहा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में देश में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि देश के जंगलों में सशस्त्र नक्सलवाद को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है, लेकिन शहरों में कुछ लोग अलग-अलग रूपों में सक्रिय हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि देश को ऐसे तत्वों से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे ऐसे लोगों की पहचान करें और उन्हें अलग-थलग करें।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक दलों के बीच बहस शुरू हो गई। भाजपा नेताओं ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ चेतावनी बताया। वहीं, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार असहमति रखने वालों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि नक्सलवाद केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ लोग विचारों और संस्थानों के माध्यम से भी देश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सभी प्रयासों के खिलाफ मजबूती से काम करेगी।
रिजिजू के बयान के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा पर हमला बोला। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों की आलोचना करना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक विरोधियों को बदनाम करने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘अर्बन नक्सल’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्द पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हैं। सत्ता पक्ष जहां इन्हें देश विरोधी विचारधारा से जोड़ता है, वहीं विपक्ष इसे असहमति की आवाज दबाने का तरीका बताता है।
नक्सलवाद भारत में लंबे समय से आंतरिक सुरक्षा की चुनौती रहा है। सरकारों की ओर से समय-समय पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान और विकास योजनाएं चलाई जाती रही हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में हिंसक नक्सली गतिविधियों में कमी आई है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री का बयान उन लोगों के खिलाफ था जो देश की एकता और सुरक्षा के खिलाफ काम करते हैं। वहीं, विपक्ष का कहना है कि सरकार को हर आलोचक को एक ही नजर से नहीं देखना चाहिए।
कांग्रेस पर हमला करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि देश की राजनीति में विचारधाराओं का अंतर हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सभी दलों को एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कई बार ऐसे मुद्दों पर सरकार का विरोध करती है, जिससे देश विरोधी ताकतों को फायदा मिलता है।
वहीं कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी नीतियों पर सवाल उठाने वालों को निशाना बनाने के बजाय जवाब देना चाहिए।
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस और तेज होने की संभावना है।





