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Education मंत्री के इस्तीफे पर सियासत तेज, कांग्रेस ने गिनाई युवाओं की जीत

नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने इसे देश के युवाओं और जेन जी (Gen Z) की बड़ी जीत बताया है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह सफलता उन करोड़ों छात्रों और युवाओं के संघर्ष का परिणाम है, जिन्होंने बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर आवाज उठाई।
कांग्रेस ने अपने पोस्ट में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के युवाओं और भारत की जेन जी की जीत है। पार्टी ने दावा किया कि यह उन लाखों-करोड़ों छात्रों के संघर्ष की जीत है, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अपने अधिकारों के लिए लगातार आवाज बुलंद की।
कांग्रेस ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि युवाओं की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और लगातार उठ रहे सवालों के बीच सरकार को जवाब देना पड़ा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह फैसला सरकार के रवैये में बदलाव को दर्शाता है।
पार्टी की ओर से जारी पोस्ट में लिखा गया कि युवाओं ने अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जो संघर्ष किया, उसका असर अब दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से विभिन्न छात्र संगठन और अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों की मांग थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस ने कहा कि देश का युवा अपने भविष्य को लेकर सजग है और वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार चाहता है। पार्टी ने दावा किया कि छात्रों की एकजुटता और लगातार संघर्ष के कारण यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना।
वहीं, कांग्रेस के इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। पार्टी ने इस मौके को युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए इस्तेमाल किया और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे देश के करोड़ों युवाओं के जीवन को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए और परीक्षा प्रणाली में भरोसा कायम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर जहां विपक्ष इसे छात्रों के आंदोलन और जनदबाव का परिणाम बता रहा है, वहीं आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल अब भी केंद्र में बने हुए हैं।





