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परिसीमन पर सियासी घमासान खड़गे के पत्र पर रिजिजू का जवाब
Ratna Netam
19 Oct 2026 8:14 PM IST

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नई दिल्ली। देश में परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने परिसीमन संबंधी प्रस्तावों पर विपक्षी दलों से बातचीत और सहमति बनाने के लिए कई बार प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों पर विपक्ष का सहयोग चाहती है और इस संबंध में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ चर्चा भी की जा चुकी है।
खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा था चौथा पत्र
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चौथा पत्र लिखकर परिसीमन संबंधी प्रस्तावों पर तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।खड़गे ने कहा था कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक विषय पर किसी भी प्रस्ताव को अंतिम रूप देने और संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों से विस्तृत विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।उन्होंने सरकार से आग्रह किया था कि राजनीतिक दलों को प्रस्तावों का अध्ययन करने, आपसी चर्चा करने और अपनी राय रखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।कांग्रेस अध्यक्ष ने आशंका जताई थी कि सरकार व्यापक सहमति के बिना महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक को संसद से पारित कराने का प्रयास कर सकती है।
किरेन रिजिजू ने गिनाईं बातचीत की तारीखें
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने खड़गे को भेजे अपने जवाब में बताया कि सरकार ने कांग्रेस से समर्थन और सहयोग प्राप्त करने के लिए पहले भी कई प्रयास किए हैं।रिजिजू ने कहा कि उन्होंने 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल 2026 को मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखे थे।उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय पर खड़गे से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की गई थी। इसके अलावा संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात कर सरकार का पक्ष रखा गया था।रिजिजू के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य विपक्ष को प्रस्तावों पर चर्चा में शामिल करना और व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना था।
कई विपक्षी दलों से बातचीत का दावा
संसदीय कार्य मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि केंद्र सरकार केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रीय और विपक्षी दलों के साथ भी बातचीत कर चुकी है।उन्होंने दावा किया कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), समाजवादी पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना (UBT), एआईएमआईएम और बीजू जनता दल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया है।रिजिजू ने कहा कि सरकार की मंशा विपक्ष को साथ लेकर आगे बढ़ने की है। उन्होंने कांग्रेस से संसदीय चर्चा में रचनात्मक भूमिका निभाने और सहयोग देने की अपील की।
संसद के सत्रावसान को लेकर भी विवाद
परिसीमन विधेयक के साथ संसद के मानसून सत्र के औपचारिक सत्रावसान का मुद्दा भी चर्चा में है।मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने पत्र में कहा था कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन 16 अक्टूबर तक 64 दिन बीत जाने के बावजूद दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ।खड़गे ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था।इसके जवाब में किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद के किसी सत्र के स्थगित होने के बाद उसके औपचारिक सत्रावसान के लिए संविधान में कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है।
परिसीमन को लेकर क्यों बढ़ी राजनीतिक बहस?
परिसीमन वह प्रक्रिया है, जिसके तहत जनसंख्या और अन्य निर्धारित मानदंडों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की समीक्षा की जाती है।इस प्रक्रिया का लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का कहना है कि निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े बड़े बदलाव करने से पहले सभी राजनीतिक दलों, राज्यों और संबंधित पक्षों की राय लेना जरूरी है।विपक्ष का तर्क है कि परिसीमन जैसे व्यापक प्रभाव वाले निर्णय पर पर्याप्त संसदीय चर्चा और पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए।
सरकार ने विपक्ष से मांगा सहयोग
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने अपने पत्र में कहा कि सरकार महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर विपक्ष के साथ चर्चा करने को तैयार है।उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह संवैधानिक मुद्दों पर सहयोगात्मक रुख अपनाए और संसद में सार्थक विचार-विमर्श को प्राथमिकता दे।वहीं, कांग्रेस का कहना है कि केवल अलग-अलग नेताओं से बातचीत पर्याप्त नहीं है। पार्टी चाहती है कि प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले औपचारिक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाए।फिलहाल परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनने का सवाल बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग पर क्या निर्णय लेती है और प्रस्तावित विधेयक पर राजनीतिक दलों के बीच किस तरह चर्चा आगे बढ़ती है।
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