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1984 नरसंहार पर फिर सियासी घमासान, रेखा गुप्ता ने कांग्रेस को घेरा

Ratna Netam
7 Nov 2026 8:22 PM IST
1984 नरसंहार पर फिर सियासी घमासान, रेखा गुप्ता ने कांग्रेस को घेरा
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नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने उस दौरान निर्दोष सिख नागरिकों की हत्या को बेहद भयावह त्रासदी बताते हुए कहा कि हजारों परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और कई परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान 1984 की हिंसा के पीड़ित परिवारों से मुलाकात और भाजपा की ओर से आयोजित विरोध कार्यक्रमों के बीच सामने आया है।शनिवार, 7 नवंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। यह मुलाकात हरदीप सिंह पुरी के दिल्ली स्थित आवास पर हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने पीड़ितों से बातचीत की, उनके अनुभव सुने और उनका हालचाल जाना। सामने आए दृश्यों में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एक पीड़ित महिला को सांत्वना देती नजर आईं।इस मुलाकात का उद्देश्य दशकों पहले हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करना और उनकी समस्याओं को सुनना था। इस दौरान 1984 की घटनाओं को याद करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही की मांग भी उठाई गई।
पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर जाना दर्द
हरदीप सिंह पुरी और रेखा गुप्ता ने पीड़ित परिवारों के सदस्यों से बातचीत कर उनके अनुभवों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान पीड़ितों ने चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न्याय और पुनर्वास से जुड़ी अपनी परेशानियों को सामने रखा।मुख्यमंत्री ने पीड़ितों की बातें सुनीं और उन्हें सांत्वना दी। इस मुलाकात के जरिए भाजपा नेताओं ने यह संदेश देने की कोशिश की कि 1984 की हिंसा में प्रभावित परिवारों की पीड़ा और उनकी न्याय की मांग को भुलाया नहीं जाना चाहिए।केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इस घटना को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा को सामान्य दंगा कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, दिल्ली में हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में घरों तथा संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।
रेखा गुप्ता ने 1984 की हिंसा को बताया लोकतंत्र पर हमला
इससे पहले 1 नवंबर को पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर में आयोजित भाजपा की पदयात्रा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1984 की हिंसा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि आज संविधान और लोकतंत्र की बात करने वालों को यह भी बताना चाहिए कि नवंबर 1984 में निर्दोष सिख परिवारों के साथ जो हुआ, क्या वह लोकतंत्र की हत्या नहीं थी?मुख्यमंत्री ने कहा कि उस भयावह दौर में हजारों सिख परिवारों ने अपने परिजनों को खोया था। कई माताएं, बहनें और बच्चे आज भी उस समय की घटनाओं की दर्दनाक यादों के साथ जीवन बिता रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है।रेखा गुप्ता ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 1984 की घटनाओं की जिम्मेदारी से राजनीतिक नेतृत्व बच नहीं सकता। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने और उनसे माफी मांगने की जरूरत बताई।
अपने परिवार का अनुभव भी किया साझा
हरि नगर में आयोजित पदयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने परिवार से जुड़ा एक अनुभव भी साझा किया था। उन्होंने बताया कि 1984 की हिंसा के दौरान उनके माता-पिता के घर में एक सिख पड़ोसी ने शरण ली थी।मुख्यमंत्री के अनुसार, उस कठिन समय में कई सिख परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकाने तलाशने पड़े थे। कुछ लोगों को अपनी पहचान छिपाने तक की मजबूरी का सामना करना पड़ा।उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को याद रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी समुदाय के साथ इस तरह की हिंसा न हो। मुख्यमंत्री ने पीड़ितों के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि न्याय केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के सम्मान और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।
हरदीप सिंह पुरी ने भी कांग्रेस से मांगा जवाब
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1984 की हिंसा को सुनियोजित नरसंहार बताते हुए कहा कि उस समय सिखों के घरों और गुरुद्वारों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2,733 लोगों की हत्या हुई थी, जबकि देशभर में मृतकों की संख्या 3,325 बताई गई थी।पुरी ने कहा कि हिंसा के दौरान अनेक परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया और उनकी संपत्तियों को जला दिया गया। उन्होंने कांग्रेस से इस घटना के लिए जवाबदेही स्वीकार करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की।उन्होंने यह भी कहा कि जब तक हिंसा के अंतिम दोषी को कानून के तहत सजा नहीं मिलती, तब तक पीड़ित समुदाय की न्याय की मांग पूरी नहीं मानी जा सकती।
हरि नगर से तिलक नगर तक निकाली गई थी पदयात्रा
1984 के सिख विरोधी दंगों की 42वीं बरसी के अवसर पर 1 नवंबर को भाजपा ने पश्चिमी दिल्ली में विरोध पदयात्रा निकाली थी। यह मार्च हरि नगर बस डिपो से शुरू होकर तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक पहुंचा था।इसमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और आशीष सूद समेत कई नेता शामिल हुए थे। बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।प्रदर्शनकारियों ने पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की मांग उठाई और कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए माफी मांगने की अपील की। भाजपा नेताओं ने उस दिन आयोजित विपक्षी गठबंधन की राजनीतिक रैली की तारीख पर भी सवाल उठाए थे।
42 साल बाद भी न्याय की प्रतीक्षा
वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा हुई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की हत्या की गई, घरों और दुकानों को जलाया गया तथा कई परिवारों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।घटना के बाद विभिन्न जांच आयोगों और समितियों का गठन किया गया। कई मामलों में लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चलती रही और कुछ आरोपियों को अदालतों से सजा भी मिली। इसके बावजूद अनेक प्रभावित परिवारों की शिकायत है कि उन्हें अब तक पूरी तरह न्याय नहीं मिला है।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की पीड़ित परिवारों से मुलाकात ने एक बार फिर 1984 की हिंसा और उससे जुड़े न्याय के सवालों को चर्चा में ला दिया है।इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से जवाबदेही की मांग की है। वहीं, पीड़ित परिवारों के लिए न्याय, सम्मान और पुनर्वास का मुद्दा अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। इस विषय पर कांग्रेस का विस्तृत जवाब संबंधित मुलाकात की रिपोर्ट में शामिल नहीं था।
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